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सोनिया के चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका स्थगित

सुप्रीम कोर्ट ने सोनिया गांधी की नागरिकता और मुसलिम वोट हासिल करने के लिए कथित रूप से सांप्रदायिक कार्ड खेलने के मामले के मद्देनजर 2014 में रायबरेली लोकसभा निर्वाचन सीट से उनके चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई गुरुवार को स्थगित कर दी।

Author नई दिल्ली | October 28, 2016 3:07 AM

सुप्रीम कोर्ट ने सोनिया गांधी की नागरिकता और मुसलिम वोट हासिल करने के लिए कथित रूप से सांप्रदायिक कार्ड खेलने के मामले के मद्देनजर 2014 में रायबरेली लोकसभा निर्वाचन सीट से उनके चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई गुरुवार को स्थगित कर दी। न्यायमूर्ति एआर दवे की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि सात जजों वाली संवैधानिक पीठ इसी प्रकार के मामले पर पहले ही सुनवाई कर रही है। लिहाजा इस मामले पर इस समय कोई रुख अपनाना उचित नहीं होगा। पीठ ने कहा- सात जजों की संवैधानिक पीठ इसी प्रकार के मामले पर सुनवाई कर रही है। इस मामले पर निर्णय होने दीजिए। इसके बाद हम इस मामले पर सुनवाई कर सकते हैं। हम कोई आदेश नहीं दे रहे। यदि हम इस मामले में कोई रुख अपनाएंगे तो यह उचित नहीं होगा। क्योंकि एक बड़ी पीठ मामले की सुनवाई कर रही है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जनप्रतिनिधित्व कानून, 1951 के तहत दर्ज याचिका को 11 जुलाई को जुर्माने के साथ खारिज कर दिया था और कहा था कि चुनावी याचिका में तथ्यों का अभाव है।

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सोनिया पर कथित रूप से मुसलमानों के मत हासिल करने के लिए भ्रष्ट आचरण अपनाने का आरोप लगाने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने कहा था कि इसमें बताया जाना चाहिए कि यह काम उनकी उम्मीदवारी घोषित करने की तिथि और चुनाव के बीच प्रचार मुहिम के दौरान किया गया। यह भी कि उन्होंने अपने धर्म के आधार पर वोट की अपील करने के लिए स्वयं या अपने किसी एजंट या किसी अन्य व्यक्ति के जरिए अपनी सहमति से इस काम को अंजाम दिया।

राकेश सिंह द्वारा दायर चुनाव याचिका में कहा गया था कि सोनिया गांधी के पास दोहरी नागरिकता है। वे जन्म से इतालवी नागरिक हैं और इटली का कानून दोहरी नागरिकता की अनुमति नहीं देता है। याचिककर्ता ने यह भी मांग की थी कि रायबरेली से उनके चुनाव को निरस्त करार देते हुए दरकिनार कर दिया जाए। इसमें कहा गया था कि सोनिया ने चुनाव से पहले जामा मस्जिद के शाही इमाम के जरिए कथित रूप से मुसलमानों से अपील की थी कि वे उनके और उनकी पार्टी के लिए मतदान करें जो कि भ्रष्ट आचरण है। हाई कोर्ट ने कहा था कि भ्रष्ट आचरण के आरोप समाचार चैनल की रपटों के आधार पर लगाए गए हैं। वास्तव में क्या हुआ था, यदि इस बात को साबित करने के लिए और सबूत नहीं हैं तो इन रपटों का कोई महत्त्व नहीं है। इसमें कहा गया था कि इन रपटों पर तब तक विचार नहीं किया जा सकता, जब तक इनके साथ टीवी चैनलों पर समाचार रिपोर्ट देने वाला रिपोर्टर का बयान नहीं हो।

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