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ओडिशा: ‘तितली’ से मरने वालों की संख्या में हुआ इजाफा, अब तक 52 की मौत

ओडिशा में आये तितली तूफान से मरने वालो की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। अब तक 52 लोग इस तूफान की भेंट चढ़ चुके हैं।

Author भुवनेश्वर | October 18, 2018 6:20 PM
Odisha, Andhra Pradesh Cyclone Titli Updates: मौसम विभाग ने तितली तूफान के तट पर पहुंचने के बाद काफी तेज रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान जताया। (AP File Photo)

समुद्री चक्रवात तूफ़ान तितली ने ओडिशा में भीषण तबाही मचाई है। इसमें मृत लोगों की संख्या बढ़कर 52 हो गई है। एक अधिकारी ने बुधवार को कहा कि राज्य सरकार ने मृतकों के रिश्तेदार को दी जाने वाली मुआवजा राशि दोगुना से ज्यादा कर दी है। अधिकारियों ने 11 अक्टूबर को आए चक्रवाती तूफान से राज्य को हुई क्षति के आंकलन के लिए एक समीक्षा बैठक की।

मुख्य सचिव आदित्य प्रसाद पधी ने कहा, “तटीय राज्य को करीब 2,200 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।”पधी ने कहा, “प्राथमिक क्षति आकंलन रिपोर्ट के मुताबिक, बुनियादी सुविधाओं और कृषि समेत 2,200 करोड़ रुपये की क्षति का अनुमान लगाया गया है।” उन्होंने कहा, “अंतिम क्षति आकंलन रिपोर्ट दो दिनों के भीतर तैयार की जाएगी।”

विशेष राहत आयुक्त ने कहा

विशेष राहत आयुक्त बिष्णुपद सेठी ने समीक्षा बैठक के बाद कहा, “अकेले गजपति जिले में 39 मौतें हुई हैं। गंजाम जिले में 12 मौतें और कंधमाल जिले में एक व्यक्ति की मौत हुई है।” राज्य सरकार ने प्रत्येक मृतक के परिवार को दी जाने वाली मुआवजा राशि चार लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दी है। सड़कों की क्षति 500 करोड़ रुपये, बिजली बुनियादी सुविधाओं की क्षति 133 करोड़ रुपये, घरों की 150 करोड़ रुपये और कृषि की क्षति 233 करोड़ रुपये आंकी गई है।

राज्य सरकार ने मंगलवार को सर्वाधिक प्रभावित जिले गजपति, गंजाम और रायगढ़ के लिए 102 करोड़ रुपये जारी किए थे। मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने गजपति और गंजाम जिलों का दौरा करने के बाद बाराघरा गांव को पहाड़ी की चोटी से तलहटी में स्थानांतरित करने की घोषणा की। साथ ही गांव के 76 परिवारों को बीजू पक्का घर योजना के तहत पक्के घर मुहैया कराए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने लाभार्थियों को पट्टा वितरित किया और कहा कि सरकार उन बच्चों की देखभाल करेगी, जिन्होंने आपदा में अपने माता-पिता को खो दिया है। प्रदेश में चल रहे राहत और बचाव कार्य का उल्लेख करते हुए एक अधिकारी ने बताया कि 95 प्रतिशत क्षतिग्रस्त सड़को की मरम्मत चुकी है। ग्रामीण क्षेत्रों में जनजीवन को पटरी पर लाने के लिए कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है।

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