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Varanasi: काशी विश्वनाथ में 400 साल में पहली बार झरोखा दर्शन, महाशिवरात्रि पर हुआ पुराधिपति का विवाह

बाबा भोलेनाथ की नगरी काशी (वाराणसी) में सोमवार को महाशिवरात्रि की धूम रही। इस दौरान हजारों नागा साधुओं और भक्तों की मौजूदगी में काशी पुराधिपति का विवाह हुआ। वहीं, श्रद्धालुओं ने 400 साल में पहली बार झरोखे से काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन किए।

बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में नागा साधु और भक्त। (फोटो सोर्स : स्थानीय )

बाबा भोलेनाथ की नगरी काशी (वाराणसी) में सोमवार को महाशिवरात्रि की धूम रही। इस दौरान हजारों नागा साधुओं और भक्तों की मौजूदगी में काशी पुराधिपति का विवाह हुआ। वहीं, श्रद्धालुओं ने 400 साल में पहली बार झरोखे से काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन किए।

काशी पुराधिपति का  विवाहः बाबा दरबार सहित पूरे काशी में सोमवार को काशी पुराधिपति के विवाह समारोह की धूम रही। नागा साधु और भक्त सभी नाचते-गाते फूले नही समा रहे थे। कहीं गीत तो कहीं भजन-कीर्तन करते बाबा और भक्तजन मंत्र पढ़ते हुए पग-पग बढ़ते जा रहे थे। घंटों की प्रतीक्षा के बाद जब बाबा के दर्शन हुए तो भक्त खिल उठे और घंटों की थकान एक क्षण में खत्म हो गई।

400 साल में पहली बार झरोखा दर्शन : काशी में रविवार से ही शिवभक्तों का रेला लगा हुआ था। ऐसे में काशी विश्वनाथ मंदिर में पूरी रात झरोखा दर्शन होता रहा। बताया जा रहा है कि 400 साल के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ था। बता दें कि भीड़ के चलते मंदिर प्रशासन ने रविवार को भोग आरती के बाद से ही गर्भगृह में श्रद्धालुओं का प्रवेश बंद कर दिया। यह सिलसिला सोमवार को भी जारी रहा।इसके चलते सभी भक्तों को केवल झरोखे से ही बाबा विश्वनाथ के दर्शन मिले। जानकारों का कहना था कि यह पहला मौका है, जब महाशिवरात्रि पर शिवभक्तों को बाबा विश्वनाथ के गर्भगृह में जाने और जल चढ़ाने का मौका नहीं मिला।

सभी अखाड़ों के प्रमुख ने किए दर्शन: सोमवार सुबह 7 से 11 बजे तक सभी अखाड़ों के महामंडलेश्वर, दिगंबर संत, संन्यासियों ने बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए। इन्हें चार नंबर द्वार यानी छत्ता द्वार से प्रवेश दिया गया। परंपरा के अनुसार, जिस वक्त नागा साधु बाबा भोलेनाथ के दर्शन करते हैं, उस दौरान कोई अन्य व्यक्ति दर्शन-पूजन नहीं कर सकता है। ऐसे में मंदिर में भक्तों का प्रवेश वर्जित रहा। नागा साधुओं और भक्तों की भीड़ का आलम यह था कि मैदागिन से ज्ञानवापी छत्ता द्वार तक कतार लगी रही। वहीं, दशाश्वमेध घाट से ज्ञानवापी और लक्सा से छत्ता द्वार तक काफी भीड़ रही।

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