महाराष्ट्र की उप मुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के भीतर इन दिनों राज्यसभा सांसद पार्थ पवार के रूख को लेकर बेचैनी बढ़ रही है। पार्थ पवार ने शनिवार देर रात को मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस से उनके सरकारी निवास पर बंद कमरे में बैठक की है। इसके बाद तमाम तरह की अटकलें तेज हो गई हैं।
बीजेपी के सूत्रों के मुताबिक, यह बैठक हाल ही में एनसीपी के संगठन में हुए फेरबदल के बाद पैदा हुए असंतोष के बीच हुई है। एनसीपी के भीतर कई नेता पार्थ पवार के मनमानी वाले रवैये और पार्टी के कामकाज में उनके बढ़ते दखल को लेकर नाखुश हैं।
महाराष्ट्र की बीजेपी सरकार के एक मंत्री ने बताया कि इस बैठक के जरिए बीजेपी नेतृत्व एक राजनीतिक संदेश भी दे सकता है। उन्होंने कहा कि एनसीपी के पुनर्गठन के बाद पार्थ पवार के रवैये से प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे जैसे वरिष्ठ नेता नाराज हैं। मुख्यमंत्री ने इस मुलाकात के जरिए सावधानी और संयम बरतने का संकेत देने की कोशिश की है।
अलग पड़ रहे पार्थ पवार?
बीजेपी के एक अन्य पदाधिकारी ने कहा कि वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार करने की कोशिशों के बाद पार्टी के भीतर ही विरोध शुरू हो गया है और इस वजह से पार्थ पवार राजनीतिक रूप से अलग-थलग पड़ गए हैं। उन्होंने कहा, “राजनीतिक गलियारों में यह धारणा बन रही है कि इन घटनाक्रमों से संगठन और सरकार दोनों में सुनेत्रा पवार की पकड़ कमजोर हो रही है।”
बीजेपी के कुछ नेताओं ने कहा कि हम दूसरी पार्टियों के कामकाज में दखल नहीं देते जबकि सीएम फड़नवीस के एक करीबी सहयोगी ने कहा कि मुख्यमंत्री की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि सुनेत्रा पवार को सरकारी कामकाज करने में किसी तरह की मुश्किल न आए।
इस बीच, रविवार को राजनीतिक हलचल तब और तेज हो गई जब पूर्व सांसद आनंद परांजपे की मुलाकात शरद पवार से हुई। परांजपे ने हाल ही में एनसीपी छोड़ दी थी और बाद में वह शिवसेना में शामिल हो गए थे है।
क्या साथ आएंगे एनसीपी के दोनों गुट?
बीजेपी के रणनीतिकार ऐसा मानते हैं कि एनसीपी और एनसीपी (शरद पवार) का अलग-अलग रहना उसे राजनीतिक रूप से फायदा पहुंचाने वाला है हालांकि पार्टी के अंदर ऐसा भी माना जाता है कि 2029 के विधानसभा चुनाव से पहले पवार परिवार के दोनों गुट फिर से एक साथ आ सकते हैं।
एनसीपी (शरद पवार) के विधायक रोहित पवार ने सुमित्रा पवार की एनसीपी के बड़े नेताओं पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे एनसीपी में टूट होने से पहले भी शरद पवार के प्रति वफादार नहीं थे।
TCS नासिक मामले के बाद हरकत में फड़नवीस सरकार
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