मुंबई हाईकोर्ट ने कांडिवली (ईस्ट) में एक मस्जिद से सुबह-सुबह होने वाले लाउडस्पीकर के शोर को लेकर दायर याचिका पर सख्त रुख दिखाया है। कोर्ट ने मुंबई पुलिस से इस मामले में जवाब मांगा है और कहा है कि अगर शिकायत सही पाई गई, तो यह शोर प्रदूषण नियम, 2000 (Noise Pollution Rules, 2000) का गंभीर उल्लंघन होगा।
यह मामला ठाकुर गांव की रहने वाली वकील रीना रिचर्ड ने उठाया है। उनका कहना है कि उन्होंने कई बार समता नगर पुलिस स्टेशन में शिकायत की, लेकिन लगातार कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पहले अधिकारियों ने कोर्ट में गलती मानकर माफी मांगी थी और कुछ मामलों में केस भी दर्ज किए गए थे, लेकिन 2024 से फिर से लाउडस्पीकर की अनुमति दी जाने लगी।
सरकारी वकील पर कोर्ट में गलत जानकारी देने का आरोप
याचिकाकर्ता का कहना है कि यह इलाका साइलेंस जोन में आता है, क्योंकि मस्जिद के पास 50 मीटर के अंदर अस्पताल का मैटरनिटी वार्ड, एक स्कूल और एक कॉलेज है। इसके बावजूद सरकारी वकील कोर्ट में गलत जानकारी दे रहे हैं कि यह साइलेंस जोन नहीं है।
कोर्ट की बेंच ने कहा कि अगर ये आरोप सही हैं, तो मामला काफी गंभीर है। साथ ही पुलिस को दो हफ्ते के अंदर हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया गया है। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि अगर नियमों का पालन नहीं हुआ, तो संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई हो सकती है।
सुनवाई के दौरान जस्टिस कमल आर खाता ने जनवरी 2025 के एक फैसले का भी जिक्र किया, जिसमें कहा गया था कि लाउडस्पीकर का इस्तेमाल किसी भी धर्म का जरूरी हिस्सा नहीं है। कोर्ट ने तब महाराष्ट्र सरकार को यह भी निर्देश दिया था कि धार्मिक और अन्य जगहों पर लाउडस्पीकर की आवाज को नियंत्रित करने के लिए ठोस व्यवस्था बनाई जाए।
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तेलंगाना हाईकोर्ट ने गुरुवार को पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। यह याचिका हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर से जुड़ी है। खेड़ा की ओर से पेश होते हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि पवन खेड़ा के खिलाफ कई आरोप दर्ज किए गए हैं, लेकिन मामला सिर्फ मानहानि का है, इससे ज्यादा कुछ नहीं। उन्होंने तर्क दिया कि एफआईआर राजनीतिक विरोधियों को चुप कराने, परेशान करने और डराने का एक चालाक तरीका है और इसके लिए गिरफ्तारी जायज नहीं है। सिंघवी ने स्पष्ट किया कि खेड़ा ने तेलंगाना हाईकोर्ट में याचिका इसलिए दायर की क्योंकि जब उन्हें एफआईआर की सूचना मिली, तब वे हैदराबाद में अपनी पत्नी से मिलने गए हुए थे। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
