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सैन्य कमांडरों का अध्यक्ष पद बनाने की तैयारी

भारतीय सेना में वरिष्ठतम पद चीफ आॅफ डीफेंस स्टाफ सृजित करने की योजना सरकार ने रद्द कर दी है। इसकी जगह सेना के तीनों कमांडरों के बीच समन्वय के लिए चौथे कमांडर का पद बनाया जाएगा, जो तीनों का वरिष्ठ नहीं बल्कि समकक्ष होगा।

Author January 14, 2017 12:41 AM
थल सेनाध्यक्ष बिपिन रावत की फाइल फोटो

दीपक रस्तोगी

भारतीय सेना में वरिष्ठतम पद चीफ आॅफ डीफेंस स्टाफ सृजित करने की योजना सरकार ने रद्द कर दी है। इसकी जगह सेना के तीनों कमांडरों के बीच समन्वय के लिए चौथे कमांडर का पद बनाया जाएगा, जो तीनों का वरिष्ठ नहीं बल्कि समकक्ष होगा। उसे कमांडरों की कमेटी का अध्यक्ष कहा जाएगा, जो सरकार और तीनों रक्षा बलों के कमांडरों के बीच संवाद का काम करेगा। इस योजना पर थल, वायु और नौसेना के कमांडरों की संयुक्त बैठक में मुहर लगने के आसार हैं। 21 जनवरी को देहरादून में होने जा रही इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सीधे रक्षा कमांडरों के साथ देश के सुरक्षा हालात पर चर्चा करेंगे।
हाल के दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीधे सेना के कमांडरों के साथ संपर्क बढ़ा दिया है। सेना दिवस पूर्व संध्या पर नए थल सेनाध्यक्ष बिपिन रावत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इससे पहले वायु सेना प्रमुख बीएस धनोआ प्रधानमंत्री से मिले। जल्द ही नौ सेना प्रमुख सुनील लांबा की भी मुलाकात होनी है। अमूमन सेना के तीनों प्रमुखों की बातचीत रक्षा मंत्री से हुआ करती है। इस बार सेना के कमांडरों की संयुक्त बैठक को प्रधानमंत्री द्वारा संबोधित करने और बाकी पेज 8 पर
सुरक्षा को लेकर चर्चा करने को विशेष परिघटना माना जा रहा है। इस बैठक में चौथे कमांडर का पद सृजित करने के बारे में रक्षा मंत्री खुलासा कर सकते हैं। पहले ‘चीफ आॅफ डिफेंस स्टॉफ’ का पद बनाने का सुझाव था। लेकिन अमेरिका की तर्ज पर यह पद बनाया जाना रक्षा मंत्री ने खारिज कर दिया। हाल में थल सेनाध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर जिस तरह से वरिष्ठता क्रम का विवाद उठा, उसके मद्देनजर सरकार फूंक-फूंककर कदम रख रही है। इसलिए चौथे कमांडर को तीनों प्रमुखों के समकक्ष रखने और उन्हें ‘चीफ्स आॅफ स्टॉफ’ कमेटी का स्थाई अध्यक्ष बनाने का सोचा जा रहा है।
इस योजना को लेकर जनरल बिपिन रावत की थल सेना के कमान प्रमुखों के साथ पहली बैठक में संकेत मिले। इस बैठक में उनसे वरिष्ठ अधिकारी रहे दक्षिणी कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल पीएम हरीज भी शामिल हुए। इस बैठक में 13 लाख जवानों वाली फौज की जरूरतों और आगामी योजनाओं को लेकर चर्चा की गई। भारतीय सेना की तीनों अंगों के कमांडरों की बैठक आयोजित करने की जिम्मेदारी थल सेना को दी गई है। देहरादून की मिलिट्री अकादमी में तीनों अंगों के कमांडर सुरक्षा जरूरतों और खुफिया सूचनाओं के तंत्र को लेकर प्रधानमंत्री के साथ चर्चा करेंगे।

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