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पुलिस कर रही थी एंबुलेंस का इंतजार, जज ने कार रोक घायलों को पहुंचाया अस्पताल

पंजाब के नडाला-बेगोवाल मार्ग पर सड़क दुर्घटना के बाद मौके से गुजर रहे जज ने घायलों को अस्पताल पहुंचाने में मदद की। इसके पहले घटनास्थल पर मौजूद लोग एंबुलेंस का इंतजार कर रहे थे।

प्रतीकात्मक फोटो PC: इंडियन एक्सप्रेस

पंजाब के नडाला-बेगोवाल मार्ग पर खड़े ट्रक से एक बाइक की जोरदार टक्कर हो गयी। जिससे बाइक सवार एक शख्स की मौत हो गयी जबकि दो लोग घायल अवस्था में सड़क पर पड़े थे। तभी परिवार समेत चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (सीजेएम) प्रितपाल सिंह वहां से गुजर रहे थे। उनकी मदद से घायल लोगों को नडाला के स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती करावाया गया। जहां से घायल लोगों को जालंधर रेफर कर दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मौके पर जज के पहुंचने से पहले पुलिस वाले और स्थानीय लोग भी वहां मौजूद थे लेकिन घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए वो सभी एंबुलेंस का इंतजार कर रहे थे। बताया जा रहा है कि सीजेएम ने इससे पहले भी मुक्तसर-बठिंडा रोड पर हुए हादसे में जख्मी हुए 6 लोगों की जान बचाई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नडाला-बेगोवाल मार्ग पर एक सड़क हादसा हुआ था जिसमें बाइक सवार एक शख्स की मौत हो गयी थी और दो लोग सड़क पर घायल अवस्था में तड़प रहे थे। तभी मुक्तसर से कपूरथला किसी कार्यक्रम में परिवार समेत शामिल होने जा रहे सीजेएम प्रितपाल सिंह हादसा देख तुरंत मदद के लिए रुक गए। बताया जा रहा है कि मौके पर मौजूद पुलिस कर्मचारी घायलों को अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस का इंतजार कर रहे थे। लेकिन जज के पहुँचते ही पुलिस हरकत में आयी और उनके आदेश पर मौके पर खड़ा टैंपो ट्रैवलर वाला घायल लोगों को अस्पताल ले जाने को तैयार हुआ। मृतक की पहचान अशोक पाल के रूप में हुई और घायलों की पहचान सचिन और गौरव के रूप में हुई है। फिलहाल पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

घायलों को अस्पताल पहुँचाने के बाद सीजेएम ने एएसआई हरजिंदर सिंह को फोन कर जख्मियों बारे पूछा तो एएसआई ने बताया कि वे दोनों ठीक हैं। बताया जा रहा है कि सीजेएम प्रितपाल सिंह ने इसके पहले 12 सितंबर को भी मुक्तसर-बठिंडा रोड पर हुए हादसे में जख्मी हुए 6 लोगों की जान भी बचाई थी। उनके इन कामों की काफी चर्चा हो रही है। बता दें कि सीजेएम प्रितपाल कानूनी सेवाएं अथॉरिटी मुक्तसर के सेक्रेटरी भी हैं। सीजेएम का कहना है कि फंक्शन में शामिल होने की बजाय घायलों को अस्पताल पहुंचाने पर आत्मिक सुकून मिला है।

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