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करारी हार पर हाहाकार और विचार

बिहार विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के एक दिन बाद भाजपा और राजग में अंदरूनी खींचतान सोमवार को और तेज हो गई।

बिहार विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के एक दिन बाद भाजपा और राजग में अंदरूनी खींचतान सोमवार को और तेज हो गई। सोमवार को भाजपा संसदीय दल की बैठक में हार के नतीजों पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पार्टी के आला नेताओं से भेंट की और दल की नीतियों में सुधार और प्राथमिकताओं पर मशविरा किया व जरूरी हिदायतें दीं। पार्टी नेताओं ने महसूस किया बिहार में वे महागठजोड़ की ताकत को आंकने में नाकाम रहे।
सूत्रों ने कहा कि बिहार में हार के लिए भाजपा संसदीय बोर्ड ने संभवतया किसी को हार के लिए जिम्मेदार नहीं माना है। साथ ही उन नेताओं के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी जिनके बयानों को हार के लिए कसूरवार माना जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि नेताओं का मानना है कि बिहार चुनाव को लेकर उनका आकलन और अनुमान गलत साबित हुआ।

के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि इस हार से पार्टी के विकास एजंडे पर कोई असर नहीं पड़ेगा। अमित शाह के ‘पाकिस्तान में पटाखे फोड़े जाने’ वाले बयान से नुकसान होने की बात को भी खारिज करते हुए जेटली ने कहा, ‘एक बयान से चुनावों का फैसला नहीं हो सकता।’ बिहार विधानसभा चुनावों में करारी हार पर भाजपा की ओर से किए जा रहे मंथन के बीच जेटली ने स्वीकार किया कि चुनावों के दौरान दिए गए ‘गैर-जिम्मेदार बयानों’ ने विमर्श ही बदल दिया।

जेटली ने यह भी कहा कि दादरी कांड और कर्नाटक में तर्कवादी एमएम कलबुर्गी की हत्या जैसी घटनाएं ‘गलतियां’ थीं और भारत में ऐसा आम तौर पर नहीं होता । उन्होंने कहा कि इस बात का फर्क करना जरूरी है कि ऐसे अपराधों को कौन अंजाम दे रहा है और कौन सिर्फ ‘धड़ल्ले से बोले जा रहा है ।’ उन्होंने कहा, जब चुनाव लड़े जा रहे थे तो उस वक्त कुछ गैर-जिम्मेदाराना बयानों ने विमर्श को बदलकर रख दिया। जिम्मेदार लोगों से ऐसी अपेक्षा नहीं होती । मैंने यह सुनिश्चित करने के लिए बार-बार दखल दिया कि असल मुद्दे सामने आएं । उन्होंने कहा, जहां तक योजना की बात है, तो मेरा मानना है कि वे कुछ कारक हो सकते हैं। उनका बिहार पर कितना असर पड़ा, मैं वास्तव में नहीं जानता । वित्त मंत्री ने कहा कि राजग की हार का मुख्य कारण ‘विपक्ष की एकजुटता’ है । 243 सदस्यों वाले बिहार विधानसभा के चुनाव में भाजपा की अगुवाई वाले गठबंधन को महज 58 सीटें मिली जबकि महागठबंधन को 178 सीटें मिलीं।

यह पूछने पर कि क्या बिहार चुनाव केंद्र की नीतियों पर रायशुमारी थे, इस पर जेटली ने कहा, जनमत संग्रह शब्द का उपयोग बड़ी लापरवाही से होता है। हर चुनाव जनमत संग्रह नहीं होता है। किसी राज्य का चुनाव जनमत संग्रह नहीं होता । आप किसी एक मुद्दे पर चुनाव नहीं लड़ रहे। उन्होंने कहा कि भाजपा की मतों की हिस्सेदारी कम नहीं हुई है और महागठबंधन की जीत इसलिए हुई कि विभिन्न विपक्षी दल एकजुट हो गए ।

