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कैग की रिपोर्ट ने रावत सरकार की खोली पोल

रावत सरकार ने इस वित्तीय वर्ष में 41930.08 करोड़ रुपए का मुख्य बजट बनाया था। जिसमें से सरकार 468 करोड़ रुपए खर्च नहीं कर पाई। कई विभागों में बजट के अनुमान से अधिक रुपए का प्रावधान किया गया था। जिसे राज्य सरकार प्रयोग भी नहीं कर पाई।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत। (फाइल फोटो)

उत्तराखंड की पूर्ववर्ती हरीश रावत सरकार की वित्तीय प्रबंधन की पोल भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक (कैग) ने खोली है। विधानसभा के पटल पर वित्त मंत्री प्रकाश पंत ने विधानसभा के पटल पर कैग की रिपोर्ट रखी। इस रिपोर्ट में पिछली हरीश रावत सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए गए है। हरीश रावत सरकार के कार्यकाल में वित्तीय वर्ष 2016-17 के दौरान 31 मार्च तक 573.24 करोड़ रूपये की राशि खर्च की जानी थी। परंतु इस धनराशि को वित्तीय वर्ष के आखिरी दिन सरकार ने वापस कर दिया, जो हरीश रावत सरकार के कामकाज की झलक दिखाती है। हरीश रावत सरकार ने 2016-17 के लिए 1498.56 करोड़ रूपए का अनुपूरक बजट का प्रावधान किया था। कैग के मुताबिक जो अनावश्यक साबित हुआ।

रावत सरकार ने इस वित्तीय वर्ष में 41930.08 करोड़ रुपए का मुख्य बजट बनाया था। जिसमें से सरकार 468 करोड़ रुपए खर्च नहीं कर पाई। कई विभागों में बजट के अनुमान से अधिक रुपए का प्रावधान किया गया था। जिसे राज्य सरकार प्रयोग भी नहीं कर पाई। 227.07 करोड़ रुपए 29 मामलों में आकस्मिक निधि के तौर पर मंजूर तो कराए गए, परंतु उनका प्रयोग नहीं किया गया। रावत सरकार के 30 वित्तीय नियंत्रकों ने अपने खर्चों का कैग से मिलान तक नहीं किया। और न ही अब इसका कोई हिसाब-किताब दिया गया। 224 उपयोगिता प्रमाणपत्र महालेखाकार को भेजे तक नहीं गए, जबकि इन्हें एक साल के भीतर भेजा जाना था। सत्ता पक्ष ने इस मामले को कांग्रेस के खिलाफ विधानसभा के आखिरी सत्र के दौरान हथियार के रूप में इस्तेमाल किया। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, पूर्व वित्तमंत्री और नेता प्रतिपक्ष इंदिरा ह्रदयेश की भी इस मामले में खिंचाई की।

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अजय भट्ट ने कहा कि हरीश रावत सराकार घोटालों की सरकार थी और उस सरकार में वित्तीय अराजकता का माहौल था। जिसका खमियाजाना राज्य की जनता को भुगतना पडा। भट्ट ने कहा जी मौजूदा त्रिवेंद्र सिंह रावत का एक साल का कार्यकाल वित्तीय अनुशासन वाला रहा। जिससे राज्य का विकास हो रहा है। वहीं पूर्व वित्त मंत्री इंदिरा ने सत्ता पक्ष पर कैग की रिपोर्ट का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार को मिटाने का दम भरने वाली सूबे की सरकार लोकायुक्त बिल से भाग रही है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि हम ऐसी सरकार चला रहे हैं। जिसमें भ्रष्टाचारियों के लिए कोई जगह नहीं है। हम भ्र्रष्टाचारियों को छोडेंÞगे नहीं। कैग की रिपोर्ट ने सूबे की सियासत को गरमा दी है।

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