दिल्ली पुलिस की भूमिका बीते दिनों तब कठघरे में आ गई थी जब उन्हीं के एक अधिकारी ने आम जनता की शिकायतों पर जवाब देते हुए कहा था कि पुलिस तो नियम और कानून के तहत सख्त कार्रवाई करती है, लेकिन वो राजनैतिक शाख का फायदा उठाकर छूट जाते हैं। इस टिप्पणी के बाद राष्ट्रीय राजधानी के पुलिस की आलोचना हो रही थी। हालांकि, अब मामले में आला अधिकारी ने सामने आकर स्पष्टीकरण दिया है। साथ ही टिप्पणी करने वाले अधिकारी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए डिस्ट्रिक्ट लाइन्स में ट्रांस्फर कर दिया है।

डीसीपी नॉर्थ वेस्ट अकांक्षा यादव ने कहा कि अधिकारी द्वारा की गई टिप्पणी गैरजिम्मेदाराना थी और वो कहीं से भी हमारी कार्य प्रणाली को प्रतिबिंबित नहीं करती है। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारी की पहचान इंस्पेक्टर (लॉ एंड ऑर्डर) राजीव के तौर पर हुई है जो उस वक्त भरत नगर थाने में बतौर SHO पदस्थापित थे।

टिप्पणियां तथ्यों पर आधारित नहीं

DCP ने एक बयान में कहा, “सोशल मीडिया पर एक वीडियो सर्कुलेट हो रहा है, जिसमें एक पुलिस अधिकारी के कुछ बयान हैं। इन बयानों में आरोप लगाया गया है कि नशीले पदार्थों और दूसरे अपराधों में शामिल अपराधियों को जन प्रतिनिधियों के कहने पर छोड़ दिया जाता है। यह साफ किया जाता है कि लोगों से बातचीत के दौरान, इंस्पेक्टर राजीव ने कुछ गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणियां की थीं, जो तथ्यों पर आधारित नहीं थीं।”

उन्होंने आगे कहा कि ये टिप्पणियां उन्होंने अपनी निजी हैसियत से की थीं और ये दिल्ली पुलिस के आधिकारिक रुख को नहीं दिखातीं।
बयान में कहा गया, “दिल्ली पुलिस ने इस गंभीर दुर्व्यवहार का संज्ञान लिया है, और उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। उन्हें डिस्ट्रिक्ट लाइन्स में ट्रांसफर कर दिया गया है और एसएचओ के पद से तुरंत हटा दिया गया है। तय नियमों और कानूनों के मुताबिक उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।”

अकांक्षा ने कहा कि दिल्ली पुलिस पूरी तरह से कानून के मुताबिक काम करती है और हर मामले को बिना किसी बाहरी दबाव के, उसकी मेरिट के आधार पर देखती है। उन्होंने आगे कहा कि पुलिस बल अपराध के प्रति ‘जीरो-टॉलरेंस’ की नीति अपनाता है और इस तरह का बर्ताव उसके पेशेवर मानकों को नहीं दिखाता।

बता दें कि यह विवाद तब शुरू हुआ जब ऑनलाइन एक वीडियो सामने आया, जिसमें इंस्पेक्टर महिलाओं के एक ग्रुप से बात करते हुए दिख रहे थे। ये महिलाएं उनके पास अपने इलाके में नशीले पदार्थों की बिक्री (ड्रग पेडलिंग) के बारे में शिकायत लेकर आई थीं। वीडियो क्लिप में, अधिकारी महिलाओं से यह कहते हुए सुनाई दे रहे हैं कि वे अपनी शिकायतें “मुख्यमंत्री और विधायकों” के सामने रखें।

उन्हें यह आरोप लगाते हुए भी सुना जा सकता है कि जब पुलिस अपराधियों को गिरफ्तार करती है, तब भी जन प्रतिनिधियों के दखल के बाद उन्हें छोड़ दिया जाता है। “हम उन्हें पकड़ते हैं, लेकिन वे CM के पास चले जाते हैं, वे MLA के पास चले जाते हैं… और उन्हें वहां से (छोड़ने के) आदेश मिल जाते हैं। हमारे हाथ बंधे हुए हैं,” अधिकारी वीडियो में कहते हैं।

यह वीडियो आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने सोशल मीडिया पर शेयर किया था। इसमें इंस्पेक्टर यह सुझाव देते हुए भी दिख रहे हैं कि शिकायत करने वालों को पुलिस स्टेशन आने के बजाय, राजनेताओं के घरों के बाहर विरोध प्रदर्शन करना चाहिए।