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ट्रैफिक जाम में फंस कर रह गया सम-विषम

सम-विषम योजना लागू होने के बावजूद राजधानी की सड़कों पर भारी ट्रैफिक दिखा और कई सड़कों पर ट्रैफिक जाम रहा।

Author नई दिल्ली | April 19, 2016 2:44 AM
सम-विषम पार्ट-2 के दौरान दिल्ली में ट्रैफिक जाम का माहौल नजर आया। (पीटीआई फाइल फोटो)

सम-विषम पार्ट-2 की सोमवार को असल परीक्षा हुई। राजधानी की कई सड़कों पर पर व्यस्त समय में भारी ट्रैफिक जाम दिखा। कई लोग चालान कटवाते और नियम से होने वाली परेशानी से नाराज नजर दिखे। उधर, नेता विपक्ष के नेता को मनाने परिवहन मंत्री सुबह ही विजय गोयल के घर गुलाब के फूल के साथ पहुंचे। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कार्यालय जाने के लिए परिवहन मंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के साथ कार साझा किया। नियम के उल्लंघन के कारण यानी विषम संख्या की कार चलाने पर चालानों की संख्या दोपहर दो बजे तक 348 रही। वहीं सम विषम को लेकर जनता की प्रतिक्रिया झल्लाहट भरी थी।

सम विषम योजना लागू होने के बाद सोमवार पहला कार्यदिवस था। सम-विषम योजना लागू होने के बावजूद राजधानी की सड़कों पर भारी ट्रैफिक दिखा और कई सड़कों पर ट्रैफिक जाम रहा। अक्षरधाम चौराहा, मयूर विहार-नोएडा रोड, भैरो मार्ग, दिल्ली गुड़गांव एक्सप्रेस वे और कुछ अन्य मार्ग पर यातायात जाम रहा। भैरो मार्ग पर पीक आवर में सामान्य दिनों की अपेक्षा स्थिति ज्यादा खराब रही। लोग गर्मी में बेहाल नजर आए। वहीं दिल्ली-गुड़गांव एक्सप्रेस-वे पर गाड़ियों की नंबर प्लेट की जांच और चालान कटने के कारण एंबियंस मॉल से महिपालपुर तक पर भारी जाम रहा।

इसके अलावा डीटीसी और क्लस्टर बसों में भी जबर्दस्त भीड़ दिखी। खासकर बुराड़ी और उत्तम नगर इलाकों में। सम-विषम का यह नजारा अतिरिक्त बसों की व्यवस्था के दावों और मेट्रो के फेरों में बढोतरी के बावजूद था। चिलचिलाती धूप और गर्मी से परेशान लोग सम-विषम की इस योजना से खासे परेशान नजर आए। मयूर विहार-फेज-एक से प्रतिदिन गुड़गांव जाने वाले अभिनव ने कहा, ह्यमुझे आज कार छोड़ कर टैक्सी किराए पर लेनी पड़ रही है। पांच गुना ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ रहा है, कहां से लाऊं इतने पैसे, मैं क्यों इतनी परेशानी झेलूं, सरकार दूसरी कार के पैसे देगी क्या।

नई दिल्ली के एक सरकारी दफ्तर में काम करने वाले धनराज ने कहा – आज मुझे साकेत से दफ्तर आने में सिर्फ 20 मिनट लगा क्योंकि इस रूट पर ट्रैफिक कम है, लेकिन मंगलवार (19 अप्रैल) को मुझे स्कूटर से आना पड़ेगा इस चिलचिलाती धूप में। मेट्रो से आना संभव नहीं क्योंकि घर से मेट्रो पहुंचने के लिए कोई उचित साधन नहीं।

वहीं स्कूली बच्चों और अभिभावकों के लिए भी सोमवार सम-विषम की परीक्षा का दिन रहा। निजी वाहन पर निर्भर कई अभिभावकों ने कारपूल की तो कई ऑटो का सहारा लेते आए। वहीं सुबह कई अभिभावक वक्त से पहले बच्चे को स्कूल छोड़ते नजर आए ताकि वह आठ बजे से पहले घर लौट सकें। मयूर विहार फेज-एक स्थित एक निजी स्कूल में बच्चे को छोड़ने आई रुचि ने झल्लाहट भरे स्वर में कहा- पहले पति बच्चे को छोड़ने आते और मैं लेने आती थी, लेकिन हमारे पास सम संख्या की कार है इसलिए आज मुझे आना पड़ा, सरकार अगर दूसरी कार के लिए पैसा और जगह दे तो हम योजना का स्वागत करेंगे। वहीं एक दूसरे अभिभावक ने कहा कि सरकार अगर इसे हर महीने लागू करती है तो यह सरासर नाइंसाफी होगी।

उधर, ओला-उबेर के खिलाफ कार्रवाई के आश्वासन के बाद आॅटो-टैक्सी चालकों की हड़ताल वापसी से उत्साहित दिल्ली सरकार सम-विषम के दूसरे चरण की योजना को सफल बनाने में सुबह से मशक्कत करती नजर आई। परिवहन मंत्री ने कहा-आॅड-ईवन की आज अग्निपरीक्षा है। पिछली बार की तरह हम सबको मिल कर इसे पास करने के लिए एक दूसरे का सहयोग करना है। लेकिन परिवहन मंत्री की गांधीगीरी और अपील के बावजूद विपक्ष के नेता ने नियम का उल्लंघन कर 3500 रुपए का चालान कटवाया।

आम जनता के भी बड़ी संख्या में चालान कटे। योजना के पहले चरण में जहां जोर जागरूकता और ऐच्छिक पालन पर था, वहीं इस बार सरकार उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर रही है। दोपहर दो बजे तक कुल 348 चलान काटे गए। पिछली बार योजना की शुरुआती दो दिनों में मात्र 479 चलान कटे थे, जबकि इस बार शुरुआत के दो दिनों में छुट्टियों के बावजूद 2300 चलान जारी हुए। सम-विषम के दौरान टैक्सी-आॅटो की मनमानी के मद्देनजर सरकार ने बयान जारी किया कि यदि तय रेट से ज्यादा पैसे लिए गए तो उनका परमिट रद्द कर सकते हैं लेकिन तमाम कार्रवाई और दावों के बावजूद सरकार कहीं न कहीं सार्वजनिक परिवहन को पटरी पर लाने में नाकाम दिख रही है।

दिन भर झल्लाते रहे लोग

* विपक्ष के नेता को मनाने परिवहन मंत्री सुबह ही विजय गोयल के घर गुलाब के फूल के साथ पहुंचे। लेकिन मंत्री की गांधीगीरी और अपील के बावजूद गोयल ने नियम का उल्लंघन कर 3500 रुपए का चालान कटवाया।

* गर्मी से बेहाल लोग चालान कटने और यातायात जाम से झल्लाते रहे। सम-विषम का यह नजारा अतिरिक्त बसों की व्यवस्था के दावों और मेट्रो के फेरों में बढ़ोतरी के बावजूद था।

* ऑटो-टैक्सी चालकों की हड़ताल वापसी से उत्साहित दिल्ली सरकार सम-विषम के दूसरे चरण की योजना को सफल बनाने में सुबह से मशक्कत करती नजर आई।

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