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ओडिशाः जंगल में मिला ‘फ्लाइंग स्नेक’, साइकिल में छिपा था; कराया गया रेस्क्यू

फ्लाइंग स्नेक (उड़ने वाले) असल में उड़ नहीं पाते हैं। चूंकि ये पेड़ों के बीच मे छलांग लगाने की क्षमता रखते हैं, इसलिए इन्हें फ्लाइंग स्नेक कहा जाता है। दुर्लभ सांप पाए जाने का मामला यहां के मयूरभंज स्थित धानपुर गांव का है। जानकारी मिलने पर सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व की टीम ने आकर इस सांप को रेस्क्यू कराया और बाद में जंगल में छोड़ दिया।

जानकारी मिलने पर सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व की टीम ने आकर इस सांप को रेस्क्यू कराया और बाद में जंगल में छोड़ दिया। (फोटोः एएनआई)

ओडिशा में शनिवार (17 मार्च) को एक दुर्लभ प्रजाति का सांप पाया गया। यह ऑर्नेट फ्लाइंग स्नेक था, जिसे सूचना मिलते ही रेस्क्यू टीम ने आजाद कराया। यह सांप जंगली इलाके में साइकिल पर छिपा हुआ था, तभी कुछ लोगों ने इसे देखा था। आपको बताते चलें कि आमतौर पर इस प्रकार की नस्ल के सांप भारत में नहीं पाए जाते हैं। फ्लाइंग स्नेक (उड़ने वाले) असल में उड़ नहीं पाते हैं। चूंकि ये पेड़ों के बीच मे छलांग लगाने की क्षमता रखते हैं, इसलिए इन्हें फ्लाइंग स्नेक कहा जाता है। दुर्लभ सांप पाए जाने का मामला यहां के मयूरभंज स्थित धानपुर गांव का है। जानकारी मिलने पर सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व की टीम ने आकर इस सांप को रेस्क्यू कराया और बाद में जंगल में छोड़ दिया। ‘ओडिशा सन टाइम्स’ की खबर के अनुसार, टाइगर रिजर्व में एनिमल रेस्क्यू टीम के मुखिया कृष्णा चंद्र गोच्चायत ने इस बारे में बताया कि सांपों की ये नस्ल भारत में कम ही पाई जाती है। हमनें पहली बार यहां ऐसा सांप पकड़ा, जो कि एक जगह से दूसरी जगह तक छलांग लगा सकता है।”

घटना 17 मार्च को दोपहर में तकरबीन ढाई बजे की है। सांप को एक साइकिल के पीछे रखी आग जलाने के लिए ले जाई जा रही लड़कियों के बीच छिपा देखा गया था। फौरन लोगों ने इस संबंध में टाइगर रिजर्व को जानकारी दी, जिसके बाद वहां से रेस्क्यू टीम भेजी गई। टीम के अनुसार, यह ऑर्नेट फ्लाइंग स्नेक तीन फुट लंबा था। उसे रेस्क्यू कराने के बाद फिर से जंगल में छोड़ दिया गया है।

घटना 17 मार्च को दोपहर में तकरबीन ढाई बजे की है। सांप को एक साइकिल के पीछे रखी आग जलाने के लिए ले जाई जा रही लड़कियों के बीच छिपा देखा गया था।

ये सांप खासकर दक्षिण-पूर्वी एशिया, श्रीलंका और दक्षिणी चीन में पाए जाते हैं। खास बात है कि ये छलांग लगाने के साथ अधिक तेज गति से चलने के भी माहिर होते हैं। ये कम जहरीले होते हैं। ऐसे में इंसानों को इनसे कम ही खतरा रहता है।

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