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आप पर सबसे बड़ा संकट: चुनाव आयोग ने दिया झटका, फटकार के बाद हाईकोर्ट ने राहत देने से किया इनकार

सुनवाई के लिए वक्त अदालत में पार्टी के 6 विधायक मौजूद थे। आम आदमी पार्टी का तर्क है कि इस मामले में चुनाव आयोग को फैसला लेने का अधिकार ही नहीं था।

दिल्ली हाईकोर्ट में शुक्रवार शाम लाभ का पद मामले पर हुई सुनवाई में कोर्ट ने आप के 20 विधायकों को अंतरिम राहत देने से मना कर दिया। (फोटोः फेसबुक/पीटीआई)

चुनाव आयोग द्वारा लाभ का पद मामले में आम आदमी पार्टी (आप) के 20 विधायकों की सदस्यता रद्द करने की सिफारिश के बाद पार्टी ने शुक्रवार को हाईकोर्ट में गुहार लगाई। कोर्ट ने इस दौरान पार्टी को फटकार लगाते हुए करारा झटका दिया। कोर्ट ने कहा कि पार्टी को फौरी तौर पर राहत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने इससे पहले कहा कि आप ने खुद से ही तय कर लिया कि चुनाव आयोग के पास जाना है कि नहीं। कोर्ट के मुताबिक, जब पार्टी चुनाव आयोग के पास गई ही नहीं तो वह कैसे कह सकती है कि उसकी इस मामले में सुनवाई नहीं हुई। आम आदमी पार्टी का तर्क है कि इस मामले में चुनाव आयोग को फैसला लेने का अधिकार ही नहीं था। हाईकोर्ट ने इस दौरान चुनाव आयोग से भी जवाब मांगा। साथ ही यह पूछा कि क्या कोई सलाह दी गई है। कोर्ट ने दोनों पक्षों की बातें सुनने के बाद कहा कि अभी तक के तथ्यों पर राहत दिया जाना मुश्किल है। बीच में 10 मिनट का ब्रेक भी हुआ, जिसके बाद सुनवाई फिर से शुरू हुई। कोर्ट में सोमवार को इस मामले पर अगली सुनवाई होगी। बता दें कि आप के वकीलों ने यह भी कहा कि उनका पक्ष सुने बिना ही आयोग ने इस मामले में फैसला ले लिया। सुनवाई के वक्त अदालत में पार्टी के छह विधायक मौजूद थे। पार्टी का यह भी कहना है कि जब हाईकोर्ट ने काफी पहले यह मान लिया कि उनके विधायक संसदीय सचिव नहीं हैं, ऐसे में इस मामले पर उनपर कैसे कार्रवाई हो सकती है।

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उधर, 20 विधायकों की सदस्यता जाने की अटकलों के बीच कांग्रेस ने भी कमर कसनी शुरू की। पार्टी को पिछले विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा था। पार्टी का एक भी विधायक जीतने में असफल रहा था। सूत्रों के मुताबिक, शुक्रवार शाम कांग्रेस ने बैठक कर पूरे मामले पर राय-मशविरा किया। पार्टी नेताओं का दावा है कि अगर तुरंत चुनाव हुए तो पार्टी 20 में से 13 सीटें जीतने की स्थिति में है। वहीं, भाजपा के कई नेताओं ने केजरीवाल सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी ने कहा कि केजरीवाल को इस्तीफा दे देना चाहिए।

चुनाव आयोग की इस सिफारिश के बाद सभी की नजरें अब राष्ट्रपति की ओर हैं। आयोग ने अपनी सिफारिश राष्ट्रपति को भेजी है, जिस पर रामनाथ कोविंद को फैसला लेना है। हालांकि, आम आदमी पार्टी कानूनी उपायों के अलावा सियासी पलटवार करने में भी जुट गई है। पार्टी की ओर से आप विधायक सौरभ भारद्वाज ने सीधे पीएम नरेंद्र मोदी और मुख्य चुनाव आयुक्त अचल कुमार जोति के खिलाफ ही मार्चा खोल दिया। भारद्वाज का आरोप था कि जोति ने पीएम नरेंद्र मोदी के इशारे पर दिल्ली सरकार के खिलाफ साजिश रची है।

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