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संसद सत्र समाप्त, हंगामे के बीच कई बिल मंजूर

संसद का शीतकालीन सत्र बुधवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया। इस दौरान विभिन्न मुद्दों पर विपक्ष के हंगामे के कारण दोनों सदनों विशेषकर राज्यसभा में कार्यवाही के बार-बार ठप होने के बीच कई महत्त्वपूर्ण विधेयक पास हुए..
Author नई दिल्ली | December 24, 2015 01:01 am
भारतीय संसद

संसद का शीतकालीन सत्र बुधवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया। इस दौरान विभिन्न मुद्दों पर विपक्ष के हंगामे के कारण दोनों सदनों विशेषकर राज्यसभा में कार्यवाही के बार-बार ठप होने के बीच कई महत्त्वपूर्ण विधेयक पास हुए, लेकिन आर्थिक सुधारों के लिए अहम माना जाने वाला वस्तु एवं उत्पाद कर विधेयक (जीएसटी) पास नहीं हो पाया। हंगामे पर अप्रसन्नता जताते हुए उच्च सदन के सभापति हामिद अंसारी ने सांसदों को आत्ममंथन करने व उन रवैयों और चलन से बचने को कहा जिससे राज्यसभा की गरिमा कम होती हो। बीते 26 नवंबर से शुरू हुए संसद के शीतकालीन सत्र के शुरू में डा. बीआर आंबेडकर की 125वीं जयंती पर भारतीय संविधान के प्रति प्रतिबद्धता जताने के लिए लोकसभा में दो दिनों और राज्यसभा में तीन दिनों तक चर्चा हुई। इसके बाद दोनों सदनों ने भारतीय संविधान के आदर्शों और सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता जताते हुए सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पास किया।

हंगामे के कारण लोकसभा में आठ घंटे से ज्यादा का समय बर्बाद हुआ। वहीं राज्यसभा में 47 घंटे का कामकाज बाधित हुआ और कांग्रेस ने लगभग आए दिन कोई न कोई मुद्दा उठा कर कार्यवाही को बाधित किया। लोकसभा में 13 विधेयक पास हुए वहीं राज्यसभा में नौ विधेयक पास हुए, लेकिन कांग्रेस के विरोध के कारण देश के कर ढांचे में महत्त्वपूर्ण बदलावों के प्रावधान वाला जीएसटी विधेयक पास नहीं हो सका।

लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने सत्र के समापन पर कहा कि सत्र में व्यवधानों और बाध्य स्थगनों के कारण आठ घंटे 37 मिनट का समय नष्ट हुआ। हालांकि सभा नष्ट हुए समय की क्षतिपूर्ति के लिए 17 घंटे दस मिनट देर तक बैठी। राज्यसभा में सभापति अंसारी ने सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने से पहले अपने पारंपरिक संबोधन में कहा कि सदन के कामकाज में बाधा, भले ही हाल में शुरू नहीं हुई है किंतु इसे सदन के विभिन्न वर्ग द्वारा अलग-अलग समय पर उस क्षण की रणनीति के अनुरूप विस्तृत तर्कों से जायज ठहराया जाता है। मगर इसके परिणाम स्वरूप समय की बर्बादी और सूचीबद्ध कामकाज की अनदेखी होती है।

उन्होंने याद दिलाया कि सदस्यों ने एक दिसंबर को संविधान के सिद्धांतों एवं आदर्शों के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराया था। अंसारी ने कहा कि काम करने वाली विधायिका इन सिद्धांतों की अनुगामी होती है और अवरोध इनको नकारने के समान है। इस सत्र के रिकार्ड इस प्रतिबद्धता को काफी हद तक नकारते हैं। उन्होंने सदस्यों से इस स्थिति पर आत्ममंथन करने की अपील की।

सत्र के दौरान दोनों सदनों में नेशनल हेरल्ड मुद्दे, कुमारी शैलजा से गुजरात के एक मंदिर में उनकी जाति पूछे जाने, केंदीय मंत्री वीके सिंह के बयान, संघ प्रमुख मोहन भागवत के राम मंदिर संबंधित बयान, अरुणाचल प्रदेश के घटनाक्रम, पंजाब में दलितों पर अत्याचार, डीडीसीए में कथित भ्रष्टाचार को लेकर वित्त मंत्री अरुण जेटली के इस्तीफे की मांग सहित विभिन्न मुद्दों को लेकर विपक्ष ने भारी हंगामा करते हुए कामकाज को बाधित किया।

शीतकालीन सत्र के दौरान हुई 20 बैठकों में संगीन अपराधों के मामलों में किशोर अपराधियों की आयु 18 से घटा कर 16 करने संबंधी किशोर न्याय (बालकों की देखभाल एवं संरक्षण) विधेयक, अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) विधेयक, परमाणु ऊर्जा (संशोधन) विधेयक, मध्यस्थता एवं सुलह (संशोधन) विधेयक, वाणिज्यिक न्यायालय, उच्च न्यायालय वाणिज्यिक प्रभाग और वाणिज्यिक अपील प्रभाग विधेयक, बोनस संदाय संशोधन विधेयक, 2015 सहित कई महत्वपूर्ण विधेयकों को संसद की मंजूरी मिली।

सत्र के दौरान 2015-16 के लिए अनुदान की अनुपूरक मांगें और 2012-13 के लिए अतिरिक्त अनुदान की मांगों को भी संसद की मंजूरी दी गई। इस दौरान जहां भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) विधेयक को राज्यसभा की प्रवर समिति में भेजा गया वहीं दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता 2015 को दोनों सदनों की संयुक्त समिति के पास भेजा गया। राज्यसभा में सत्र की पहली बैठक वर्तमान सदस्य खेखिहो झिमोमी के निधन के कारण उनके सम्मान में पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई थी।

समय हुआ बर्बाद

* हंगामे के कारण लोकसभा में आठ घंटे से ज्यादा का समय बर्बाद हुआ। वहीं राज्यसभा में 47 घंटे का कामकाज बाधित हुआ और कांग्रेस ने लगभग आए दिन कोई न कोई मुद्दा उठा कर कार्यवाही को बाधित किया। लोकसभा में 13 विधेयक पास हुए वहीं राज्यसभा में नौ विधेयक पास हुए।

* हंगामे पर अप्रसन्नता जताते हुए उच्च सदन के सभापति हामिद अंसारी ने सांसदों को आत्ममंथन करने व उन रवैयों और चलन से बचने को कहा जिससे राज्यसभा की गरिमा कम होती हो।

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