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खुद को ताकतवर दिखाने में जुटा विपक्ष

उत्तर प्रदेश में 2014 से लगातार भारतीय जनता पार्टी के हाथों करारी हार का सामना कर रही विपक्षी पार्टियां, लोकसभा चुनाव के पहले खुद को ताकतवर दिखाने की कोशिशों में जुट गई हैं।

खुद को ताकतवर दिखाने में जुटा विपक्ष
मायावती/ अखिलेश यादव। फाइल फोटो।

समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने कार्यकर्ताओं को उनकी ताकत का अहसास कराने के लिए धरना-प्रदर्शन और सड़क पर उतरने की रणनीति अपनाई है, जबकि कांग्रेस अब भी ठंडे कमरे में कहीं आराम फरमा रही है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी तक सावधान यात्रा निकाल कर मतदाताओं को अपनी ताकत का अहसास कराने में जुटी है।

उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी सरीखे क्षेत्रीय दलों ने भारतीय जनता पार्टी के मुकाबले खुद को ताकतवर साबित करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रखी है। जबकि उन्हें 2014 के लोकसभा चुनाव से ले कर 2022 के विधानसभा चुनाव तक भारतीय जनता पार्टी से लगातार मिले हार के स्वाद का अहसास भी है और भाजपा की ताकत का अंदाज भी।

आलम यह है कि प्रदेश में २० बरस से अधिक समय तक बारी-बारी सरकार चलाने वाली समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी भी भारतीय जनता पार्टी से अकेले मुकाबला करने का साहस बटोर नहीं पा रही हैं। समाजवादी पार्टी ने तो 2014 के लोकसभा चुनाव से लेकर 2022 के विधानसभा चुनाव तक अकेले भाजपा का मुकाबला करने से बेहतर गठबंधन के साथियों के साथ चुनाव मैदान में उतरना श्रेयस्कर समझा।

वहीं, समाजवादी पार्टी का साथ छोड़ देने के बाद लम्बे समय तक अकेले चुनाव मैदान में उतरी बहुजन समाज पार्टी और उनकी प्रमुख मायावती तक ने अपने घुर विरोधी और सियासी शत्रु समाजवादी पार्टी के साथ समझौता कर 2019 के लोकसभा चुनाव में अपनी नैया पार लगाने की कोशिशें कीं।भारतीय जनता पार्टी को चुनावी मैदान में पराजित करने के सभी सूत्रों के पूरी तरह धराशायी हो जाने के बाद भी विपक्ष खुद को ताकतवर बताने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ रहा है।

कुछ दिन पहले हुए उत्तर प्रदेश के विधानसभा सत्र में सदन से लेकर सड़क तक जिस तरह खुद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मोर्चा संभाला, उससे साफ है कि वे जनता के बीच अपनी छवि को सुधारने की कोशिश में जुटे हुए हैं। उधर मायावती ने अपने कार्यकर्ताओं को बार-बार यह संदेश देने की कोशिश की है कि वे इस बार के लोकसभा चुनाव में अकेले दम पर चुनाव मैदान में उतरेंगी।

विधानसभा चुनाव में रैलियों को सम्बोधित करने के अलावा मायावती ने अब तक न ही प्रदेश में कहीं दौरा किया है और न ही पार्टी स्तर पर किसी सार्वजनिक कार्यक्रम का आयोजन। इतने के बाद भी उन्हें यह गुमान है कि वे 2024 के लोकसभा चुनाव में कुछ नया कर दिखाएंगी। उधर ओमप्रकाश राजभर अखिलेश यादव को बेनकाब करने में जुटे हैं। उन्होंने अपने इसी उद्देश्य को ले कर सावधान यात्रा शुरू की है। इसका कितना लाभ उन्हें होगा? यह यक्षप्रश्न अधिक है।

विपक्ष के खुद को ताकतवर दिखाने पर प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह कहते हैं, 2014 से जो अपना वजूद बचाने के लिए खुद संघर्ष कर रहे हैं, वे भला भाजपा का मुकाबला क्या करेंगे? भाजपा 2024 के लोकसभा चुनाव में प्रदेश की सभी सीटों पर जीत का परचम लहराएगी। विधायक शलभ मणि त्रिपाठी कहते हैं, कोई गठबंधन की तलाश में है तो किसी को अपने बच्चों को राजनीति में लाने की बेचैनी है। सब अपनी लिमिटेड कम्पनियां चला रहे हैं। जनता के हितों से इनका कभी कोई सरोकार नहीं रहा।

समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा कि सपा ही अकेला ऐसा राजनीतिक दल है जिसने अब तक भारतीय जनता पार्टी का डट कर मुकाबला किया है। 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को तीन करोड़ से अधिक मत मिले हैं। मतों की यह संख्या इस बात का संकेत है कि सपा को प्रदेश में चाहने वालों की संख्या खासी है। भाजपा की जन विरोधी नीतियों से जनता परेशान है। इस बार के लोकसभा चुनाव में वह समाजवादी पार्टी को अपना अलम्बरदार चुन कर भाजपा को कड़ा सबक सिखाएगी।

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First published on: 28-09-2022 at 05:30:43 am
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