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अब नर्सों की हड़ताल करेगी बेहाल

सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लेकर कर दिल्ली के 42 अस्पतालों की नर्सों ने अभी तक सरकार की ओर से कोई आश्वासन न मिलने से शुक्रवार से हड़ताल का एलान किया है।

Author September 2, 2016 2:08 AM

सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लेकर कर दिल्ली के 42 अस्पतालों की नर्सों ने अभी तक सरकार की ओर से कोई आश्वासन न मिलने से शुक्रवार से हड़ताल का एलान किया है। हड़ताल में एम्स को छोड़ कर केंद्र सरकार के सभी अस्पतालों की नर्सें भी शामिल होंगी। ऐसे समय में जबकि पूरी दिल्ली में डेंगू, चिकनगुनिया सहित तमाम मौसमी बीमारियों के मरीजों का तांता लगा है नर्सों की प्रस्तावित हड़ताल सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है।

फिर भी सरकार नर्सों की मांगे मानने के पक्ष में नहीं नजर आ रही है। स्वास्थ्य सचिव का कहना है कि हम बातचीत कर बीच का रास्ता निकालने की कोशिश कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने हड़ताल होने की सूरत में वैकल्पिक इंतजाम करने की बात भी कही है। इतना ही नहीं देश भर के रेडियोलॉजिस्टों ने लिंग परीक्षण निषेध कानून के कुछ प्रावधानों के खिलाफ गुरुवार से अनशन शुरू कर दिया है। दि इंडियन रेडियोलॉजी एंड इमैजिंग एसोसिएशन ने देश भर में अनशन का आह्वान किया है। कुल मिला कर स्वास्थ्य सेवा चरमराने की आशंका है।

आॅल इंडिया गवर्नमेंट नर्सेज फेडरेशन ने वेतन संबंधी विसंगतियों सहित कुल नौ मांगों को लेकर आंदोलन किया था। सुनवाई न होने पर बेमियादी अनशन की चेतावनी दी थी। बीच-बीच में आंदोलन हुए भी। फेडरेशन ने कहा है कि तब सरकार ने मांगें मानने की बात कहते हुए फाइल वित्त मंत्रालय के पास भेजने का भरोसा भी दिया था। लेकिन दिल्ली में ही नहीं देश भर की नर्सों ने खुद को ठगा हुआ महसूस किया जबकि केंद्र सरकार ने आश्वासन के बावजूद हमारी मांगों को दरकिनार रखते हुए वेतन आयोग क ी सिफारिशों के पूर्ववत प्रारूप को ही अंतिम मंजूरी दे दी।

लिहाजा नर्सों ने अपनी मांगो के समर्थन में शुक्रवार से बेमियादी अनशन की घोषणा की है। नर्सों ने सभी अस्पतालों में सुबह आठ बजे से अनशन का एलान किया है। इस दौरान वे अपने-अपने अस्पताल में धरना भी देंगीं। नर्सों ने कहा है कि एक ओर काम का बोझ कई गुणा ज्यादा बढ़ गया है दूसरी ओर हमारी सुनवाई नहीं हो रही है। इस बीच सरकार के एक अधिकारी ने बयान दिया है कि ऐसे में जबकि जलजनित बीमारियों के कारण अस्पतालों में मरीजों की भीड़ लगी है नर्सों की हड़ताल अपराध होगा। इस सरकारी बयान पर नर्सों का कहना है कि अगर स्थिति इतनी ही गंभीर है तो सरकार महामारी घोषित कर दे, हम हड़ताल नहीं करेंगे, मरीजों के हित मे काम करेंगे और अगर स्थिति नियंत्रण में है तो हमें अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए लोकतंत्रिक ढंग से लड़ने से कोई नहीं रोक सकता। नर्सों ने यह भी कहा है कि कल अस्पतालों में मरीजों को जो भी मुश्किल आएगी उसके लिए सरकार जिम्मेदार होगी।

इस हड़ताल में राममनोहर लोहिया, सफदरजंग, लेडी हार्डिंग, कलावती सरन, पटेल चेस्ट अस्पताल सहित दिल्ली सरकार के सभी अस्पतालों की करीब 25 हजार नर्सों के शामिल होने की संभावना है। उधर, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव सीके मिश्र का कहना है कि नर्सों की नौ में सात मांगें मान ली गई हैं। दो मांगों के लिए वित्त मंत्रालय से मंजूरी लेनी होगी। हमने फाइल वित्त मंत्रालय के पास भेज दी है। और अब गेंद वित्त मंत्रालय के पाले में हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि हम बातचीत जारी रखे हुए है। कोई न कोई रास्ता निकल आएगा। लेकिन सूत्रों के मुताबिक, सरकार का मानना है कि अब नर्सों के वेतन-भत्ते संबंधी मांग तो फिलहाल नहीं मानी जा रही है। लिहाजा शुक्रवार से नर्सों, व रेडियोलाजिस्टों की हड़ताल का स्वास्थ्य सेवा पर व्यापक असर होने की आशंका बनी हुई है।

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