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मर रही थी बच्ची, डॉक्टर ने कहा- 1 करोड़ रुपए का वेंटिलेटर लेकर आओ! वीडियो हुआ वायरल

मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में रविवार को एक बच्ची की हालत काफी गंभीर थी। परिजनों ने उसे बचाने की गुहार लगाई तो महिला डॉक्टर ने एक करोड़ रुपए के वेंटिलेटर का इंतजाम करने के लिए कह दिया।

Author February 12, 2019 10:02 AM
प्रतीकात्मक फोटो, फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

डॉक्टर को भगवान का दूसरा रूप कहा जाता है, लेकिन मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में रविवार को एक महिला डॉक्टर का ऐसा चेहरा सामने आया, जिसने मानवता को झकझोर दिया। बताया जा रहा है कि अस्पताल में भर्ती एक बच्ची की हालत काफी गंभीर थी। परिजनों ने उसे बचाने की गुहार लगाई तो महिला डॉक्टर ने एक करोड़ रुपए के वेंटिलेटर का इंतजाम करने के लिए कह दिया। इस घटना का वीडियो वायरल हुआ तो आरोपी डॉक्टर को सस्पेंड कर दिया गया। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि महिला डॉक्टर के खिलाफ यह कार्रवाई बच्ची के परिजनों से गलत व्यवहार करने और इलाज में लापरवाही बरतने के आरोप में की गई है।

गर्म पानी से जल गई थी बच्ची : भोपाल से करीब 186 किलोमीटर दूर रहने वाली एक साल की अंशिका अहिरवार कुछ दिन पहले गर्म पानी से 70 प्रतिशत तक जल गई थी। उसकी हालत काफी गंभीर होने के चलते उसे बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था।

महिला डॉक्टर ने कही यह बात : बच्ची के चाचा ब्रिजेंद्र कुमार अहिरवार ने बताया, ‘‘डॉक्टर बच्ची का इलाज नहीं कर रहे थे। वे बच्ची को प्राइवेट अस्पताल में ले जाने के लिए कह रहे थे। महिला डॉक्टर ज्योति राउत हमारे पास आईं और उन्होंने बताया कि बच्ची को वेंटिलेटर की जरूरत है और अस्पताल का वेंटिलेटर खराब पड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि अस्पताल में वेंटिलेटर नहीं है। अगर बच्ची का इलाज कराना है तो वेंटिलेटर का इंतजाम करो, जिसकी कीमत करीब एक करोड़ रुपए है। डॉक्टरों और अस्पताल की लापरवाही के चलते बच्ची की मौत हो गई। इसके बाद हमने अस्पताल प्रशासन से मामले की शिकायत की।’’

कर्मचारियों के खिलाफ दर्ज कराई शिकायत : अहिरवार ने बताया, ‘‘डॉक्टर ने यह भी कहा कि अस्पताल में वेंटिलेटर ही नहीं है। अस्पताल के जिस सेक्शन में वह है, वहां मैनुअली काम किया जा रहा है। इसके बाद बच्ची की मौत हो गई तो अस्पताल के स्टाफ के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई।’’ जिला यूथ कांग्रेस के जिलाध्यक्ष अशरफ खान ने रविवार को मेडिकल कॉलेज के डीन से मुलाकात की और अस्पताल के उन कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, जो बच्ची की मौत के लिए जिम्मेदार थे।

डॉक्टर ने कहा- गलत हैं आरोप : डॉ. ज्योति राउत का कहना है, ‘‘वीडियो क्लिप को एडिट किया गया है। उसमें पूरी बातचीत नहीं दिखाई गई है। मुझे बच्ची के परिजनों ने घेर लिया था और वे मुझ पर अनावश्यक दबाव बना रहे थे। साथ ही, इलाज के लिए दूसरे डॉक्टरों को बुलाने की मांग कर रहे थे। अस्पताल में किसी तरह की सिक्योरिटी भी नहीं थी। मैं पहले से ही बच्ची का इलाज कर रही थी और मैंने उसे बचाने के लिए अपनी पूरी कोशिश की।’’

जांच के लिए बनाई गई कमेटी : मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. जीएस पटेल ने बताया, ‘‘पूरे मेडिकल कॉलेज में 17 वेंटिलेटर हैं, लेकिन बर्न वॉर्ड में कोई वेंटिलेटर नहीं है। डॉक्टर का व्यवहार गलत था, जिसके चलते उसे सस्पेंड कर दिया गया।’’ सागर के डिविजनल कमिश्नर मनोहर दुबे का कहना है कि इस मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। एडिशनल कमिश्नर वीएस रावत और 5 डॉक्टरों की एक कमेटी बनाई गई है, जो 2 दिन में अपनी रिपोर्ट देगी।

 

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