patients gets positive for swine flu in Rajasthan - Jansatta
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राजस्थान में स्वाइन फ्लू का जोर

राजस्थान में स्वाइन फ्लू का प्रकोप बढ़ गया है। जयपुर में इसका सबसे ज्यादा मरीज सामने आ रहे हैं।

Author जयपुर | December 22, 2017 12:43 AM
सांते (फाइल फोटो)

राजस्थान में स्वाइन फ्लू का प्रकोप बढ़ गया है। जयपुर में इसका सबसे ज्यादा मरीज सामने आ रहे हैं। अधिकारियों के प्रशिक्षण केंद्र ओटीएस में प्रशिक्षु आरएएस अफसरों के स्वाइन फ्लू की जकड़ में आने के बाद गुरुवार को मेडिकल कालेज के छात्रावास के छात्रों में भी इसके लक्षण पाए जाने से चिंता बढ़ गई है। दूसरी तरफ सरकारी सेवारत डाक्टरों की हड़ताल से भी राज्य में चिकित्सा सेवाएं गड़बड़ा गई है। राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों के प्रशिक्षण केंद्र ओटीएस में आधा दर्जन प्रशिक्षु अफसरों के स्वाइन फ्लू की पुष्टि के बाद हॉस्टल को खाली करा लिया गया है। सरकार ने गुरुवार को यहां अफसरों के प्रशिक्षण को भी रोक दिया। ओटीएस के छात्रवास में रहने वाले प्रशिक्षु अफसरों के स्वाइन फ्लू की जकड़ में आने के बाद गुरुवार को सवाई मानसिंह मेडिकल कालेज के छात्रावास के तीन छात्रों में भी स्वाइन फ्लू की पुष्टि से हड़कंप मच गया।

मेडिकल कालेज के घबराए छात्रों ने अब हॉस्टल खाली करना शुरू कर दिया है। मेडिकल कालेज के प्राचार्य यूएस अग्रवाल का कहना है कि स्वाइन फ्लू के मामले की जांच करवाई जा रही है। पीड़ित तीन छात्रों में से दो के घर जाने और एक को अस्पताल में भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। हॉस्टल में रहने वाले सभी छात्रों को जरा सा भी बीमार होने पर तुरंत दवाएं लेने और डाक्टरों से संपर्क करने के निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं। राज्य में इस बार दिसंबर के मध्य में ही स्वाइन फ्लू के मरीज अस्पतालों में आने लगे थे।

सरकार अब स्वाइन फ्लू पुष्टि वाले मरीजों के आंकडेÞ जुटाने में लग गई हैं। चिकित्सा विभाग का कहना है कि सबसे ज्यादा मरीज पिछले तीन दिनों में जयपुर में आए हैं। जयपुर में पिछले दिनों हुई बारिश के बाद से मौसम में नमी के कारण स्वाइन फ्लू का खतरा पनप गया है। एसएमएस अस्पताल में आइसीयू में अतिरिक्त बेड लगाए गए हैं। इसमें गंभीर मरीजों को भर्ती कर उनका फौरन उपचार करने की व्यवस्था की गई है। दूसरी तरफ प्रदेश में सरकारी सेवारत डाक्टरों की हडताल के कारण चिकित्सा व्यवस्था लड़खड़ा गई है। डाक्टरों और सरकार के अडेÞ रहने से प्रदेश के जिला और निचले स्तर के सरकारी अस्पतालों के हाल बेहाल हो गए हैं। डाक्टरों का आरोप है कि सरकार उनकी मांगों को मानने के बजाय दमन पर उतर आई है।

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