प्रदर्शन कर रहीं आशा कार्यकर्ताओं की पुलिस से झड़प, प्रियंका बोलीं- यूपी सरकार का वार कोरोना योद्धाओं का अपमान, किया यह वादा

कहा, “शाहजहांपुर में अपनी मांग को लेकर सीएम से मिलने जा रही आशा बहनों को पुलिस से पिटवाया और जूते से रौंदा।”

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शाहजहांपुर में आशा कार्यकर्ताओं को जबरन ले जाती महिला पुलिस। (फोटो- वीडियो ग्रैब)

यूपी के शाहजहांपुर में मंगलवार को सीएम योगी आदित्यनाथ को ज्ञापन देने पहुंची आशा कार्यकर्ताओं को जलालाबाद पुलिस ने उठाकर शहर के रोजा थाने भेज दिया। इस दौरान पुलिस की महिला सिपाहियों ने आशा कार्यकर्ताओं की पिटाई भी की। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो विपक्षी दलों ने यूपी सरकार पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया। वीडियो में पुलिस वाले मीडिया को भी फोटो खींचने से रोकते दिख रहे हैं।

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने वीडियो को ट्वीट करके कहा, “उप्र सरकार द्वारा आशा बहनों पर किया गया एक-एक वार उनके द्वारा किए गए कार्यों का अपमान है। मेरी आशा बहनों ने कोरोना में व अन्य मौकों पर पूरी लगन से अपनी सेवाएं दीं। मानदेय उनका हक है। उनकी बात सुनना सरकार का कर्तव्य। आशा बहनें सम्मान की हकदार हैं और मैं इस लड़ाई में उनके साथ हूं।”

ट्वीट वीडियो में उन्होंने लिखा, “उप्र सरकार की शर्मनाक हरकत। शाहजहांपुर में अपनी मांग को लेकर सीएम से मिलने जा रही आशा बहनों को पुलिस से पिटवाया और जूते से रौंदा।” कहा, “कांग्रेस पार्टी आशा बहनों के मानदेय के हक और उनके सम्मान के प्रति प्रतिबद्ध है और सरकार बनने पर आशा बहनों एवं आंगनबाड़ी कर्मियों को 10,000 रु प्रतिमाह का मानदेय देगी।”

यूपी में अगले कुछ महीनों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में सभी दलों के नेता जनता से मिलने और उनके संघर्ष में साथ देने के वादे के साथ आगे आने लगे हैं। मंगलवार को बदायूं और शाहजहांपुर में सीएम की सभा थी।

आशा कार्यकर्ता वहीं अपने मानदेय के लिए उनको ज्ञापन देने जा रही थीं, लेकिन पुलिस ने उन्हें वहां पहुंचने से पहले ही रास्ते में पकड़कर शहर से बाहर दूर भेज दिया। इस दौरान उनकी पिटाई की गई और मीडिया वालों को भी उनकी तस्वीरें लेने से रोका गया।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने बदायूं और शाहजहांपुर में करोड़ों रुपये लागत की योजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास किया और आरोप लगाया कि राज्य की पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी सरकार में दंगे होते थे और आतंकवादियों के मुकदमे वापस होते थे लेकिन अब सभी त्यौहार एवं पर्व शांतिपूर्वक मनाये जाते हैं।

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