ताज़ा खबर
 

अब नहीं होगी इटावा के आलू की बर्बादी

सब्जियों के राजा आलू के प्रमुख उत्पादक उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में आलू की बंपर पैदावार का सदुपयोग करने के लिए खाद्य प्रसंमस्करण इकाई लगाए जाने की तैयारी चल रही है।

Author इटावा | January 20, 2018 01:38 am

सब्जियों के राजा आलू के प्रमुख उत्पादक उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में आलू की बंपर पैदावार का सदुपयोग करने के लिए खाद्य प्रसंमस्करण इकाई लगाए जाने की तैयारी चल रही है। इटावा के मुख्य विकास अधिकारी पीके श्रीवास्तव ने आज यहां बताया कि ऐसे प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे आलू बर्बाद न हो और किसानों को उचित दाम मिल सके। उन्होंने बताया कि कुछ कोल्ड स्टोरेज वाले खाद्य प्रसंस्करण इकाई लगाने के लिए तैयार हो रहे हैं और जल्द ही इस दिशा में बात आगे बढ़ेगी। इस यूनिट के लग जाने से आलू उत्पादकों को काफी सुविधा हो जाएगी। किसानों को भी उचित मूल्य मिलने लगेगा। इटावा की गिनती प्रदेश के बड़े आलू उत्पादक क्षेत्रों में होती है। यहां लगभग साढ़े पांच लाख मीट्रिक टन आलू हर साल पैदा होता है। लेकिन इसका उपयोग न हो पाने के कारण आलू बर्बाद होता है। सड़कों पर फेंका जाता है और किसानों को आलू की लागत के बराबर भी मूल्य नहीं मिल पाता है। इसको गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने आलू के सदुपयोग के लिए खाद्य प्रसंस्करण इकाई लगाने के लिए लोगों को प्रेरित करने का काम किया है।

इस संबंध में पिछले दिनों कायर्शाला हुई थी, जिसमें प्रदेश के कृषि मंत्री रणवेंद्र प्रतार्प सिंह आए थे। उन्होंने कहा था कि जिले के कोल्ड स्टोरेज संचालक मिल कर फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगा सकते हैं इसमें सहयोग किया जाएगा। इसके बाद कोल्ड स्टोरेज के मालिकों ने ने फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाने का मन बनाया है। इटावा जिले से आलू की बंपर पैदावार को देखते हुए उसके निर्यात के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। इस संबंध में जनवरी की शुरुआत में एक कायर्शाला भी लगाई गई थी। इस कायर्शाला में निर्यात प्रोत्साहन ब्यूरो के अधिकारी आए थे। निर्यात करने वाले कुछ व्यापारी भी बुलाए गए थे। इस संबंध में अभी प्रयास जारी हैं ताकि आलू का निर्यात किया जा सके। इटावा जिले में आलू के व्यापार से जुड़े लोगों को बीते तीन साल से करारा घाटा झेलना पड़ रहा है। बीते साल करीब एक अरब रुपए का घाटा हुआ है। इस साल भी हालात जस के तस होने से घाटा होने के आसार नजर आ रहे हैं। इटावा जनपद में बीते साल करीब 18 हजार हेक्टेयर में 5 लाख 40 हजार मीट्रिक टन आलू का उत्पादन हुआ, इसमें करीब 80 हजार मीट्रिक टन आलू बर्बाद हुआ। आलू उत्पादन में इटावा जनपद अग्रणी है, बीते साल जिले के 54 शीतगृहों में करीब 4 लाख मीट्रिक टन आलू का भंडारण किया गया। पूवोत्तर राज्यों में आलू का उत्पादन होने से वहां इस क्षेत्र के आलू की खपत नहीं रही, इसके अलावा मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ सहित अन्य कई प्रांतों में भी मांग निरंतर कम हो रही है। इससे आलू की मांग न होने से करीब 80 हजार मीट्रिक टन आलू शीतगृहों में रह गया, शुरुआत में शीतगृह मालिकों ने निशुल्क आलू बांटा, इसके बाद बचने पर सड़कों पर फेंका गया।

सब्जी एसोसिएशन के अध्यक्ष नौशे भाई का कहना है कि किसान, शीतगृह स्वामी, आढ़तिया और व्यापारी बीते तीन सालों से घाटा झेल रहे हैं। इस साल करीब एक अरब रुपए का घाटा है, इस साल भी घाटा ही नजर आ रहा है। छोटे किसान तो लागत मूल्य से थोड़ा लाभ पाकर बच जाते हैं। संपन्न किसान और व्यापारी शीतगृह में भंडारण करते हैं। बाहरी प्रांतों में मांग न होने और सितंबर-अक्तूबर में पंजाब-हरियाणा से नया आलू आ जाने से आलू शीतगृहों में ही रह जाता है। इटावा जिला उद्यान अधिकारी राजेंद्र कुमार साहू का कहना है कि भंडारण का महज पांच फीसद आलू शीतगृहों में रह गया जिसे जमीन में दबाया गया। आलू की पूर्वोत्तर राज्यों में पैदावार होने से यह स्थिति है। जब तक जनपद में आलू से संबंधित उद्योग स्थापित नहीं होगा तब तक हालात सुधरेंगे नहीं। इसलिए किसानों को आलू का उत्पादन कम करना चाहिए। बीते साल की तुलना में इस साल करीब एक हजार हेक्टेयर भूमि में आलू का उत्पादन नहीं किया गया है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App