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राजस्थानः साइबर अपराध की घटनाओं को रोकने में पुलिस विफल

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक तो महाराष्ट्र और कर्नाटक के बाद राजस्थान में सबसे ज्यादा लोगों से क्रेडिट और डेबिट कार्ड की डिटेल पूछी गई। इनकी संख्या करीब 5 हजार थी, जिनमें सबसे ज्यादा जयपुर शहर के लोगों से जानी गई। पुलिस ने दर्ज मामलों की खोजबीन करके कुछ अपराधियों को झारखंड से गिरफ्तार किया था। ठगी के लिए लोगों के पास नियमित फोन आने की रिपोर्ट पुलिस तक पहुंच रही है। बैंक के क्रेडिट और डेबिट कार्ड के जरिए सबसे ज्यादा आर्थिक अपराध घटित हो रहे है और लोग आसानी से इसमें फंस कर अपनी बैंक से जुड़ी जानकारी दे रहे हैं। वहीं पुलिस के पास साइबर अपराधों से निपटने के लिए कोई प्रशिक्षण नहीं है और ऐसे अपराधों में साइबर विशेषज्ञों की मदद ले रहे हैं।

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राजस्थान में साइबर अपराधों का ग्राफ जिस तेजी से बढ़ रहा है उससे निपटने में पुलिस उतनी ही सुस्त नजर आ रही है। साइबर अपराध से निपटने के लिए सरकार बड़े-बड़े दावे तो करती है पर जमीनी हकीकत उसके उलट है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़े बताते हैं कि राज्य में इंटरनेट के जरिए आर्थिक अपराधों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। साइबर क्राइम के मामले में जयपुर रेकॉर्ड तोड़ रहा है। देश में जयपुर शहर साइबर क्राइम में तीसरे स्थान पर है। राज्य में बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और मंत्रियों ने जनता को जागरूक रहने की सलाह दी है। यही नहीं सरकार ने इससे निपटने के लिए इस साल के बजट में पुलिस में अलग से प्रकोष्ठ बनाने का एलान भी किया है।

प्रदेश में बैंक खातों से ठगी के जरिए रकम निकालने का भय इस कदर हो गया है कि लोग इंटरनेट बैंकिंग के बजाए बैंक जाकर ही अपना लेन-देन करने में भलाई समझने लगे है। वहीं हाल में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जयपुर में किसान सेवा पोर्टल की शुरुआत के मौके पर किसानों को साइबर ठगों से सावधान रहने को कहा। उन्होंने कहा, किसी को फोन पर कोई जानकारी नहीं देना, वरना खाता खाली हो जाएगा। गहलोत ने कहा कि नई व्यवस्था में आपको ध्यान रखना है और साइबर अपराधियों से बचना है। इसी समारोह में सहकारिता राज्य मंत्री टीकाराम जूली ने किसानों से कहा कि साइबर ठग सक्रिय हैं। ऐसे में अपने खाते और एटीएम से जुड़ी जानकारी किसी को न दें। साथ ही किसी के कहने पर भी अपने मोबाइल से कोई बटन नहीं दबाएं। सावधानी रखने से ही किसान साइबर ठगी से बच सकते हैं।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक 2014-15 की तुलना में 2015-16 में राज्य में साइबर अपराधों में 36 फीसद की बढ़ोतरी हुई है वहीं 2016-17 में यह 45 फीसद हो गई। ब्यूरो के पिछले साल जारी आंकड़ों के मुताबिक राजस्थान देश में साइबर अपराध में चौथे नंबर पर पहुंच गया और इससे पहले पांचवें स्थान पर था। ब्यूरो के 2016-17 के आंकड़ों के अनुसार 20 लाख से ज्यादा की आबादी वाले शहरों में जयपुर तीसरे नंबर पर है। पहले नंबर पर मुंबई और दूसरे नंबर पर बंगलुरु हैं।

पुलिस के अनुसार चार महीने से हर रोज दो मामले साइबर अपराध के दर्ज हो रहे है। वहीं इन अपराधों से निपटने में पुलिस की तैयारियां नाकाफी साबित हो रही हैं। प्रदेश में दर्ज होने वाले साइबर अपराधों में कुछ ही मामलों में पुलिस अपराधियों तक पहुंच पा रही है। इसमें भी अपराधियों के सरगनाओं को पकड़ने में वह विफल ही रही है। साइबर ठगी के शिकार हुए जयपुर के रमेश कुमार गुप्ता का कहना है कि उनके साथ बैंकिंग ठगी की घटना हुई थी। इस मामले में उनके कार्ड से भुगतान उठा लिया गया था। इसकी रिपोर्ट पुलिस में दर्ज कराने के बाद उन्हें ही तमाम दस्तावेज और जानकारियां पुलिस को जुटा कर देनी पड़ी थी। छह महीने बीत जाने के बाद भी पुलिस की साइबर शाखा कुछ भी पता नहीं कर सकी है।

प्रदेश में सिर्फ जयपुर और राज्य अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो में ही साइबर सेल है जबकि कई प्रदेशों में जिला स्तर तक यह बन गया है। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त लक्ष्मण गौड़ का कहना है कि साइबर अपराधों से बचने के लिए जागरूकता जरूरी है। पीड़ितों की मदद के लिए पुलिस भरसक कोशिश कर रही है। कई मामलों में साइबर अपराधी पकड़े भी गए हैं। साइबर विशेषज्ञ आयुष भारद्वाज का कहना है कि ऐसे अपराध बढ़ने का सबसे बड़ा कारण लोगों में जागरूकता की कमी है। इसके अलावा तकनीक निरंतर आधुनिक हो रही है और सुरक्षा एजंसियां अपग्रेड नहीं हो पा रही हैं। साइबर अपराधों की लगातार बढ़ोतरी को देखते हुए पुलिस और अन्य एजंसियों को भी तकनीक में दक्षता हासिल करना जरूरी है। साथ ही इन अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए एजंसियों और पुलिस के बीच तालमेल भी बहुत जरूरी है।

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