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गुजरातः रिसाव के बाद बंद किए गए परमाणु रिक्टर , जा सकती थी लाखों लोगों की जान

गुजरात के काकरापार परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में चेचक के संक्रमण देखने को मिले हैं।
प्रतीकात्मक चित्र

परमाणु ऊर्जा संयंत्र को बेहद सुरक्षित माना जाता है। लेकिन गुजरात के काकरापार परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में चेचक के संक्रमण देखने को मिले हैं। इस गुत्थी को सुलझाने के लिए भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी) के वैज्ञानिक कड़ी मेहनत कर रहे हैं। किसी भी अनहोनी से बचने के लिए सभी संयंत्रों को कुछ समय के लिए बंद कर दिया है। वैज्ञानिक इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि रिसाव की मुख्य वजह क्या है। वैज्ञानिकों इस काम में एक साल से लगे हैं लेकिन अभी तक ये पता नहीं चल पाया है कि गड़बड़ी कहां हुई। इसमें खास बात ये है कि प्रयोगशाला है कि एक दिवार बॉलीवुड के मशहूर एक्टर राज कपूर के घर से लगती है।

इस परमाणु संयंत्र में 11 मार्च 2016 को सुबह एक इकाई में रिसाव शुरु हो गया, जिसके बाद 220 मेगावाट वाले इस रिएक्टर को बंद करना पड़ा। बता दें ऐसा ही रिसाव जापान के फुकुशिमा रिएक्टरों में भी पांच साल पहले दर्ज किया गया था। हालांकि भारतीय परमाणु ऊर्जा विभाग के अनुसार किसी काम करने वाले को संक्रमण ने अपनी चपेट में नहीं लिया है। भारतीय परमाणु संचालक न्यूक्लियर पॉवर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड ने बयान जारी करके कहा कि परमाणु रिएक्टर को सुरक्षित तरीके से बंद कर दिया गया है। सभी कर्मचारी सुरक्षित हैं।

इस पूरे मामले में परमाणु थ्रिलर जब शुरु हुआ तब परमाणु विशेषज्ञों ने यह पता लगाने की कोशिश की कि रिसाव प्रणाली विफल क्यों हुई और अलार्म क्यों नहीं बजा लेकिन कड़ी मेहनत के बाद भी वो इस बात का पता लगाने में नाकाम रहे। एआरबी अध्यक्ष एसए भारद्वाज ने कहा कि , “सभी पीएचडब्लूआरएस में रिसाव प्रणाली लगी है, लेकिन 11 मार्च, 2016 को रिसाव का पता लगाने में विफल रहे।” वॉचडॉग बॉडी को इस मामले में संदेह है कि रिसाव प्रणाली में दरार इतनी तेजी से विकसित हुई कि इलेक्ट्रॉनिक रिसाव का पता लगाने वाले तंत्र के पास समय नहीं रहा कि वो अलार्म बजा सके।

जांच में सामने आया कि एक रिएक्टर में जुलाई 2015 में भी एक ऐसा ही रिसाव हुआ था। हालांकि इस मामले में जांच का कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आ पाया है। इस पूरे मामले से इंजीनियर उलझन में हैं। एईआरबी ने इस मामले में आदेश दिया कि संपूर्ण असेंबली और प्रभावित ट्यूब सुरक्षित रूप से बाहर निकालकर इस पर विश्लेषण किया जाए। इसके लिए इसे भारत की प्रमुख परमाणु प्रयोगशाला बीएआरसी में भेजा जाए।

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