पटना के सचिवालय क्षेत्र में ट्रैफिक जाम और प्रदूषण की समस्या से राहत दिलाने के लिए बिहार सरकार एक नई परिवहन व्यवस्था शुरू करने की तैयारी कर रही है। सरकार यहां ‘अल्ट्रा पॉड्स’ आधारित आधुनिक परिवहन नेटवर्क विकसित करने की योजना बना रही है, जिसे पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल और कार्बन पॉजिटिव प्रणाली बताया जा रहा है। इस परियोजना से राजधानी में मेट्रो के बाद सार्वजनिक परिवहन की एक नई सुविधा जुड़ने की उम्मीद है। सरकार का कहना है कि इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि अल्ट्रा पॉड्स के ट्रैक के निर्माण के दौरान किसी भी पेड़ को नहीं काटा जाएगा। यानी यह व्यवस्था हरित पर्यावरण को सुरक्षित रखते हुए तैयार की जाएगी।
इस संबंध में बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत (Pratyay Amrit) ने लार्सन एंड टर्बो (Larsen & Toubro) की टीम के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में कंपनी की ओर से पटना में ‘अल्ट्रा पॉड्स’ (UltraPODs by Ultra PRT) के संचालन को लेकर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया और पूरी परियोजना की रूपरेखा सामने रखी गई। बिहार सरकार के कैबिनेट सचिवालय विभाग ने भी इस योजना की जानकारी सोशल मीडिया मंच एक्स (@BiharCabinet) पर साझा की।
यह परियोजना पुराने सचिवालय परिसर को आसपास के प्रमुख प्रशासनिक भवनों से जोड़ने के लिए एक अंतर-सरकारी स्मार्ट और सस्टेनेबल मोबिलिटी समाधान के रूप में तैयार की जा रही है। प्रशासनिक मंजूरी मिलने के बाद इसे लगभग 15 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। पूरी योजना की लागत करीब 296 करोड़ रुपये आंकी गई है।
योजना के तहत पटना में अल्ट्रा पॉड परिवहन का लगभग 5 किलोमीटर लंबा ट्रैक बनाया जाएगा। इस ट्रैक पर कुल नौ स्टेशन होंगे। इनमें विश्वेश्वरैया भवन, विकास भवन, विधानसभा और पुराना सचिवालय जैसे प्रमुख प्रशासनिक केंद्र शामिल रहेंगे। इनमें से दो स्टेशनों पर पार्किंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
परियोजना के तहत ट्रैक पर कुल 59 अल्ट्रा पॉड्स चलाए जाएंगे। हर पॉड में एक समय में छह यात्री सफर कर सकेंगे। सरकार का कहना है कि इस सेवा का किराया भी काफी कम रखा जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें। यात्री टोकन या रिचार्ज किए गए कार्ड के माध्यम से अल्ट्रा पॉड्स का इस्तेमाल कर सकेंगे।
सरकार के अनुसार इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि अल्ट्रा पॉड्स के ट्रैक के निर्माण के दौरान किसी भी पेड़ को नहीं काटा जाएगा। यानी पूरी व्यवस्था पर्यावरण को सुरक्षित रखते हुए तैयार की जाएगी। इसके शुरू होने से सचिवालय क्षेत्र में मोटर चालित वाहनों की आवाजाही कम होगी, जिससे प्रदूषण और ट्रैफिक जाम दोनों में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है।
अधिकारियों का कहना है कि इस प्रणाली को खास तौर पर सुबह और शाम के दफ्तर के व्यस्त समय को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। इन समयों में सचिवालय और आसपास के इलाकों में भारी भीड़ और जाम की समस्या रहती है। अल्ट्रा पॉड्स के संचालन से कर्मचारियों और आम लोगों को इस भीड़ से राहत मिलेगी और प्रशासनिक भवनों के बीच आवाजाही अधिक तेज और आसान हो जाएगी।
बिहार सरकार का कहना है कि यह पहल केंद्र सरकार के स्मार्ट, सस्टेनेबल और इंटीग्रेटेड मोबिलिटी के व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप है। सरकार को उम्मीद है कि इस व्यवस्था से न केवल परिवहन अधिक व्यवस्थित होगा, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत होगी और प्रशासनिक कामकाज की दक्षता में भी सुधार आएगा।
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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार रविवार को जनता दल (यूनाइटेड) में शामिल हो गए। जेडीयू नेताओं और कार्यकर्ताओं के एक बड़े वर्ग के बीच इस बात की चर्चा है कि वह नीतीश के उत्तराधिकारी और अपने पिता की राजनीतिक विरासत के वारिस होंगे। वहीं, नीतीश कुमार के राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने के बाद से ही चर्चा शुरू हो गयी थी कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। इस सबके बीच एनडीए के भीतर से ही नई राजनीतिक मांग सामने आई है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