अरुण जेटली ने यह भी कहा कि इस उलटफेर से आर्थिक सुधार की प्रक्रिया प्रभावित नहीं होगी। उन्होंने कहा, मैं इसे अर्थव्यवस्था के लिए झटका नहीं मानता। ढांचागत सुधार प्रक्रिया बरकरार रहेगी। यह तेज रफ्तार के साथ बरकरार रहेगी। सुधार प्रक्रिया के संबंध में जेटली ने कहा कि सरकार अधिशासी पहलों और बजट प्रावधानों के जरिए इसे बरकरार रखेगी। अगला आम बजट फरवरी 2016 में पेश किया जाएगा। वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) विधेयक जैसे बड़े विधेयकों के अटके होने के संबंध में उन्होंने उम्मीद जताई कि बिहार खपत वाला राज्य है, इसलिए विधेयक का समर्थन करेगा। उन्होंने कहा- मुझे नहीं लगता कि बिहार चुनाव का नतीजा किसी भी तरह से अर्थव्यवस्था के लिए झटका है। अगर नीतिश कुमार के नेतृत्व में बिहार प्रगति करता है और अच्छी प्रगति करता है तो हमने पहले ही राज्य के लिए जिस आर्थिक पैकेज की घोषणा की है, उससे निश्चित तौर पर मदद मिलेगी। जेटली ने कहा कि हमारी सरकार उन राज्यों की अधिक मदद करने के लिए प्रतिबद्ध है जिन्हें विकास की जरूरत ज्यादा है।

भागवत के विवादित बयान पर उन्होंने कहा कि कि भाजपा ने अपनी स्थापना के समय से ही हमेशा यह बात कही है कि वे आरक्षण का समर्थन करते हैं और 1991 में मंडल आयोग की रपट के बाद यह स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा, हमने सामाजिक पिछड़ेपन के आधार पर आरक्षण की अवधारणा को स्वीकार किया है। मैं समझता हूं कि संघ का भी यही रुख है। इस बारे में कोई संशय नहीं होना चाहिए।

पार्टी के नेताओं के विवादास्पद बयानों के बारे में पूछने पर जेटली ने कहा कि सभी को गरिमा के साथ बोलना चाहिए। क्या भाजपा ने बिहार में किसी नेता को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार नहीं बनाकर गलती की, इस सवाल पर जेटली का कहना था कि ऐसा नहीं करने के लिए पार्टी के पास उचित रणनीतिक कारण थे। संसदीय दल की बैठक में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह, गृहमंत्री राजनाथ सिंह के अलावा सुषमा स्वराज, जेपी नड्डा, एम वैंकेया नायडू भी मौजूद थे।

उधर एनडीए के कुछ नेताओं ने बिहार में खराब प्रदर्शन के लिए आरएसएस प्रमुख के आरक्षण संबंधी बयान और दादरी हत्या व हरियाणा में दलितों की मौत पर विवादित टिप्पणियों को दोषी ठहराया। भाजपा के कुछ नेताओं ने पार्टी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा पर भी हमला बोला। दूसरी ओर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि गठबंधन की हार के कारणों में से एक भागवत का बयान भी है। मांझी की पार्टी हम (एस) राजग में शामिल है। मांझी ने कहा- एक कारण यह भी है कि इस प्रकार के बयान ऐसे समय नहीं आने चाहिए थे। लालू यादव ने चतुराई से टिप्पणी को तोड़-मरोड़ कर संबंधित समुदायों के सामने रखा। लालू ने जो कहा, बिहार के लोगों ने उस पर भरोसा किया।

मांझी ने कहा- हमने बाद में स्पष्टीकरण दिया। लेकिन लोगों ने हमारे स्पष्टीकरण पर भरोसा नहीं किया और ओबीसी व ईबीसी सहित आरक्षण के लाभार्थियों ने हमें छोड़ दिया। लोजपा महासचिव अब्दुल खालिक ने कहा कि भागवत के बयान ने यादव मतदाताओं को राजद प्रमुख लालू प्रसाद के पीछे एकजुट कर दिया, वहीं दादरी की घटना को उचित ठहराने वाले बयानों ने मुसलिमों को एकजुट कर दिया जिससे महागठबंधन की जीत हुई। उन्होंने कहा कि दादरी की घटना को, जो काफी दुर्भाग्यपूर्ण थी, उचित ठहराने वाले बयानों ने काफी नुकसान पहुंचाया। मुसलिम भय से एकजुट हो गए और सोच-समझ कर महागठबंधन के पक्ष में मत दिया।

इससे लोजपा को अपने गढ़ में भी नुकसान हुआ जहां उसे मुसलिम मत मिलते थे। बहरहाल, सोमवार को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात की। समझा जाता है कि बैठक के दौरान शाह ने अन्य बातों के अलावा भागवत के साथ बिहार चुनाव परिणामों के बारे में चर्चा की।

 

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