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MP: 30 दिन पहले हुई थी ADG पुलिस के पिता की मौत, फिर भी घर में रखा है शव, दावा- आयुर्वेद से हो रहा इलाज

मध्य प्रदेश में एक अनोखा मामला सामने आया है जहां एक पुलिस अफसर का कहना है कि उनके पिता को 14 जनवरी को एक प्राइवेट अस्पताल ने मृत घोषित कर दिया था जिसके बाद से उनका आयुर्वेदिक इलाज जारी है।

प्रतीकात्मक फोटो, फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

मध्य प्रदेश में एक अनोखा मामला सामने आया है जहां एक पुलिस अफसर का कहना है कि उनके पिता को 14 जनवरी को एक प्राइवेट अस्पताल ने मृत घोषित कर दिया था जिसके बाद से उनका आयुर्वेदिक इलाज जारी है। बता दें कि प्राइवेट अस्पताल ने पुलिस अफसर के 84 वर्षीय पिता को 14 जनवरी को मृत घोषित किया था।

क्या है पूरा मामला: दरअसल पूरा मामला मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल का है जहां अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजी) राजेन्द्र कुमार मिश्रा का कहना है कि उनके पिता की एक महीने पहले फेफड़ों की बीमारी के चलते मौत हो गई थी।

कैसे आया मामला सामने: दरअसल इस मामले का खुलासा राजेन्द्र के दवाब देने पर उनके मृत पिता की सेवा करने वाले दो लोगों ने किया। वहीं शव के सड़ने के चलते उससे काफी बदबू आने लगी थी और उसकी सेवा करने से इन दो लोगों की भी तबीयत खराब होने लगी थी। वहीं काम करने वाले लोगों ने कहा कि राजेन्द्र ने तांत्रिकों का भी सहारा लिया था। वहीं राजेन्द्र ने इस बात से इनकार कर दिया है।

राजेन्द्र कुमार मिश्रा का क्या है कहना: इस पूरे मामले पर राजेन्द्र कुमार मिश्रा का कहना है कि ये एक निजी मामला है, मुझे नहीं पता कि बंसल (प्राइवेट अस्पताल) वालों ने क्या कहा लेकिन जब उन्होंने हार मान ली तब मैं अपने पिता को घर वापस लेकर आया और आयुर्वेदिक तरीके से उनका इलाज शुरू करवाया। वहीं पिता से बातचीत या उनको दिखाने के लिए राजेन्द्र ने साफ तौर से मना कर दिया। बता दें कि अभी राजेन्द्र छुट्टी पर हैं वहीं बंसल भी राजेन्द्र के पिता के नाम का डेथ सर्टिफिकेट जारी कर चुका है।

फॉरेन्सिक डिपार्टमेंट के पूर्व प्रमुख का क्या है कहना: इस मामले पर फॉरेन्सिक डिपार्टमेंट के पूर्व प्रमुख डॉ डी के सतपति का कहना है कि मैंने शव की जांच की है। मेडिकल साइंस के मुताबिक वो जीवित नहीं थे। हालांकि इसे मिश्रा परिवार के लिए फेथ कहा जा सकता है जिनका मानना है कि वो समाधि में हैं। जब मैंने शव की जांच की थी तब शव डिकंपोज नहीं हुआ था हालांकि अभी के हालात का मुझे पता नहीं। बता दें कि सतपति राजेन्द्र के घर गए थे हालांकि उन्हें तारीख याद नहीं है।

प्राइवेट अस्पताल का क्या है कहना: इस मामले पर प्राइवेट अस्पताल बंसल की तरफ से लोकेश झा ने बताया कि केएम मिश्रा को 13 जनवरी को अस्पताल में भर्ती करवाया गया था लेकिन 14 जनवरी को शाम 4 बजे उनका निधन हो गया। उनके लंग्स में दिक्कत थी और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। उनका इलाज डॉ अश्विनी कर रहे थे। वहीं हमने उनका डेथ सर्टिफिकेट जारी कर दिया है जिसकी एक कॉपी परिजन और एक कॉपी बीएमसी को भेज दी गई है। अगर इस मामले में पुलिस जांच करती है तो हम उन्हें डेथ सर्टिफिकेट्स दिखा सकते हैं।

पुलिस का क्या है कहना: फिलहाल इस पूरे मामले पर पुलिस का कहना है कि उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि इस हालात में वो कैसे रिएक्ट करें क्योंकि उनके पास अभी तक कोई कंप्लेंट नहीं आई है। इसके साथ ही डीजीपी वीके सिंह ने कहा- मुझे मामले की जानकारी मिली है लेकिन बिना किसी शिकायत के हम आगे जांच नहीं कर सकते। हालांकि अभी तक मैं मिश्रा से बात नहीं कर पाया हूं लेकिन कुछ आला अधिकारी उनसे बात करेंगे।

व्हाट्सएप ग्रुप में फैला था मैसेज: पुलिस हेडक्वार्टर के सूत्रों का कहना है कि राजेन्द्र की पिता के मौत के बाद सीनियर अफसर्स के व्हाट्सएप ग्रुप पर उनकी अंतिम संस्कार के लिए मैसेज आया था लेकिन जल्द ही उसे हटा दिया गया।

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