Uttar Pradesh News: विपक्षी सांसदों के कड़े विरोध और आपत्तियों के बीच केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा में एफसीआरए, 2026 विधेयक को बुधवार को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेज दिया गया। इस पर अब बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने प्रतिक्रिया दी है।
मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, “जैसाकि सर्वविदित है कि एफसीआरए संशोधन बिल, जिसे सरकार अति-महत्वपूर्ण बताकर अन्य विधेयकों की तरह ही इसे तुरन्त पास कराना चाहती थी, किन्तु विपक्ष के ज़बरदस्त विरोध के चलते व संसद में इस पर बिना प्रारम्भिक चर्चा के ही इसे कल काफी आपाधापी में संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेज दिया गया है।”
सत्ता पक्ष और विपक्ष ने विधेयक का राजनीतिकरण कर दिया- मायावती
मायावती ने आगे कहा, “वैसे इस एफसीआरए संशोधन बिल को कांग्रेस पार्टी व इनके सहयोगी दल सीधे तौर पर अल्पसंख्यक विरोधी बताकर इस बिल को वापस लेने की मांग कर रहे हैं, जबकि सरकार इसे विदेश फण्डिंग के उपयोग में कथित भ्रष्टाचार से जोड़कर इसमें कठोर बदलाव करना चाहती है। इससे स्पष्ट है कि इस बिल का सत्ता व विपक्ष दोनों ने ही राजनीतिकरण ज्यादा कर दिया है।”
बसपा चीफ ने कहा, “बेहतर होता अगर विपक्ष कल इस विधेयक को रखने के दौरान संसद को चलने देता और इसकी कमियों को उजागर करता तो उसे पूरा देश जानता, लेकिन इन्होंने संसद को ही अपनी जिद के हिसाब से नहीं चलने दिया।”
सरकार की और से संसद में कुछ ही मिनटों में पास करा दिए गए विधेयकों पर भी मायावती ने हमला बोला है। उन्होंने कहा, “इतना ही नहीं बल्कि ऐसे अनेकों और बिल भी विपक्ष द्वारा संसद को नहीं चलने देने की वजह से सरकार ने उन्हें मिनटों में पास करा दिये हैं, जिन्हें इनको रोकना चाहिये था, जो विपक्ष ने ऐसा नहीं किया, जिसका सरकार अपने पक्ष में पूरा फायदा उठा रही है। इससे विपक्ष की या तो अंदरूनी मिलीभगत लगती है या फिर जेन-जी के वोटों के स्वार्थ में इन्हें देश के अन्य मुद्दे बिल्कुल भी नजर नहीं आ रहे हैं। हालांकि, वर्तमान हालात में जेनजी की समस्याओं के मुद्दे को प्राथमिकता देते हुये इनको जनहित के अन्य मुद्दों को भी महत्व देना चाहिये था।”
राम मंदिर चंदा चोरी को लेकर भी किया सवाल
राम मंदिर चंदा विवाद पर भी चर्चा ना होने पर मायावती ने तीखे सवाल किए। उन्होंने कहा, “इनको अयोध्या में राममन्दिर के चढ़ावे में गड़बड़ी का अर्थात् इसके भ्रष्टाचार का मुद्दा भी संसद में उठाना चाहिये था, जिसे भी अब विपक्ष ने अपने राजनैतिक स्वार्थ में उसे पीछे कर दिया है, जबकि इस पर संसद में चर्चा होना बहुत जरूरी है।”
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संसद के मानसून सत्र में इस बार नीट परीक्षा, छात्रों पर हुई बर्बरता और राम मंदिर के चंदा चोरी के मुद्दे पर सदन बार- बार बाधित हो रहा है। ये हालत निचले सदन और उच्च सदन में बीते दस दिन में देखने को मिली है। सत्ता पक्ष के सदस्यों के हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही लगातार बाधित हो रही है। वहीं, इस मुद्दे पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि सत्ताधारी और विपक्षी खेमे संसद को बाधित कर रहे। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…
