Punjab Politics: अमृतपाल सिंह के प्रमुख सहयोगी और मीडिया सलाहकार पप्पलप्रीत सिंह को ‘अकाली दल (वारिस पंजाब दे)’ ने मजीठा विधानसभा क्षेत्र से अपना उम्मीदवार घोषित किया है। इससे पहले संगठन ने 1984 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के मामले में फांसी दिए गए केहर सिंह के बेटे सतवंत सिंह को बस्सी पठाना सीट से अपना प्रत्याशी बनाया था।
पप्पलप्रीत वर्तमान में तरनतारन की गोइंदवाल साहिब जेल में बंद हैं। राज्य सरकार द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत उनकी हिरासत न बढ़ाने के फैसले के बाद उन्हें असम की डिब्रूगढ़ जेल से पंजाब वापस लाया गया था। वह 2023 के अजनाला पुलिस स्टेशन हमले और कई अन्य मामलों में मुकदमे का सामना कर रहे हैं।
अमृतपाल के माता-पिता ने की घोषणा
अकाली दल (WPD) के प्रमुख और अमृतपाल के पिता तरसेम सिंह ने अपनी पत्नी बलविंदर कौर के साथ अमृतसर स्थित पप्पलप्रीत के घर जाकर उनके नामांकन का औपचारिक ऐलान किया।
घोषणा के समय तरसेम सिंह ने कहा, “हम पप्पलप्रीत सिंह को मजीठा विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतार रहे हैं, जिन्होंने पंजाब के मुद्दों और पंथ की रक्षा के लिए हमेशा आवाज उठाई है।”
मजीठिया परिवार का गढ़
मजीठा विधानसभा सीट को शिरोमणि अकाली दल (SAD) का मजबूत गढ़ माना जाता है। वर्तमान में इस सीट का प्रतिनिधित्व पूर्व कैबिनेट मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया की पत्नी गनीव कौर मजीठिया कर रही हैं। गनीव से पहले बिक्रम सिंह मजीठिया 2007 से लगातार तीन बार इस सीट से विधायक रहे हैं।
कंप्यूटर साइंस में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा
41 वर्षीय पप्पलप्रीत सिंह के पास कंप्यूटर साइंस में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और तीन साल का पॉलीटेक्निक डिप्लोमा है। अजनाला पुलिस स्टेशन हमले के बाद पंजाब पुलिस की कार्रवाई के दौरान अमृतपाल और पप्पलप्रीत की रेहड़ी पर भागते हुए तस्वीरें काफी वायरल हुई थीं। बाद में पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर NSA के तहत डिब्रूगढ़ जेल भेज दिया था।
क्या-क्या चल रहे मामले?
अमृतसर के मरारी गांव के रहने वाले पप्पलप्रीत खुद को वीडियो जर्नलिस्ट और एक्टिविस्ट बताते रहे हैं। 2022 में अमृतपाल के पंजाब लौटने के बाद से ही वे लगातार उनके साथ रहे हैं। हालांकि, उनका विवादों से पुराना नाता रहा है।
पप्पलप्रीत के खिलाफ 2015 में देशद्रोह, UAPA और IT एक्ट के तहत FIR दर्ज की गई थी। पप्पलप्रीत पर आईएसआई (ISI) से संबंध रखने और सरबत खालसा कार्यक्रम में भड़काऊ संदेश पढ़ने का आरोप लगा था। इसके अलावा बठिंडा के तख्त दमदमा साहिब में दूसरे सरबत खालसा के आयोजन की कोशिश के दौरान उन्हें फिर से गिरफ्तार किया गया था।
पप्पलप्रीत सिंह ने 2015 में ‘सिख यूथ फ्रंट’ नाम का संगठन बनाया था और 2019 में नशा तस्करों के खिलाफ अभियान भी चलाया था। ‘वारिस पंजाब दे’ से जुड़ने से पहले उनका शिरोमणि अकाली दल (मान) से भी संक्षिप्त जुड़ाव रहा है।
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पंजाब में ‘कौमी इंसाफ मोर्चा’ द्वारा बुलाए गए का असर कई जगहों पर देखने को मिल रहा है। राज्य में अलग-अलग जगहों पर प्रदर्शनकारियों के सड़क पर उतरने की वजह से ट्रैफिक जाम लग गया। कई जगहों पर दुकानें और मार्केट बंद नजर आ रहे हैं। पढ़िए पूरी खबर…
