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मुश्किल में ‘ओडिशा के मोदी’! आदिवासी देवता की प्रतिमा जलाने और आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में कोर्ट ने भेजा समन

मंत्री पर 2004 में बालासोर जिले स्थित अपने पैतृक गांव गोपीनाथपुर में में एक आदिवासी देवता की प्रतिमा जलाने का आरोप है। वहीं, दूसरे मामले में सारंगी पर आरोप है कि उन्होंने 2011 में नीलागिरी में आदिवासी समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की।

Author नई दिल्ली | July 14, 2019 8:57 AM
बालासोर से बीजेपी सांसद प्रताप सारंगी। (फोटो: इंडियन एक्सप्रेस)

‘ओडिशा के मोदी’ के तौर पर मशहूर केंद्रीय नेता प्रताप सारंगी को भुवनेश्वर की एक अदालत ने समन भेजकर 15 जुलाई को पेश होने के लिए कहा है। एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री पर आदिवासी भावनाओं को भड़काने का आरोप है और उन पर इससे जुड़े दो आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।

अंग्रेजी अखबार टेलिग्राफ के मुताबिक, मंत्री पर 2004 में बालासोर जिले स्थित अपने पैतृक गांव गोपीनाथपुर में में एक आदिवासी देवता की प्रतिमा जलाने का आरोप है। वहीं, दूसरे मामले में सारंगी पर आरोप है कि उन्होंने 2011 में नीलागिरी में आदिवासी समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की। बता दें कि सारंगी का विवाद से पुराना नाता रहा है।

जनवरी 1999 में जब ऑस्ट्रेलियन मिशनरी के ग्राहम स्टेन्स और उनके बेटों को जिंदा जलाने की वारदात हुई, उस वक्त वह बजरंग दल के प्रदेश यूनिट के प्रमुख थे। हालांकि, इस तिहरे हत्याकांड में सारंगी आरोपी नहीं थे। सारंगी राज्य में काम करने वाली ईसाई मिशनरियों के खिलाफ अपने तीखे विचारों के लिए जाने जाते हैं।

सारंगी बालासोर से सांसद हैं और अविवाहित हैं। उन्हें ये ताजा समन इस हफ्ते की शुरुआत में अडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज की अदालत से जारी हुए। जनप्रतिनिधियों के खिलाफ दर्ज मामलों के निपटारे के लिए ओडिशा हाई कोर्ट ने इस अदालत को जिम्मेदारी दी है।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, सांरगी के खिलाफ पहला मामला उनके गांव में श्मशान के नजदीक आदिवासी देवता की पूजा का कथित तौर पर ब्राह्मणों के विरोध से जुड़ा हुआ है। 2004 में एक अंतिम संस्कार के दौरान ब्राह्मणों और कथित तौर पर सारंगी ने श्मशान के नजदीक आदिवासी देवता की पूजा का विरोध किया। बाद में प्रतिमा को जला दिया गया।

दूसरा मामला नीलगिरी में हुए प्रदर्शन से जुड़ा हुआ है। सारंगी उस वक्त स्थानीय विधायक थे और उनकी अगुआई में चल रहे मंदिर ट्रस्ट पर गैरकानूनी गतिविधियों में लिप्त होने का आरोप लगा था। इस विवाद में हुई झड़प के दौरान सारंगी ने कथित तौर पर वहां मौजूद आदिवासी लोगों को अपशब्द कहे।

वहीं, सारंगी का कहना है कि पुलिस उन्हें फंसा रही है। वह तो मौके पर मौजूद भी नहीं थे। उन्होंने सवाल उठाया कि राज्य की सत्ताधारी बीजेडी ने अभी तक उनके खिलाफ मामला क्यों नहीं चलाया? सारंगी के मुताबिक, अब वह मंत्री हैं, इसलिए उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।

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