जम्मू-कश्मीर में नशे की समस्या कितनी गंभीर हो चुकी है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि लोग खुद अपने बच्चों को गिरफ्तार करने की मांग लेकर उपराज्यपाल के दफ्तर पहुंच रहे हैं। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बताया कि यह स्थिति समाज की गहरी चिंता और बेबसी को दिखाती है।
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि कई माता-पिता उनके कार्यालय में आए और बोले कि वे अपने बच्चों की नशे की लत से परेशान हैं और चाहते हैं कि सरकार उन्हें गिरफ्तार करे ताकि उनका भविष्य बच सके। इसी दर्दनाक स्थिति ने प्रशासन को नशे और “नार्को-टेरर” के खिलाफ सख्त अभियान शुरू करने के लिए मजबूर किया।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस साल अब तक जम्मू-कश्मीर में एनडीपीएस (Narcotic Drugs and Psychotropic Substances) एक्ट के तहत 1400 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें ड्रग पेडलर और तस्करी नेटवर्क से जुड़े लोग शामिल हैं। इनमें से 800 से ज्यादा गिरफ्तारी सिर्फ पिछले एक महीने में हुई हैं, जो अभियान की तेजी को दिखाती हैं।
एलजी ने कहा कि सरकार नशे की सप्लाई चेन को तोड़ने पर काम कर रही है। जो भी लोग ड्रग्स की तस्करी में शामिल हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है और उन्हें सजा दी जा रही है। इसके साथ ही जागरूकता और पुनर्वास पर भी ध्यान दिया जा रहा है, क्योंकि यही सबसे बड़ी चुनौती है।
सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि जम्मू-कश्मीर के हर अस्पताल में कम से कम एक बेड नशे के मरीजों के लिए सुरक्षित रखा जाए। इससे यह सुनिश्चित होगा कि किसी भी मरीज को इलाज के लिए भटकना न पड़े और तुरंत मदद मिल सके।
100-दिन के अभियान के दौरान एक और बड़ा बदलाव
इस 100-दिन के अभियान के दौरान एक और बड़ा बदलाव यह देखने को मिला है कि लोगों में अब नशे की शिकायत करने का डर कम हुआ है। मानस (MANAS) हेल्पलाइन पर कॉल्स में छह गुना बढ़ोतरी हुई है। लोग अब ड्रग बेचने वालों और नशा करने वालों की जानकारी प्रशासन को दे रहे हैं, जिससे समाज में सकारात्मक असर पड़ा है।
मनोज सिन्हा ने यह भी कहा कि नशे और आतंकवाद के बीच सीधा संबंध है। उनके अनुसार, ड्रग्स से कमाया गया पैसा अंततः आतंकी संगठनों तक पहुंचता है। उन्होंने बताया कि सरकार ने लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) के पास तंगधार, केरन, गुरेज और कठुआ जैसे इलाकों में सुरक्षा और मजबूत की है, क्योंकि ये ड्रग सप्लाई के मुख्य रास्ते माने जा रहे हैं।
इसके अलावा प्रशासन ने एक SOP (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) तैयार किया है, जिसके तहत ड्रग मामलों में आरोपियों के पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, हथियार लाइसेंस और आधार कार्ड को सस्पेंड या कैंसिल किया जा सकता है।
सरकार ने नशा तस्करी से जुड़ी संपत्तियों पर भी कार्रवाई शुरू की है। इस साल अब तक 41 संपत्तियों को ध्वस्त किया गया है। हालांकि इस कार्रवाई पर नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी जैसे दलों ने सवाल उठाए हैं और कहा है कि इससे निर्दोष परिवार प्रभावित हो सकते हैं।
लेकिन एलजी ने कहा कि अगर कोई संपत्ति ड्रग तस्करी से बनाई गई है तो उस पर कोई सहानुभूति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि अब तक की कार्रवाई में किसी निर्दोष को निशाना नहीं बनाया गया है और लोग भी इस सख्ती के समर्थन में हैं। जम्मू-कश्मीर प्रशासन का कहना है कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा ताकि युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाया जा सके और समाज को इस खतरे से मुक्त किया जा सके।
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जम्मू-कश्मीर भाजपा इकाई ने शुक्रवार को कश्मीर में शराब बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों श्रीनगर के गुपकार रोड स्थित मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के आवास तक मार्च किया। घाटी में लंबे समय से शराब पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग उठती रही है, लेकिन 2024 में नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार के सत्ता में आने के बाद पहली बार भाजपा ने भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
