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Odd-Even-2: आज से लागू होने वाले सम-विषम फॉर्मूला में स्कूल वर्दी में बच्चों को ले जाने वालों को छूट

सम-विषम पार्ट-2 शुक्रवार से लागू है। सारी छूट और तैयारियां लगभग वही हैं जो 1 से 15 जनवरी तक लागू सम-विषम के दौरान थीं।

Author नई दिल्ली | Updated: April 15, 2016 12:35 AM
Odd Even, Odd Even in Delhi, Odd Even Scheme, Arvind kejriwal, Odd Even Kejriwal Govt, Auto Taxi Strike, Delhiदिल्ली की सड़कों पर भागती गाड़ियां। (File Photo)

सम-विषम पार्ट-2 शुक्रवार से लागू है। सारी छूट और तैयारियां लगभग वही हैं जो 1 से 15 जनवरी तक लागू सम-विषम के दौरान थीं। लेकिन एक बड़ा विषय जो इस बार की योजना से जुड़ा वह है बच्चों को स्कूल छोड़ने जाने वाली निजी वाहनों का, क्योंकि पिछली बार की तरह इस बार छुट्टियां नहीं है।

सरकार ने घोषणा तो कर दी कि जो कारें या चौपहिया वाहन स्कूल वर्दी में बच्चों को ले जा रहे हैं उन्हें छूट मिलेगी, लेकिन इस घोषणा से पहले कोई होमवर्क सरकार ने शायद नहीं किया। तभी तो छोटे-छोटे स्कूली बच्चों ने मुख्यमंत्री से सवाल कर डाला कि पापा उन्हें स्कूल छोड़ कर वापस कैसे आएंगे अगर आठ से ज्यादा बज गए। बच्चों और अभिभावकों के सवाल यह भी है कि दोपहर में पुरुष अभिभावक या पिता बच्चों को कैसे लेने जाएंगे, उनकी गाड़ी में उस समय तो स्कूल वर्दी में बच्चा नहीं होगा। इन सवालों के सामने सरकार ने हथियार डाल दिए और स्वीकार कर लिया कि वह इसका समाधान नहीं निकाल पाए।

इसके एवज में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री सभी ने कार-पूलिंग की सलाह दी और इसके फायदे गिनाए। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा, ‘हमने काफी सोचा लेकिन कोई हल नहीं समझ आया, कुछएक सुझाव थे कि स्कूल अपनी तरफ से स्टीकर दें, लेकिन इससे धांधली की आशंका थी इसलिए अमल में नहीं लाया जा सकता’।

लेकिन क्या मुख्यमंत्री जी बता पाएंगे कि कार-पूलिंग से कितने बच्चे आ सकेंगे। बच्चों के अभिभावक को तो जाना ही पड़ेगा क्योंकि सुरक्षा कारणों से स्कूल किसी दूसरे के हवाले बच्चे नहीं भेजते, न ही अभिभावक किसी और के साथ बच्चों को जाने देना पसंद नहीं करते। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा, ‘कार-पूलिंग से आपसी भाई-चारा बढेगा, पड़ोसियों के बीच जान-पहचान बढेगी’।

वहीं परिवहन मंत्री गोपाल राय ने कुछ एप्स गिनाए और कहा, ‘इसे स्मार्ट फोन पर डाउनलोड कर कार-पूलिंग के फायदे उठाएं’। परिवहन मंत्री ने जिन एप्स के नाम गिनाए वे हैं, पूछो-कार पूल, पूछो आॅटो, टैक्सी एप, और पूछो ड्राइवर। परिवहन मंत्री ने कहा कि कार-पूलिंग के लिए इन विकल्पों का उपयोग कर सकते हैं।

वैसे ये स्मार्ट चोचलों से गरीब जनता को तो कोई वास्ता नहीं, तभी स्कूटर से अपने बच्चे को स्कूल छोड़ने आए एक अभिभावक ने इस पत्रकार से पूछा कि मुख्यमंत्री यह कब बताएंगे कि जानलेवा मच्छरों से कबतक निजात मिलेगी, अभी गर्मी में प्रदूषण कम मच्छर ज्यादा हैं। अब यह तो पंद्रह दिनों के बाद ही पता चलेगा कि सरकार की कार-पूलिंग की सलाह को जनता ने कितना सिर – आंखों लिया।

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