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Madhya Pradesh : दोनों हाथों से दिव्यांग ममता पटेल ने पैरों से दी बीए की परीक्षा, घर से 18 किलोमीटर दूर था केंद्र

मध्य प्रदेश की रहने वाली ममता पटेल दोनों हाथों से दिव्यांग हैं। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने पैरों से कॉपियां लिखीं और इसके लिए 18 किमी दूर स्थित एग्जाम सेंटर भी पहुंचीं।

मध्य प्रदेश के छतरपुर की ममता पटेल। फोटो सोर्स : एएनआई

मध्य प्रदेश के छतरपुर की रहने वाली दिव्यांग ममता पटेल ने पैरों से यूनिवर्सिटी की परीक्षा देकर एक मिसाल कायम की है। वह 19 साल की हैं और उनके पिता किसान हैं। बचपन से दिव्यांग ममता को उसके हालत पर लोगों द्वारा ताने भी सुनने को मिलते थे। हालांकि, उन्हें खुशी है कि उन्होंने अपनी मेहनत के बदले यह मुकाम हासिल कर लिया है।

ममता को थी डिग्री पाने की चाहत : दोनों हाथों से लाचार ममता पटेल छतरपुर के महाराजा कॉलेज से बीए कर रही हैं। डिग्री पाने की चाहत रखने वाली ममता फर्स्ट ईयर की परीक्षा देने को अपनी सफलता मान रही हैं। हाथों से नहीं लिख पाने के कारण उन्होंने अपने पैरों का इस्तेमाल करना शुरू किया था।

18 किमी दूर जाकर दी परीक्षा : बता दें कि उन्हें बीए के पहले साल की परीक्षा देने के लिए अपने चाचा के घर तलवमपारा से लगभग 18 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती थी। ममता बताती हैं, ‘‘शुरू में मुझे अपनी दिव्यांगता के कारण लिखने में बहुत मुश्किल होती थी। ऐसे में मैंने पैरों से लिखने की आदत डाली। अब लोगों के स्नेह और अपनी आकांक्षा के कारण मैं अपनी शिक्षा जारी रख पा रही हूं।’’ बता दें कि ममता के हाथ बचपन से नहीं हैं। इसके चलते उन्हें रोज के कामों को करने में भी काफी दिक्कतों का सामना पड़ता है।

ममता की मदद के लिए आगे आए लोग : ममता को जीवन से कई उम्मीदें हैं। वह शिक्षा के माध्यम से अच्छी नौकरी पाना चाहती हैं, जिससे अपने माता-पिता की मदद कर सकें। उन्होंने कहा, ‘‘मैं शिक्षित होना चाहती हूं। मैं काम करना चाहती हूं, ताकि अपने माता-पिता को आर्थिक और मानसिक रूप से मदद दे सकूं। मैं अपनी दिव्यांगता के लिए भगवान को कभी दोष नहीं देती, क्योंकि मेरा मानना है कि कुछ बच्चे हैं, जो दोनों हाथों से भी ठीक से पढ़ाई नहीं कर रहे हैं और अपना भविष्य खराब कर रहे हैं।’’ बता दें कि ममता की मदद के लिए उनके इलाके के लोग हमेशा तत्पर रहते हैं। वहीं, महाराजा कॉलेज में वाणिज्य विभाग की प्रोफेसर सुमति प्रकाश जैन ने भी उनकी काफी मदद की और उन्हें आगे पढ़ने के लिए उत्साहित किया।

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