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OROP: पूर्व सैन्यकर्मियों ने दी केंद्र सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने की धमकी

वन रैंक, वन पेंशन (ओआरओपी) मुद्दे को लेकर प्रदर्शन कर रहे पूर्व सैन्यकर्मियों ने रविवार को धमकी दी कि अगर केंद्र तीन हफ्तों के अंदर उनकी मांगों को पूरा नहीं करता है तो वे न केवल अपना आंदोलन तेज करेंगे....

Author नई दिल्ली | Updated: December 15, 2015 4:37 AM
(File-Pic)

वन रैंक, वन पेंशन (ओआरओपी) मुद्दे को लेकर प्रदर्शन कर रहे पूर्व सैन्यकर्मियों ने रविवार को धमकी दी कि अगर केंद्र तीन हफ्तों के अंदर उनकी मांगों को पूरा नहीं करता है तो वे न केवल अपना आंदोलन तेज करेंगे बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा के पक्ष में मतदान नहीं करेंगे।

पूर्व सैन्यकर्मियों के संगठनों के शीर्ष निकाय यूनाइटेड फ्रंट आफ एक्स-सर्विसमेन (यूएफईएस) ने मांग की कि मुद्दे के तत्काल हल के लिए केंद्र पूर्व थल सेना प्रमुख और केंद्रीय मंत्री वीके सिंह को सरकार और उनके बीच औपचारिक रूप से मध्यस्थ नियुक्त करे। पूर्व सैन्यकर्मियों ने ओआरओपी योजना में प्रर्दशनकारियों की उम्मीदों के अनुरूप सुधार के लिए सरकार को 15 दिनों का समय दिया। ऐसा नहीं हुआ तो आंदोलन तेज करने के पहले सरकार को सात दिनों का नोटिस दिया जाएगा।

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे मेजर जनरल (अवकाशप्राप्त) सतवीर सिंह ने कहा कि हम मध्यस्थता के लिए सरकार से अनुरोध कर रहे हैं और उसके बाद हम उन्हें सात दिनों का नोटिस देंगे। उन्होंने मांग की कि वीके सिंह को मध्यस्थता के अधिकार देने की खातिर आज ही आदेश जारी किया जाए और हमारे साथ बातचीत की जाए तथा सरकारी ओआरओपी की सात विसंगतियों का तीन चार दिनों में हल किया जाए।

सिंह ने जंतर-मंतर पर यूएफईएस की ओर से आयोजित सैनिक आक्रोश रैली के दौरान यह मांग की। राजग सरकार पर दबाव बनाने का प्रयास करते हुए यूएफईएस ने अपने सदस्यों से असम सहित अन्य आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा के पक्ष में मतदान नहीं करने का अनुरोध किया। पूर्व सैन्यकर्मियों ने दावा किया कि उनके मतों की बदौलत ही भाजपा को 2014 के लोकसभा चुनाव में इतनी सीटें मिलीं। सिंह ने कहा कि लेकिन सरकार ने पूर्व सैनिकों को उनके मनमाफिक ओआरओपी नहीं देकर छल किया है जबकि भाजपा ने वादा किया था।

उन्होंने कहा कि आपने देखा कि दिल्ली और हाल ही में बिहार में पार्टी का क्या हुआ। हम सदस्यों से अनुरोध करते हैं कि अगर हमारी मांगों की अनदेखी की जाती है तो वे आगामी चुनावों में उसे वोट नहीं दें। यूएफईएस ने रैली में मौजूद पूर्व सैनिकों से इस बार गणतंत्र दिवस समारोहों का बायकाट करने का आह्वान किया। सिंह ने केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के इस बयान के लिए उनकी आलोचना की कि सरकार के ओआरओपी फार्मूले को अधिकतर पूर्व सैन्यकर्मियों के संगठनों ने स्वीकार कर लिया है और एक छोटे तबके को इससे कुछ आपत्ति है।

सिंह ने रैली में आए लोगों की ओर इंगित करते हुए कहा, उन्हें (जेटली को) यहां आना चाहिए और यहां आए लोगों की संख्या देखनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि 99.99 फीसद से ज्यादा इसके खिलाफ हैं। सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जेटली और रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर को इस मुद्दे पर यूएफईएस से बहस करने की चुनौती दी और कहा कि गलत साबित होने पर पूर्व सैन्यकर्मी आंदोलन वापस ले लेंगे। सिंह ने कहा कि यूएफईएस ने सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट को भी खारिज कर दिया है। रैली को कर्नल इंद्रजीत सिंह ने भी संबोधित किया। माना जाता है कि ओआरओपी के लिए आंदोलन उन्होंने ही शुरू किया था।

 

 

 

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