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सादे ड्रेस में थाने पहुंच गए डीजीपी तो मच गया हड़कंप, सिपाही से मांगा तंबाकू, बोले- सबको कर देते हैं सस्पेंड

एसपी निधि रानी के मुताबिक रंगरा थानेदार प्रमोद कुमार साह समेत पूरे थानों को डीजीपी ने बदलने का आदेश दिया है। बाद में एसपी दफ्तर पहुंच नौगछिया पुलिस ज़िले के तमाम थानेदारों के साथ डीजीपी ने अपराध नियंत्रण को लेकर बैठक की।

सादे लिबास में थाने पहुंचे बिहार के पुलिस महानिदेशक गुप्तेश्वर पांडे, मच गया हड़कंप

बिहार के पुलिस महानिदेशक गुप्तेश्वर पांडे गुरुवार (20 जून) की सुबह तड़के अचानक नौगछिया के रंगरा थाना पहुंच गए तो थाने पर मौजूद पुलिसकर्मियों में हड़कंप मच गया। वहां के एसएचओ ड्यूटी से नदारत मिले। खबर पाकर भागलपुर रेंज के डीआईजी विकास वैभव और नौगछिया की एसपी निधि रानी भी थाने पहुंच गईं। एसपी निधि रानी के मुताबिक रंगरा थानेदार प्रमोद कुमार साह समेत पूरे थाने के स्टाफ को डीजीपी ने बदलने का आदेश दिया है। बाद में एसपी दफ्तर पहुंच नौगछिया पुलिस ज़िले के तमाम थानेदारों के साथ डीजीपी ने अपराध नियंत्रण पर बैठक की। इसके बाद वे भागलपुर एसएसपी दफ्तर पहुंचे।

कुछ देर वहां भी रुककर अपराध पर काबू पाने के लिए मातहत पुलिस अधिकारियों को दिशा निर्देश दे डिवीजन के बांका जिला के लिए रवाना हो गए। उनके अचानक दौरे से डिवीजन के आलाधिकारियों से लेकर थानेदारों व पुलिसियों के कान खड़े हो गए। सभी अपने – अपने थानों के रिकॉर्ड ठीक करने में लग गए। इनमें ख़ौफ़ समाया था कि किस थाने पर डीजीपी धावा बोल जांच शुरू कर देंगे और लेने के देने पड़ जाएंगे।

थाना रंगरा भागलपुर ज़िले के नौगाछिया के तहत पड़ता है। वहां के थानेदार ने सपने में भी नहीं सोचा था कि गुरुवार को पौ फटते ही डीजीपी अचानक वहां पहुंचकर बाट लगा देंगे। सूत्र बताते है कि थानेदार को गायब देख डीजीपी सख्त नाराज हुए। वहां मौजूद पुलिस वालों में भगदड़ की स्थिति पैदा हो गई। कोई वर्दी पहनने दौड़ा तो कोई अपने को मुस्तैद दिखाने को। डीजीपी सुबह कैपिटल एक्सप्रेस ट्रेन से नौगछिया स्टेशन उतरे और बाइक से सीधे नौगछिया आदर्श थाना पहुंचे। वे सादे लिबास में थे। वहां तैनात सिपाही समझ नहीं पाए कि बाइक से आया डीजीपी है। उन्होंने सिपाही से थाने का हालचाल पूछा। खैनी मांगी। सिपाही ने अपने उच्च अधिकारियों की शिकायत करते हुए कहा कि साहब  सभी को सस्पेंड ही कर देते है। सिपाही का इशारा डीआईजी की तरफ था। हालांकि, तबतक एसपी उनके लिए गाड़ी लेकर पहुंच जाती हैं। तब वे थाना रंगरा से रवाना हुए।

भागलपुर रेंज के डीआईजी विकास वैभव भी सख्त अधिकारी माने जाते है। इन्होंने हाल ही में 72 घंटों के दरम्यान इंस्पेक्टर रैंक के तीन थानेदारों को आवेदकों की लिखित शिकायत पर एफआईआर दर्ज नहीं करने की वजह से निलंबित कर दिया था। यह सख्त कार्रवाई इनकी लापरवाही व ढिलाई की वजह से की है।

डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे ने 10 जून को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा अपराध नियंत्रण के लिए बुलाई बैठक के बाद ही बिहार के आलाधिकारियों को महीने में कम से कम दस दिन सड़क पर उतर जनता की दिक्कतों और कानून- व्यवस्था व अपराध का जायजा लेने की हिदायत दी है। ताकि अपराधियों में पुलिस का ख़ौफ़ पैदा हो सके। डीजीपी खुद भी हाल फिलहाल पटना और आसपास के थानों का औचक निरीक्षण कर चुके है। इसी दौरान उन्होंने संदेश देकर राज्य के पुलिस अधिकारियों को सतर्क भी किया था कि कभी भी किसी भी थाने का नंबर आ सकता है।

फिर भी अधिकारी सचेत नहीं है।आखिरकार आज 20 जून को भागलपुर ज़िले के रंगरा थाने का नंबर आ ही गया। जहां के एसएचओ नदारत मिले और केस डायरी पेंडिंग मिली। डीजीपी ने इस बाबत जमकर फटकार लगाई और कार्रवाई करने का आदेश अपने मातहत वरीय पुलिस अधिकारियों को दिया।

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