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लॉकडाउन में 960 KM बाइक चलाकर कैंसर मरीज को पहुंचाई दवा, पुलिसवाले की लोग कर रहे तारीफ

बेंगलुरु पुलिस कंट्रोल रूम में काम करने वाले पुलिस कॉन्स्टेबल कुमारस्वामी ने कैंसर पीड़ित उमेश की परेशानी एक क्षेत्रीय टीवी चैनल पर सुनी थी, इसके बाद उन्होंने मदद करने की ठानी

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र बेंगलुरु | Updated: April 18, 2020 11:11 AM
पुलिसकर्मी ने दवा पहुंचाने के लिए बाइक से ही तय किया 960 किमी का सफर। (प्रतीकात्मक फोटो)

कोरोनावायरस के खतरे के बीच देशभर में लॉकडाउन जारी है। सरकार ने सभी नागरिकों से अपने घरों में रहने और सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का ठीक से पालन करने के लिए कहा है। हालांकि, इस बीच भी पुलिसकर्मी और डॉक्टर की समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने से पीछे नहीं हट रहे। कर्नाटक में एक पुलिसकर्मी ने अपने इसी जिम्मेदारी का परिचय देते हुए बाइक से 960 किलोमीटर का सफर किया और लॉकडाउन के चलते घर में रहने को मजबूर एक कैंसर के मरीज को दवा पहुंचाईं

पुलिसकर्मी का नाम एस कुमारस्वामी है, जो कि बेंगलुरु के सिटी पुलिस कंट्रोल रूम में हेड कॉन्सटेबल हैं। कुमारस्वामी को पिछले हफ्ते शुक्रवार (10 अप्रैल) को एक क्षेत्रीय टीवी चैनल में धारवाड़ के एक कैंसर मरीज उमेश की दास्तां पता चली। उमेश ने टीवी चैनल के एंकर को बताया था कि उनकी दवा सिर्फ बेंगलुरु में ही मिलेगी और उन्हें यह रविवार 12 अप्रै तक चाहिए।

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इसके बाद कुमारस्वामी ने उमेश को मदद पहुंचाने की ठानी।। अपनी सुबह की शिफ्ट खत्म करने के बाद दोपहर एक बजे कुमार उमेश का इंटरव्यू करने वाले टीवी चैनल के ऑफिस पहुंच गए। यहां से उन्होंने मरीज का नंबर लिया और बात कर दवाओं के बारे में पूछा। उमेश ने बताया कि उनकी कैंसर की दवाएं बेंगलुरु के इंद्रानगर स्थित डीएस रिसर्च सेंटर से मिलेंगी। इसके बाद कुमारस्वामी ने बिना देर किए अपनी मोटरसाइकिल उठाई और दवा लेने के बाद कंट्रोल रूम पहुंच कर एसीपी अजय कुमार सिंह से धारवाड़ जाने की इजाजत मांगी। अनुमति मिलने के बाद वे अपने घर पहुंचे और पत्नी-बेटे को भी मदद पहुंचाने की जानकारी दी।

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11 अप्रैल को सुबह 4 बजे सफर शुरू करने के बाद कुमारस्वामी उसी दिन 2:30 बजे उमेश के पास दवाएं लेकर पहुंच गए। पूरी यात्रा के दौरान कुमार ने सिर्फ एक पैकेट बिस्कुट और पानी ही पिया। कुमार को इनती जल्दी धारवाड़ पहुंचा देखकर उमेश के परिवारवाले चौंक उठे।

कुमारस्वामी ने शनिवार शाम 4 बजे ही घर लौटने का फैसला किया और रात 10:30 बजे चित्रदुर्ग पहुंच गए। कुमार के मुताबिक, इतने लंबे सफर के बाद वे काफी थका महसूस कर रहे थे। इसलिए उन्होंने चित्रदुर्ग में फायर स्टेशन ऑफिस में ही ठहरना ठीक समझा। सुबह 5:30 बजे वे चित्रदुर्ग से निकले और 10:30 बजे बेंगलुरु पहुंच गए।

कुमारस्वामी से जब धारवाड़ जाने के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, “मेरा उस जगह से कोई नाता नहीं है, मैं रामनगर से हूं। मैं सिर्फ मदद करना चाहता था। जब मैं उमेश के घर पहुंचा, तो पता चला कि उन्हें सहयोग की काफी जरूरत थी। उमेश का कैंसर ठीक हो सकता है, उन्हें दो साल तक दवाओं की जरूरत है।” इस घटना के बाद बेंगलुरु सिटी पुलिस कमिश्नर भास्कर राव ने कुमारस्वामी का सम्मान किया।

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