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Lakhimpur Case: परिजनों की मांग पर भड़के एसपी, बोले- जो करना कर लो नहीं मिलेगी बॉडी, बाद में पहुंचा शव तो परिवार ने किया अंतिम संस्कार से इनकार

Lakhimpur Kheri Case: परिजन पहले अंतिम संस्कार नहीं करने पर अड़े थे। बाद में जब उन्हें जल्द अदालती कार्यवाही पूरी करने का आश्वासन दिया गया तब वे अंतिम संस्कार के लिए राजी हुए।

Lakhimpur Case: परिजनों की मांग पर भड़के एसपी, बोले- जो करना कर लो नहीं मिलेगी बॉडी, बाद में पहुंचा शव तो परिवार ने किया अंतिम संस्कार से इनकार
Lakhimpur Case: पीड़ित परिवार पर भड़के पुलिस अधिक्षक संजीव सुमन (Photo- PTI )

Lakhimpur Kheri Case: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में दो सगी बहनों के साथ हुई दरिंदगी से जुड़ा एक वीडियो सामने आया है. इसमें एसपी पीड़ित परिवार से उलझते दिख रहे हैं। जिले के निघासन क्षेत्र एक गांव में बुधवार (14 सितंबर) शाम एक खेत में दो सगी बहनों के शव पेड़ पर फंदे से लटकते मिले। इस घटना के विरोध में स्थानीय लोगों ने निघासन चौराहे पर प्रदर्शन किया और रास्ता जाम कर दिया। पीड़ित के परिजन शव की मांग कर रहे थे। लेकिन एसपी संजीव ने कहा, “धरना देना है, आग लगाना है जो करना कर लीजिए, यहां शव नहीं आएगा।”

परिजन पहले अंतिम संस्कार नहीं करने पर अड़े थे। बाद में जब उन्हें जल्द अदालती कार्यवाही पूरी करने का आश्वासन दिया गया तब वे अंतिम संस्कार के लिए राजी हुए। प्रशासन की तरफ से परिजनों को आर्थिक मदद का आश्वासन दिया गया जिसके बाद परिजन मृतकों के अंतिम संस्कार के लिए तैयार हो गए।

दूसरी तरफ, इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांंसद संजय सिंह ने राज्य सरकार पर निशाना साधा। संजय सिंह ने कहा, “लगता ही नहीं कि हम अपने देश की किसी घटना के बारे में सुन रहे हैं। जो लोग बेटी बचाओ का नारा देते हैं, ये घटना उसकी पोल खोलती है।” उन्होंने कहा, “जिस तरह से एसपी पीड़ित परिवार से बात कर रहा है, उससे लगता ही नहीं कि उसके अंदर कोई संवेदना है। समय रहते इनको सूचना दी गई थी फिर क्यों कार्रवाई नहीं की?”

मामले में सियासत ने पकड़ा जोर

मुख्य विपक्षी पार्टी सपा ने इस मुद्दे को लेकर सूबे की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। समाजवादी पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस घटना की तुलना हाथरस कांड से करते हुए ट्वीट किया, “निघासन पुलिस थाना क्षेत्र में 2 दलित बहनों को अगवा करने के बाद उनकी हत्या और उसके बाद पुलिस पर पिता का ये आरोप बेहद गंभीर है कि बिना पंचनामा और सहमति के उनका पोस्टमार्टम किया गया। लखीमपुर में किसानों के बाद अब दलितों की हत्या हाथरस की बेटी हत्याकांड की जघन्य पुनरावृत्ति है।”

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