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ब‍िहार: अब जड़ तलाश कर अपराध से न‍िपटने की कवायद में पुल‍िस, आपराधिक इलाकों की हो रही पहचान

भागलपुर रेंज के आईजी सुशील खोपड़े बताते हैं कि अपराध की नीयत का पता लगने पर उस पर आसानी से काबू पाया जा सकेगा। गांवों, पंचायतों, शहरों व थानों के इलाके में कितने और कौन सा गिरोह सक्रिय है, इसकी भी पहचान होगी।

प्रतीकात्मक तस्वीर।

बिहार में अपराधग्रस्त इलाकों की पहचान का काम शुरू है। उस पर कारगर तरीके से काबू पाने के लिए बड़ी कार्य योजना बनाने की तैयारी है। भागलपुर रेंज के आईजी सुशील खोपड़े ने खास मुलाकात में इस संवाददाता को बताया कि थाना स्तर पर इलाके को चिंहित करने का काम अगले हफ्ते तक पूरा कर लिया जाएगा। जिलों के एसपी अपने मातहत पुलिस अधिकारियों के जरिए जोर-शोर से इस काम में लगे हैं। इसके बाद पंचायत और गांव की शिनाख्त कर उन इलाकों में अपराध की वजह तलाशी जाएगी। इसके लिए बीते दस साल के दौरान हुए अपराध के आंकड़े जुटाए जा रहे हैं। हाल ही में राज्य के पुलिस महानिदेशक कृपास्वरूप द्विवेदी ने इस बाबत जरूरी निर्देश दिए हैं।और जनपद या जिला मुख्यालय में खुद जाकर आंकड़ों का जायजा ले रहे हैं। इस महीने मुंगेर आने का कार्यक्रम है। अगले महीने भागलपुर आएंगे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी अपराध की थाना स्तर पर समीक्षा करनी शुरू कर दी है। असल में राज्य की राजधानी पटना समेत दूसरे जिलों में हाल के दिनों में हत्या, लूट, बलात्कार के कई वाकए हुए हैं।

आईजी बताते हैं कि अपराध की नीयत का पता लगने पर उस पर आसानी से काबू पाया जा सकेगा। गांवों, पंचायतों या शहरों व थानों में कितने और कौन सा गिरोह सक्रिय है। इसकी भी पहचान होगी। केवल हत्या, लूट, बलात्कार, चोरी, सेंधमारी जैसे संगीन वारदात ही अपराध की श्रेणी में नहीं आते। महिला व अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार, जमीन विवाद, आपसी रंजिश और आर्थिक अपराध जैसे जुर्म भी समाज में हो रहे हैं। बल्कि हाल के सालों में इन वारदातों में इजाफा हुआ है। इन सब को परखा व जांचा जा रहा है। ताकि कार्य योजना का दायरा हरेक तरह के अपराध पर काबू पाने के मकसद से बढ़ाया जा सके। यह सच है कि इसमें थोड़ा वक्त लग सकता है। मगर ठोस तरीके से जमीन पर उतारने की कोशिश है। जिसके बढ़िया नतीजे सामने आने की उम्मीद उन्होंने जताई है।

भागलपुर रेंज के आईजी सुशील खोपड़े।

आईजी खोपड़े ने बताया कि वारदात के बाद पुलिस मौके पर फौरन पहुंचे। इसके लिए सुगम सड़क हो। आवादी विहीन सुनसान इलाकों में पुलिस गश्त लगातार हो। थाने या आउटपोस्ट खोंलने की जरूरत है। इन बातों पर भी गौर किया जाएगा। उन्होंने माना कि दियारा इलाके में काम करना थोड़ा कठिन है। मगर घुड़सवार पुलिस बल के जरिए इस पर काबू पाया जाएगा। घुड़सवार पुलिस बल को भी मजबूत करने की योजना है। घोड़ों की खरीद पुलिस महकमा कर रहा है। इसके अलावा, वे बताते हैं कि कई राज्य ऐसे हैं जहां अपराध काफी कम है। इसकी वजह राज्य के वाशिंदों की मानसिकता भी है। और पुलिस के काम करने का तरीका भी है। पुलिस की भूमिका भी अहम है। बिहार थोड़ा अलग है। जातिवादी मानसिकता सबसे बड़ा रोड़ा है। सरकारी अधिकारियों खासकर पुलिस महकमा में दो साल में तबादला नीति को उन्होंने जरूरी बताया।

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