सम-विषम योजना: सड़कों पर खूब दिखे आटो और टैक्सियां, 475 से ज्यादा चालान

नए साल के पहले सोमवार को राजधानी में सम-विषम योजना का मिला-जुला असर दिखा। सुबह और शाम को मेट्रो व बसों में भीड़ दिखी, लेकिन दोपहर में आम तौर से कम यात्री ही नजर आए..

चालान काटते दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के सिपाही।

नए साल के पहले सोमवार को राजधानी में सम-विषम योजना का मिला-जुला असर दिखा। सुबह और शाम को मेट्रो व बसों में भीड़ दिखी, लेकिन दोपहर में आम तौर से कम यात्री ही नजर आए। मेट्रो के फेरे तो बढ़ाए गए लेकिन कुछ ज्यादा फायदा नहीं हुआ। मेट्रो में रात आठ बजे तक 22 लाख 85 हजार 887 लोगों ने सफर किया। यह संख्या औसत दिनों जितनी ही है। उधर, डीटीसी की बसों की संख्या भी बढ़ाई गई थी। कुछ लोगों ने कार पूल योजना को भी आजमाया। स्कूल बसों में चढ़ने से लोग हिचकिचाए। काफी संख्या में लोगों ने मोटरसाइकिल का उपयोग किया। आटो और टैक्सियां अधिक दिखे। जिससे कुछ जगहों पर जाम भी नजर आया। हालांकि ज्यादातर सड़कों पर यातायात का दबाव कम दिखा।

कुछ जगहों पर विषम नंबर की गाड़ियां भी फर्राटा भरती नजर आईं। पुलिस ने शाम चार बजे तक 475 लोगों के चालान काटे। नई दिल्ली, कश्मीरी गेट और चावड़ी बाजार सहित तमाम मेट्रो स्टेशनों के स्केलेटर एसएफसी गेटों की खराबी की कलई भी खुली। कुछ कंपनियों ने दफ्तर जाने वालों के लिए मुफ्त में कैब सेवा मुहैया कराई।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और गृह मंत्री सत्येंद्र जैन, परिवहन मंत्री गोपाल राय की कार से दफ्तर आए। जबकि उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया साइकिल से पहुंचे। कुछ मंत्रियों व नेताओं ने बसों से भी सफर किया। दिल्ली सरकार ने सम विषम योजना के सफल होने का दावा करते हुए कहा है कि इससे हवा के प्रदूषण में कमी दिखी है।  हालांकि इसके चलते हवा के प्रदूषण का स्तर घटा नजर नहीं आया। सुबह कम रहे प्रदूषण का दिन में स्तर बढ़ा देखा गया जो शाम आते तक कायम रहा। जबकि दिल्ली सरकार ने दावा किया है कि हवा में प्रदूषण का स्तर कम हुआ है।

मेट्रो ने 3192 नियमित फेरों के अलावा 70 अतिरिक्त फेरों का भी इंतजाम किया था। सुबह और शाम को ही मेट्रो में भारी भीड़ रही लेकिन दोपहर तक भीड़ सामान्य दिनों से भी कम हो गई थी। मेट्रो के एक स्टेशन मैनेजर ने बताया कि दिन की भीड़ पर निगरानी के लिए अलग-अलग स्टेशनों पर अफसरों को भेजा गया। एक अनुमान के मुताबिक पांच से सात फीसद ही भीड़ बढ़ी होगी।

लेकिन नई दिल्ली मेट्रो स्टेशन पर रेलवे स्टेशन की ओर निकलने वाले गेट पर स्केलेटर या लिफ्ट नहीं थी। लिहाजा बुजुर्ग यात्री खासे परेशान दिखे। इन यात्रियों क ो सामान के साथ ऊपर चढ़ने में मुश्किल हो रही थी। इसी तरह यहां लगे फेयर कलेक्शन गेट कई हैं, लेकिन काम दो से चल रहा था। इसके अलावा तमाम स्टेशनो पर टिकट काउंटर बनाए गए थे। लेकिन उनका उपयोग हो नहीं पाया। कश्मीरी गेट के भूमिगत स्टेशन के गेट नंबर चार की ओर भी सभी फेयर कलेक्शन गेट चालू नहीं थे। सिर्फ दो गेट चालू थे। विश्वविद्यालय मेट्रो स्टेशन पर तो दिन के समय साइकिल की मांग बढ़ गई। इसी तरह अक्षरधाम मेट्रो स्टेशन से निकल कर लोगों ने साइकिल किराए पर ले कर आगे सफर किया।

डीटीसी की बसों के अतिरिक्त इंतजाम किए गए थे। दिल्ली की परिवहन व्यवस्था का जायाजा लेने के बाद गोपाल राय ने मीडिया से बात की। उन्होंने दावा किया कि बसों की तादाद बढ़ाए जाने से लोगों को दिक्कत नहीं हुई। आगे जरूरत हुई तो और इंतजाम किए जाएंगे।

दिल्ली के आटो चालक मोहम्मद आबिद ने बताया कि ज्यादा लोग अभी भी निकले नही हैं। लोग कम आ रहे हैं मानो अभी भी छुट्टी की खुमारी नहीं उतरी। उन्होंने बताया कि जाम जरूर लग रहा है लेकिन वह पलिस के चेकिंंग पोस्ट के चलते है लेकिन वे कारों को नहीं आज बाइक वालों को ही ज्यादा रोक रहे हैं। जाकिर हुसैन कालेज के बाहर पुलिस का जांच अभियान जारी था। दिल्ली के आइटी सेक्टर में काम करने वाले व बीपीओ में काम करने वालों ने कार पूलिंग की। इसी तरह चांदनी चौक के व्यापारियों ने भी कार में साथ ही यात्रा की।

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