Parliament passes bill to provide death to child rape convicts-12 साल से कम बच्चियों से दुष्कर्म में मृत्युदंड तक के प्रावधान वाले विधेयक को संसद की मंजूरी - Jansatta
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12 साल से कम बच्चियों से दुष्कर्म में मृत्युदंड तक के प्रावधान वाले विधेयक को संसद की मंजूरी

देश में 12 साल से कम आयु की बच्चियों से बलात्कार के अपराध में मृत्युदंड तक की सजा देने तथा 16 साल से कम आयु की किशोरियों से दुष्कर्म के अपराध में दोषियों को कठोर सजा के प्रावधान वाले एक विधेयक को आज संसद की मंजूरी मिल गयी।

Author August 7, 2018 1:33 PM
देश में 12 साल से कम आयु की बच्चियों से बलात्कार के अपराध में मृत्युदंड तक की सजा देने तथा 16 साल से कम आयु की किशोरियों से दुष्कर्म के अपराध में दोषियों को कठोर सजा के प्रावधान वाले एक विधेयक को आज संसद की मंजूरी मिल गयी।

देश में 12 साल से कम आयु की बच्चियों से बलात्कार के अपराध में मृत्युदंड तक की सजा देने तथा 16 साल से कम आयु की किशोरियों से दुष्कर्म के अपराध में दोषियों को कठोर सजा के प्रावधान वाले एक विधेयक को आज संसद की मंजूरी मिल गयी। राज्यसभा ने आज इन प्रावधानों वाले दंड विधि संशोधन विधेयक 2018 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी है। इस विधेयक के जरिये भारतीय दंड संहिता, भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1972, दंड प्रक्रिया संहिता 1973 और लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 के संशोधन का प्रावधान है।यह विधेयक कानून बनने पर इस संबंध में 21 अप्रैल को लागू दंड विधि संशोधन अध्यादेश 2018 की जगह लेगा।

विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि पिछले कुछ समय में बलात्कार की अनेक घटनाएं सामने आई हैं जिसने देश के मानस को झकझोर दिया है। ऐसे में इस प्रकार के जघन्य अपराध के खिलाफ कठोर प्रावधानों वाला यह विधेयक लाया गया है। इसमें 12 वर्ष से कम आयु की बालिकाओं के खिलाफ ऐसे अपराध और 16 वर्ष से कम आयु की बालिकाओं के खिलाफ ऐसे अपराध के सिलसिले में कड़े दंड का प्रावधान किया गया है। मंत्री ने कहा कि अध्यादेश लाना इसलिए जरूरी समझा गया क्योंकि जब देशभर में छोटी बच्चियों के साथ जघन्य दुष्कर्म की वारदातें सामने आ रही थीं तो सरकार चुप नहीं रह सकती थी। उस समय संसद सत्र भी नहीं चल रहा था इसलिए अध्यादेश लाया गया।

रिजिजू ने कहा कि हमारी सरकार इस विधेयक के सख्त प्रावधानों को लागू करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेगी। सरकार की प्राथमिकता होगी कि हर मामले में न्याय हो।
उन्होंने बताया कि विधेयक में 12 वर्ष से कम उम्र की बालिकाओं के साथ बलात्कार के अपराध के लिये दंड को सात वर्ष के न्यूनतम कारावास से बढ़ाकर 10 वर्ष करने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि इसके दोषियों को मृत्युदंड तक की सजा दी जा सकेगी।

सोलह वर्ष से कम आयु की किशोरी से बलात्कार के अपराध में सजा 20 वर्ष से कम नहीं होगी और इसे बढ़ाकर आजीवन कारावास किया जा सकेगा । इसका अभिप्राय उस व्यक्ति के शेष जीवनकाल के लिये कारावास से होगा और जुर्माना भी देना होगा । सोलह वर्ष से कम आयु की किशोरी से सामूहिक बलात्कार के अपराध के लिये दंड आजीवन कारावास होगा जिसका अभिप्राय उस व्यक्ति के शेष जीवनकाल के लिये कारावास होगा और जुर्माना देना होगा ।

बारह वर्ष से कम आयु की लड़की से सामूहिक बलात्कार के अपराध के लिये दंड आजीवन कारावास होगा जिसका अभिप्राय उस व्यक्ति के शेष जीवनकाल के लिये कारावास होगा और जुर्माना देना होगा अथवा मृत्यु दंड होगा । इसमें कहा गया है कि बलात्कार के सभी मामलों के संबंध में जांच थाने में जानकारी देने से दो माह की अवधि में पूरी की जाएगी। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की जांच अधिकारी भी महिला होगी। उन्होंने कहा कि जहां भी संभव हो सकेगा, ऐसे मामलों की सुनवाई महिला न्यायाधीश द्वारा ही की जाएगी।

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