Bankipur Bypolls: बिहार के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव का सियासी पारा अचानक सातवें आसमान पर पहुंच गया है। बीजेपी ने शुक्रवार को एक बेहद चौंकाने वाले फैसले के तहत अपने घोषित उम्मीदवार अभिषेक बंटी का टिकट काटकर नीरज कुमार सिन्हा को मैदान में उतार दिया। इस पर अब लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने प्रतिक्रिया दी है।
रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, “बांकीपुर में तो बीजेपी की गियर ही फंस गई। चुनाव की तारीख का एलान महीने से ज्यादा पहले हो गया था , लेकिन बीजेपी के दिल्ली से लेकर पटना तक के तथाकथित चाणक्यों के बीच अपना उम्मीदवार ढूंढने का कन्फ्यूजन खत्म नहीं हुआ, नामांकन खत्म होने के तीन दिन पहले तक जो पार्टी अपना दूल्हा तय नहीं कर पा रही, वो क्षेत्र का भविष्य क्या खाक तय करेगी।”
आखिरी वक्त पर पैर क्यों कांपने लगे बीजेपी के- रोहिणी आचार्य
लालू प्रसाद यादव की बेटी ने आगे लिखा, “दो दिन पहले तक बीजेपी के लोग अपने जिस पूर्व घोषित प्रत्याशी की खूबियां गिनाते नहीं थक रहे थे , कल अचानक उस प्रत्याशी को ही बदल दिया , कहीं ऐसा तो नहीं कि ऐसा हार की आशंका से डर कर किया? आखिरी वक्त पर पैर क्यों कांपने लगे बीजेपी के।”
बांकीपुर में जमीन खिसकने वाली है- रोहिणी आचार्य
रोहिणी आचार्य ने लिखा, “अंतिम वक्त पर प्रत्याशी बदलना साफ तौर पर ये दर्शाता है कि बीजेपी को ये आभास हो गया है कि बांकीपुर में जमीन खिसकने वाली है, अंतिम वक्त का बदलाव’ रणनीति नहीं, बल्कि चुनावी डर का सबसे बड़ा सबूत है।”
भाजपा ने बांकीपुर से अपना उम्मीदवार क्यों बदला?
पटना में अपने फैसले की घोषणा करते हुए अभिषेक कुमार सिन्हा ने अपने नाम वापस लेने का कारण व्यक्तिगत परिस्थितियों को बताया। उन्होंने कहा, “भारतीय जनता पार्टी ने मुझे एनडीए उम्मीदवार के रूप में चुना था। मैं विनम्रतापूर्वक आपको सूचित करना चाहता हूं कि पारिवारिक कारणों से मैं विधानसभा उपचुनाव नहीं लड़ पा रहा हूं। मैं पार्टी कार्यकर्ता के रूप में निष्ठापूर्वक अपनी सेवा जारी रखूंगा।” बाद में बीजेपी की केंद्रीय चुनाव समिति ने नीरज कुमार सिन्हा को उम्मीदवार के रूप में नामित किया।
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प्रशांत किशोर ने मीडिया से बातचीत में कहा, “इससे यह साबित होता है कि कोई भी विधानसभा या लोकसभा क्षेत्र किसी का गढ़ या निजी जागीर नहीं है। अगर जनता उठ खड़ी हो जाए, तो बड़े से बड़े नेता भी पसीना बहाने पर मजबूर हो सकते हैं। बांकीपुर निर्वाचन क्षेत्र की बात करें, जहां हाल तक भाजपा सदस्य यह दावा करते थे कि उनका किला इतना मजबूत है कि अगर वे कुत्ते या बिल्ली को भी मैदान में उतार दें, तो जनता उन्हें ही वोट देगी, तो स्थिति बदल गई है। अब जब जनता के पास एक विकल्प है, तो भाजपा उम्मीदवार खोजने के लिए संघर्ष कर रही है।” यहां क्लिक कर पढे़ं पूरी खबर…
