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राम-सीता पर अभद्र टिप्पणी के बाद ओडिशा में सांप्रदायिक संघर्ष, हनुमान मंदिर को भी नहीं छोड़ा

राम-सीता के लिए फेसबुक पर की गई एक टिप्पणी के बाद ओडिशा के भद्रक में कर्फ्यू लगा दिया गया।

राम की तस्वीर पर कथित अभद्र टिप्पणी के बाद विवाद हुआ था।

राम-सीता के लिए फेसबुक पर की गई एक टिप्पणी के बाद ओडिशा के भद्रक में कर्फ्यू लगा दिया गया। प्रशासन की तरफ से यह कर्फ्यू शुक्रवार (7 अप्रैल) को लगाया गया था। विवाद के बाद लोगों की भीड़ सड़क पर उतर आई। उन्होंने कई दुकानों में आग लगा दी। इसके अलावा पुलिस के वाहनों पर भी हमला हुआ। यह सब पुलिस के कर्फ्यू लगाने के बाद गुरुवार (6 अप्रैल) को हुआ। इसके बाद शुक्रवार को तो दंगाईयों ने हनुमान मंदिर को भी नुकसान पहुंचाया।

क्या है मामला: बजरंग दल कार्यकर्ता अजीत कुमार पदिहारी ने फेसबुक पर भगवान राम और सीता की कोई फोटो पोस्ट की थी। कथित तौर से उस फोटो पर दूसरे समुदाय के लोगों ने अभद्र टिप्पणियां की। उसके बाद विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतकर हंगामा करना शुरू कर दिया। सड़क पर टायर जलाए गए, पुलिस ने उन लोगों को गिरफ्तार करने के लिए भी कहा गया। तीन लोगों पर कमेंट करने का आरोप है। भगत सेना राम नवमी समिति ने इसके लिए पुलिस थाने में शिकायत भी दर्ज करवाई है। उसमें तीनों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा गया है।

मामले के बाद राज्य सरकार ने तबादले करना शुरू कर दिया है। जिला कलेक्टर एल एन मिश्रा को हटाकर कटक नगरपालिका आयुक्त ज्ञान रंजन दास को लाया गया है। साथ ही गृह सचिव असीत त्रिपाठी, डीजीपी के बी सिंह और कई सीनियर अधिकारियों को भद्रक जाना पड़ा। वहां पुलिस की 15 पलटूनों को तैनात किया गया है।

केन्द्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर को शनिवार को भद्रक में एक कार्यक्रम के लिए जाना था। लेकिन उस कार्यक्रम को भी लोकल पुलिस के आग्रह के बाद कैंसल कर दिया गया।

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