केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना के तहत रोजगार आधारित प्रोत्साहन (ईएलआइ) का लाभ जिले में सुस्त रफ्तार से लागू हो पा रहा है। जिले की लगभग 1,700 पात्र कंपनियों ने अब तक योजना के लिए अनिवार्य पंजीकरण नहीं कराया है, जिससे अगले महीने नए कर्मचारियों को मिलने वाली पहली किश्त अटकने की आशंका बढ़ गई है।
नियमानुसार योजना का लाभ प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से सीधे कर्मचारियों के बैंक खातों में भेजा जाना है, लेकिन इसके लिए कंपनियों का संबंधित पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य है। पंजीकरण में हो रही देरी से न केवल विभाग बल्कि हजारों कर्मचारी भी चिंता में हैं। स्पष्ट किया गया है कि यदि कंपनियां समय रहते पंजीकरण नहीं करातीं, तो वे योजना के लाभ से वंचित रह जाएंगी। गौतमबुद्धनगर जैसे बड़े औद्योगिक हब में, जहां हर महीने हजारों युवाओं को रोजगार मिलता है, वहां तकनीकी खामियां और औपचारिकताओं में लापरवाही योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में बाधा बन रही हैं।
आंकड़ों के अनुसार, जिले में करीब 3,774 नए कर्मचारी ऐसे हैं जिनका पंजीकरण और यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) सक्रिय है, लेकिन उन्होंने अब तक अपने यूएएन को बैंक खाते से लिंक नहीं कराया है। ईपीएफओ के अनुसार, बिना बैंक खाता लिंक हुए पहली किश्त का भुगतान संभव नहीं है। इसके अलावा, 2,000 कर्मचारियों का चेहरा प्रमाणीकरण पूरा न होने से रुकी हुई है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन लगातार संबंधित कंपनियों को चेतावनी नोटिस भेज रहा है कि यदि समय रहते सभी औपचारिकताएं पूरी नहीं की गईं, तो वे योजना के वित्तीय लाभ से वंचित हो सकते हैं।
योजना के प्रमुख लाभ और पात्रता
इस योजना के तहत नए कर्मचारियों को उनके वेतन के एक निश्चित हिस्से के रूप में सरकार की ओर से वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाता है। इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि पहली बार औपचारिक क्षेत्र में शामिल होने वाले कर्मचारियों को सीधे उनके बैंक खाते में तीन किश्तों में राशि प्राप्त होती है। इसके अलावा, सरकार नियोक्ताओं को भी ईपीएफ योगदान में राहत प्रदान करती है, जिससे कंपनियां अधिक से अधिक नियुक्तियां करने के लिए प्रेरित होती हैं। यह योजना न केवल बेरोजगारी दर को कम करने में सहायक है, बल्कि यह सुनिश्चित करती है कि श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा (पीएफ और पेंशन) के दायरे में लाया जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कंपनियां और कर्मचारी समय पर औपचारिकताएं पूरी करते हैं, तो इससे जिले की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी और हजारों परिवारों को सीधा आर्थिक लाभ पहुंचेगा।
क्या है प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना
प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना केंद्र सरकार की एक दूरदर्शी पहल है, जिसका उद्देश्य देश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करना और औपचारिक क्षेत्र में कार्यबल को बढ़ाना है। औद्योगिक क्षेत्रों के लिए यह योजना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि यह नियोक्ताओं (कंपनियों) पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ को कम करती है और कर्मचारियों को सीधे आर्थिक सहायता प्रदान कर उन्हें प्रोत्साहित करती है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा जैसे क्षेत्रों में, जहां विनिर्माण और आइटी सेक्टर का विस्तार हो रहा है, वहां नए श्रमिकों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए यह योजना रीढ़ की हड्डी के समान है।
लगातार इन कंपनियों के संपर्क में रहकर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। जल्दी ही इन कर्मचारियों का बी पंजीकरण करा दिया जाएगा।
वैभव सिंह, क्षेत्रीय भविष्य निधि, कमिश्नर, ग्रेटर नोएडा
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