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Patidars in Gujarat Assembly Elections 2022: पैसा, पॉवर, वोट…सबमें पाटीदार दमदार, जानिए कैसे लुभा रहीं बीजेपी, कांग्रेस और आप

Gujarat Elections: सौराष्ट्र-कच्छ क्षेत्र में पाटीदार मतदाताओं के लिए स्थिति बेहद कठिन होने वाली है क्योंकि यहां बीजेपी, कांग्रेस और आप तीनों ने ही अपने पाटीदार उम्मीदवारों को उतारा है।

Patidars in Gujarat Assembly Elections 2022: पैसा, पॉवर, वोट…सबमें पाटीदार दमदार, जानिए कैसे लुभा रहीं बीजेपी, कांग्रेस और आप
गुजरात विधानसभा चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार हार्दिक पटेल और आप उम्मीदवर गोपाल इटालिया (एक्सप्रेस फोटो)

Patidar Community Votes: गुजरात विधानसभा चुनावों (Gujarat Assembly Elections) में पाटीदार समुदाय (Patidar Community) की भूमिका हमेशा से काफी महत्वूपर्ण रही है। अगर 2017 के चुनाव के नतीजे तय करने में पाटीदारों ने अहम भूमिका निभाई, तो इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव के नतीजे भी अलग नहीं हो सकते हैं। शायद इसी वजह से बीजेपी (BJP), कांग्रेस (Congress) और आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी कई पाटीदार उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है।

अगर वर्तमान की बात करें तो विधानसभा में कुल 182 विधायकों में 44 पाटीदार विधायक हैं, जबकि पिछले चुनाव को देखें तो 48 पाटीदार उम्मीदवार विधानसभा पहुंचे थे। इन आंकड़ों से पता चलता है कि गुजरात की कुल जनसंख्या में पाटीदार समुदाय का जितना अनुपात है, उससे ज्यादा अनुपात में पाटीदार उम्मीदवार विधायक बने थे।

आगामी गुजरात विधानसभा चुनावों में भाजपा की तरफ से उतारे गए 181 उम्मीदवारों में से 44 पाटीदार समुदाय से हैं। सौराष्ट्र-कच्छ क्षेत्र में पाटीदार मतदाताओं के लिए स्थिति बेहद कठिन होने वाली है क्योंकि यहां बीजेपी, कांग्रेस और आप तीनों ने ही अपने पाटीदार उम्मीदवारों को उतारा है। यहां की 54 सीटों पर आप ने 19, बीजेपी ने 18 और कांग्रेस ने 16 पाटीदार उम्मीदवार उतारे हैं। इन सीटों पर 1 दिसंबर को वोटिंग होनी है।

पिछले चुनावों का जिक्र करते हुए कांग्रेस नेता परेश धनानी ने बताया कि 106 विधानसभा सीटों पर पाटीदारों का प्रभाव है, जिनमें से 48 पर समुदाय का वर्चस्व है। उनका दावा है कि इनमें से 33 में आम तौर पर दो प्रमुख पाटीदार उम्मीदवारों के बीच मुकाबला होता है, जिस कारण पाटीदारों का वोट बंट जाता है और नतीजे अन्य समुदायों के वोटों पर निर्भर हो जाते हैं। हालांकि, 58 अन्य सीटों पर पाटीदार वोट निर्णायक की भूमिका निभाते हैं, वहां भले ही अन्य समुदायों के पास बड़ा हिस्सा है।

वहीं, आर्थिक रूप से मजबूत होने के कारण भी समुदाय की भूमिका गुजरात के चुनाव में महत्वपूर्ण मानी जाती है। कदवा पटेलों के सबसे बड़े संगठनों में से एक उमियाधाम, सिदसर के ट्रस्टी जेरम वंसजालिया ने कहा कि पाटीदारों का प्रभाव आश्चर्यजनक नहीं है क्योंकि वे व्यापार और उद्योग में प्रभावी हैं। ऐसे में समुदाय बड़े पैमाने पर रोजगार प्रदना करता है। उन्होंने कहा कि पार्टियां अपने टिकट का 25% पाटीदारों को दे सकती हैं और वे विधानसभा की कुल सीटों में से 30% सीटें जीत सकते हैं।

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First published on: 18-11-2022 at 09:10:58 am
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