PM Modi Punjab Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 जुलाई को पंजाब के जालंधर दौरे पर पहुंचेंगे, जहां वह कई विकास और रेलवे से जुड़े परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। हालांकि यह दौरा केवल विकास कार्यों तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि ऐसे समय हो रहा है जब पंजाब की राजनीति तेजी से बदल रही है। भारतीय जनता पार्टी पहले ही ऐलान कर चुकी है कि वह फरवरी 2027 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव अपने दम पर लड़ेगी।
2 जुलाई को रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने प्रधानमंत्री के इस दौरे की घोषणा की थी। लेकिन इसके अगले ही दिन पंजाब की राजनीति का केंद्र एक फिल्म बन गई। 3 जुलाई को मानवाधिकार कार्यकर्ता दिवंगत जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित दिलजीत दोसांझ अभिनीत फिल्म ‘सतलुज‘ ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 पर रिलीज हुई।
इसके दो दिन बाद 5 जुलाई को फिल्म को अचानक प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। हालांकि इससे पहले 4 जुलाई को दिलजीत दोसांझ ने एक वीडियो जारी कर लोगों को चेताया था कि फिल्म कभी भी हटाई जा सकती है, जिसके बाद हजारों लोगों ने इसे डाउनलोड कर लिया।
फिल्म हटाए जाने के बाद पंजाब में बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। अब शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी), शिरोमणि अकाली दल, अमृतपाल सिंह के समर्थकों द्वारा बनाए गए अकाली दल (वारिस पंजाब दे) और कई सामाजिक संगठन राज्यभर में इसकी निजी स्क्रीनिंग करा रहे हैं।
आम आदमी पार्टी ने भी फिल्म पर लगी रोक की आलोचना करते हुए कहा है कि उसकी सरकार निजी स्क्रीनिंग का विरोध नहीं करेगी। वहीं, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के कई नेता भी गांवों और कस्बों में फिल्म की स्क्रीनिंग कराने में सहयोग कर रहे हैं।
फिल्म में पंजाब में उग्रवाद के दौर के दौरान कथित फर्जी मुठभेड़ों और उस समय राष्ट्रपति शासन तथा बाद में कांग्रेस के मुख्यमंत्री रहे स्वर्गीय बेअंत सिंह सरकार के कार्यकाल की घटनाओं को दिखाया गया है। फिल्म हटाए जाने को लेकर भाजपा लगातार विपक्ष के निशाने पर है, हालांकि पार्टी ने किसी भी तरह की भूमिका से साफ इनकार किया है।
रवनीत सिंह बिट्टू ने दिलजीत दोसांझ की फिल्म पर उठाए सवाल
इस विवाद ने भाजपा के भीतर भी मतभेद उजागर कर दिए हैं। रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने दिलजीत दोसांझ पर पंजाब की त्रासदी का एकतरफा चित्रण करने का आरोप लगाया और कहा कि फिल्म में उग्रवाद की शुरुआत और पुलिसकर्मियों के बलिदान को नजरअंदाज किया गया है।
दूसरी ओर, वरिष्ठ भाजपा नेता इकबाल सिंह लालपुरा ने सार्वजनिक रूप से बिट्टू को अपनी मर्यादा में रहने की सलाह दी। वहीं पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने विवाद खत्म करने की अपील करते हुए कहा कि पुराने घावों को फिर से कुरेदने से किसी का भला नहीं होगा और पंजाब की शांति सबसे महत्वपूर्ण है।
भाजपा के एक नेता ने स्वीकार किया कि फिल्म कांग्रेस शासनकाल की घटनाओं पर आधारित होने के बावजूद पार्टी को ही सफाई देनी पड़ रही है, जबकि कांग्रेस नेताओं ने इस मुद्दे पर अपेक्षाकृत संतुलित बयान दिए हैं।
अपने जालंधर दौरे में प्रधानमंत्री मोदी पुनर्विकसित जालंधर कैंट रेलवे स्टेशन का उद्घाटन करेंगे। यहीं से वह मोहाली (साहिबजादा अजीत सिंह नगर), श्री मुक्तसर साहिब और श्री आनंदपुर साहिब सहित देश के कई पुनर्विकसित रेलवे स्टेशनों का वर्चुअल उद्घाटन भी करेंगे।
इस साल यह प्रधानमंत्री का दूसरा पंजाब दौरा होगा। इससे पहले वह 1 फरवरी को गुरु रविदास जयंती के अवसर पर जालंधर स्थित डेरा सचखंड बल्लां गए थे। जालंधर दोआबा क्षेत्र का प्रमुख शहर है, जहां भाजपा रविदासिया समुदाय के बीच अपना आधार मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
वहीं श्री मुक्तसर साहिब शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल का गृह जिला है। भाजपा और अकाली दल का वर्षों पुराना गठबंधन 2020 में कृषि कानूनों के विवाद के बाद टूट गया था।
इधर, पंजाब में प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ किसान संगठनों का आंदोलन भी तेज हो रहा है। संयुक्त किसान मोर्चा और किसान मजदूर मोर्चा राज्यभर में प्रदर्शन कर रहे हैं। किसान मजदूर मोर्चा के नेता सरवन सिंह पंधेर का कहना है कि यह समझौता किसानों के हितों के खिलाफ है और आंदोलन आगे और तेज होगा।
भाजपा के लिए प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब ‘सतलुज’ विवाद ने पंजाब के पुराने जख्मों पर फिर बहस छेड़ दी है। पार्टी विकास परियोजनाओं के जरिए राजनीतिक एजेंडा अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है। हालांकि भाजपा 2027 का चुनाव अकेले लड़ने की बात दोहरा रही है, लेकिन उसने यह भी साफ किया है कि भविष्य में किसी संभावित गठबंधन के लिए उसके दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं हैं।
यह भी पढ़ें: आखिर राजा वड़िंग को पंजाब का अध्यक्ष का क्यों बनाए रखना चाहती है कांग्रेस? जानिए इसके पीछे की रणनीति
पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी कलह जारी है, लेकिन राज्य विधानसभा चुनाव होने में लगभग अब छह महीने बचे हैं, लेकिन पार्टी हाईकमान ने राज्य की लीडरशिप को लेकर अब किसी बदलाव की संभावना से साफ इनकार कर दिया है। हाई कमान ने यथास्थिति बनाए रखने का फैसला किया है। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस हाईकमान पंजाब की कमान फिलहाल अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के हाथों में ही रखना चाहता है। पार्टी का मानना है कि राजा वड़िंग को अभी भी जमीनी कार्यकर्ताओं का मजबूत समर्थन हासिल है। इसलिए उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखने के पक्ष में सहमति बन रही है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
