ताज़ा खबर
 

ओडिशा सरकार की अच्छी पहल, क्वारैंटाइन सेंटर पर प्रवासियों को दे रही ट्रेनिंग, बना रहा कम्यूनिटी हेल्थ वर्कर, रोजाना दे रही भत्ता

ओडिशा के पंचायती राज विभाग के प्रमुख सचिव का कहना है कि सरकार ने पहले ही बड़ी संख्या में प्रवासियों के लौटने का अंदाजा लगा लिया था, इसलिए सरकार ने UNICEF को भी ट्रेनिंग कार्यक्रम से जोड़ा।

Author Translated By कीर्तिवर्धन मिश्र भुवनेश्वर | Updated: May 17, 2020 8:40 AM
प्रवासी मजदूरों के वापस लौटने के बाद से ओडिशा में कोरोना के केस तेजी से बढ़े हैं। (फोटो- एक्सप्रेस)

देश में कोरोनावायरस महामारी और लॉकडाउन के चलते बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर अपने राज्यों की तरफ लौट रहे हैं। इस स्थिति में कई राज्यों के पास इन मजदूरों को खाना और रोजगार देने के साधन का कोई मॉडल प्लान फिलहाल नहीं है। हालांकि, ओडिशा सरकार ने मौजूदा हालात को भांपते हुए प्रवासी मजदूरों को सामुदायिक स्वास्थ्यकर्मी बनने के लिए ट्रेनिंग देना शुरू कर दिया है। प्रवासी श्रमिकों के यह ट्रेनिंग सेशन पंचायत स्तर के क्वरैंटाइन सेंटर पर ही जारी हैं, जहां उन्हें कम से कम 14 दिन बिताने होते हैं।

इतना ही नहीं राज्य सरकार क्वारैंटाइन सेंटर में रोजाना के काम में योगदान दे रहे लोगों को प्रतिदिन 150 रुपए का मानदेय भी दे रही है।

गौरतलब है कि ओडिशा में प्रवासी मजदूरों के लौटने के बाद से ही संक्रमण के नए केसों की संख्या तेजी से बढ़ी है। खासकर गंजम जिले में। यहां 2 मई तक कोरोना के सिर्फ दो ही मामले थे। हालांकि, अब यह जिला महामारी से सबसे ज्यादा प्रभावित है। यहां अब तक 252 केस आ चुके हैं, जबकि एक व्यक्ति की जान भी गई है। पूरे ओडिशा की बात करें, तो राज्य में अब कोरोना के 737 केस हैं और 3 लोगों की इससे मौत भी हुई है।

कोरोना से बिहार में क्या हैं हाल, क्लिक कर जानें

ओडिशा के पंचायती राज और पेयजल विभाग के प्रमुख सचिव डीके सिंह का कहना है, “हमें पता था कि सिर्फ हजार ही नहीं, बल्कि लाखों की संख्या में प्रवासी मजदूर वापस लौटेंगे। ऐसे में सरकार ने पंचायतों को शामिल कर उन्हें क्वारैंटाइन सेंटर बनाने के निर्देश दे दिए। हम उन्हें अस्थायी मेडिकल कैंप कहते हैं। अब तक राज्य की 7 हजार पंचायतों में हमने 15 हजार कैंप लगाए हैं। यहां की बेड की क्षमता 6 लाख है। मौजदी समय में करीब 1 लाख लोग इन केंद्रों में रह रहे हैं, लेकिन यह संख्या हर दिन बढ़ रही है।”

सिंह ने बताया, “हमें लगा कि अगर ये लोग रुक ही रहे हैं, तो यह बेहतर होगा कि इन्हें सिर्फ कोरोनावायरस के बारे में ही नहीं, बल्कि कुछ और मुद्दों के बारे में भी जानकारी रहे। इसलिए हमने UNICEF जैसी एजेंसी को कार्यक्रम में जोड़ा। वे पंचायत-स्तर के अफसरों, सिविल सोसाइटी के सदस्यों, आशा और आंगनवाड़ी वर्कर्स को ट्रेनिंग दे रहे हैं, जो बाद में प्रवासी मजदूरों को यही ट्रेनिंग देते हैं।”

देश में कोरोना के मामले 90 हजार के पार, पूरी खबर के लिए क्लिक करें

कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित ओडिशा के गंजम जिले के कलेक्टर विजय कुलांगे ने कहा, “अब तक 45 हजार से ज्यादा लोग गंजम लौट चुके हैं। हमने रेलवे स्टेशन पर ही एक काउंटर बना दिया है, जहां प्रवासियों की स्क्रीनिंग होती है, उनका रजिस्ट्रेशन होता है और उन्हें पैक खाना, पानी की बोतल और टिश्यू पेपर दिया जाता है। इसके बाद लोगों को तय क्वारैंटाइन सेंटर पहुंचा दिया जाता है।”

कुलांगे के मुताबिक, “सेंटर पहुंचने के बाद प्रवासियों की दिनचर्या शुरू हो जाती है। सुबह एक घंटे उनकी फिजिकल ट्रेनिंग होती है। नाश्ते के बाद उनकी कोरोनावायरस की क्लास होती है। हम उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्यकर्मी बनाने पर काम कर रहे हैं। ताकि एक बार जब लोग क्वारैंटाइन खत्म कर घर जाएं, तो वे अपने घर, गली और समुदाय के लिए आधारभूत स्वास्थ्य विशेषज्ञ के तौर पर मदद कर सकें। वे लोगों को यह बताने में सक्षण होंगे कि सोशल डिस्टेंसिंग का क्या मतलब है और बूढ़े लोगों का कैसे ख्याल रखा जाना है। लंच के बाद सेंटर में रह रहे लोग अगर चाहें तो काम के लिए आगे आ सकते हैं। इसके बाद रात में खाना और मनोरंजन होता है।”

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories