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‘कागजात छीन रहे जिंदगी की उम्मीद’ पश्चिम बंगाल के लोगों ने यूं बयां किया दर्द, NRC के डर से अब तक 11 की मौत का दावा

बंगाल में एनआरसी लागू होने की अफवाहों से परेशान लोग जान देने लगे हैं। नागरिकता साबित करने के कागजात बनवाना उनके लिए मुश्किल हो रहा है। दफ्तरों के बाहर लोगों की लंबी कतारें लगी हुई हैं।

प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो – सोर्स इंडियन एक्सप्रेस)

बंगाल में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) लागू होने की अफवाहों के बीच कई लोगों की जान देने और तनाव से बीमार पड़ने का सिलसिला भी शुरू हो गया है। परेशान लोग अपने कागजात दुरुस्त कराने के लिए दफ्तरों का चक्कर लगा रहे हैं। कुछ नसीब वाले हैं, जिनके काम हो गए, जबकि अधिकतर को निराशा ही हाथ लगी। आगे क्या होगा, इसको लेकर लोगों में बेचैनी है।

कागजात नहीं बनने की चिंता में गई जान  :  बसीरहाट के शोलादाना गांव का शौहर कमाल हुसैन मंडल (32) एक ईंट भट्ठे में काम करता था। तीस साल पहले उसके पिता की मौत हो चुकी है। वह पिछले दो हफ्ते से उनके नाम के भूमि के सभी कागजात पाने के लिए भूमि और पंचायत विभाग के स्थानीय दफ्तरों का चक्कर लगा रहा था, लेकिन नाकाम रहा। इससे वह डिप्रेशन में चला गया और खाना-पीना छोड़ दिया है। दिन-रात यही कहता रहा कि एनआरसी आ रही है और वह देश से भगा दिया जाएगा। शनिवार (21 सितंबर) की रात उसने टीवी पर बंगाल में एनआरसी लागू होने की नेताओं की चर्चा सुनी। अगले दिन 22 सितंबर को वह गांव में आम के एक पेड़ पर लटकता मिला। उसने फांसी लगा ली थी। उसकी बीवी खैरून और दो बच्चे अब सिर्फ रो रहे हैं।

पुलिस एनआरसी के लिहाज से कर रही जांच :  कमाल हुसैन का बड़ा भाई हसन का कहना है कि उसकी मौत से सब लोग अनाथ हो गए। परिवार में वही कमाकर पूरा घर चलाता था। सब लोग उसी पर निर्भर थे। उसको लगा कि वह परिवार नहीं बचा पाएगा, इसलिए उसने जान दे दी। मामले में पुलिस ने असामान्य मौत का केस दर्ज किया है। पुलिस अफसरों का कहना है कि आंतरिक जांच जारी है। वह एनआरसी के लिहाज से भी इस मामले की जांच कर रहे हैं।

परिवारों में भी तकरार :  तीन किमी दूर हिंगालगूंज थाना क्षेत्र में गाजीपारा की मोमेना बेवा (59) 1971 से पहले वाले भूमि संबंधित कागजात का पता करने के लिए 20 सितंबर को पड़ोस के बांकरा में रह रहे अपने भाई के घर गई थी, पर वहां उसे कुछ नहीं मिला। उसका बेटा मोइदुल (32) ने बताया कि इस मुद्दे को लेकर उसकी अपने भाई से तकरार भी हो गई, इससे वह बीमार पड़ गई। उसको अस्पताल ले जाया गया। वहां उसकी मौत हो गई। डॉक्टरों ने कहा कि उसको हॉर्ट अटैक आया है। स्थानीय विधायक देबेश मंडल परिवार वालों से मिले और मदद का आश्वासन दिया। पुलिस ने परिवार वालों का बयान रिकॉर्ड किया है। अपने कच्चे घर में प्लास्टिक शीट की छत के नीचे बैठा मोइदुल ने बताया कि उसे नहीं पता कि अब क्या होगा। परिवार में कुछ लोगों के पास आधार कार्ड भी नहीं है। मां के जाने के बाद अब कागजात कैसे मिलेंगे।

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चिंता में काम धंधा भी बंद :  22 साल की तोहमीना ने बताया कि तनाव के कारण तस्लीमा ने बीड़ी मजदूर के रूप में कमाई रोज की मजदूरी भी खो दी। इसको लेकर परिवार में अक्सर झगड़े होते रहते हैं।  25 सितंबर की दोपहर को इस तरह की लड़ाई के बाद मां बीमार पड़ गई। हम उसे बशीरहाट अस्पताल ले गए, जहां उसकी मौत हो गई। डॉक्टरों ने कहा कि उसे तेज हॉर्ट अटैक आया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने भी परिवार वालों को बताया कि वे जांच कर रहे हैं कि मौत की वजह NRC से फैली घबराहट है या कुछ और है।

दलाल भी सक्रिय : इस बीच एनआरसी को लेकर कई लोग दलाली भी शुरू कर दिए  हैं। दो किमी दूर बरुनहाट रामेश्वरपुर ग्राम पंचायत कार्यालय में कागजात बनवाने वालों की लंबी लाइन लगी हुई थी। यहां पर कई दलाल ऐसे पहुंचे जो लोगों से बोले -आप लोग चिंता न करें। हम सभी कागजात बनवा देंगे। लोगों ने उन्हें पैसे दिए और वे फरार हो गए। यानि उन्होंने भी उन्हें ठगा। चुनाव आयोग का सर्वर धीमा होने की वजह से दफ्तरों में कागजात निकलने में घंटों लग जाता है। इससे लाइन में लगे लोगों को सुबह से शाम तक वहां खड़े रहना पड़ता है। इसके बाद भी तय नहीं है कि काम होगा कि नहीं। हालांकि इस दौरान फोटो कॉपी करने वाले और प्रिंटआउट निकालने वाले साइबर केफों के संचालकों का काफी फायदा हो रहा है।

 

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