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‘दिल्ली एक केंद्रशासित राज्य है और केजरीवाल केंद्रशासित राज्य की अवधारणा खारिज कर रहे हैं’

दिल्ली सरकार के अनेक अधिकारियों का मानना है कि दिल्ली सरकार के फैसलों से दिल्ली में संवैधानिक संकट खड़ा होने लगा है।

Author नई दिल्ली | June 9, 2016 1:22 AM
आम आदमी पार्टी के प्रमुख और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल। (फाइल फोटो)

सरकार बनने के दिन से जारी आम आदमी पार्टी (आप) और उपराज्यपाल के माध्यम से केंद्र सरकार की लड़ाई अब आर-पार का रुख अख्तियार कर चुकी है। दिल्ली सरकार के एक आला अधिकारी का कहना है कि संसद और सुप्रीम कोर्ट की नाक के नीचे ही संवैधानिक संकट बढ़ता जा रहा है। जो कानून में नहीं, वही आप सरकार करने पर आमादा है। हद तो यह हो गई है कि जवाब तलब करने पर भी दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने लगे हैं।

दिल्ली केंद्रशासित राज्य है, उसके अधिकारियों की नियुक्ति से लेकर सेवाशर्तें केंद्रीय गृह मंत्रालय तय करता है। आइएएस अधिकारी तो मूल रूप से केंद्र सरकार के नियंत्रण में होते हैं। यह विधान है कि जो पद आइएएस कैडर के लिए स्वीकृत हैं उन पर केंद्र सरकार की इजाजत के बिना तीन महीने से ज्यादा गैर आइएएस तैनात हो ही नहीं सकता है। आइएएस और दानिक्स अफसरों से विवाद के बाद तो दिल्ली सरकार ने कुछ चुनिंदा पदों पर स्थाई रूप से गैर आइएएस को बैठा दिया है। जिसकी जानकारी तक केंद्र को नहीं दे रहे हैं। जानकारी मांगने को प्रधानमंत्री की ओर से जासूसी कराए जाने का आरोप लगा रहे हैं।

ताजा विवाद भारतीय रेल इंजीनियरिंग सेवा के अधिकारी एसके नगरवाला का है। उन्होंने दिसंबर में अध्ययन अवकाश लेकर दिल्ली सरकार में अवैतनिक काम करना शुरू कर दिया। विवाद इसके बाद हुआ कि वे स्वास्थ्य मंत्री सतेंद्र जैन की ओर से नोट बनाने लगे। दिसंबर में दो दानिक्स अधिकारियों के विवाद में यह बात सामने आई कि यह नोट्स नगरवाला के लिखे हुए हैं। इसके बाद उपराज्यपाल ने 26 फरवरी को प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव नृपेंद्र मिश्र को पत्र लिख कर इस बारे में जानकारी मांगी और कार्रवाई करने का आग्रह किया। इस आधार पर ही मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने यह आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री दिल्ली सरकार के मंत्रियों की जासूसी करवा रहे हैं।

इसके साथ आइएएस अफसरों के कैडर पदों पर गैर आइएएस की नियुक्ति के बारे में जब गृह मंत्रालय ने दिल्ली सरकार से जवाब मांगा तो उन्होंने जवाब देने के बजाए केंद्र सरकार में ही दो साल में तैनात इस तरह के अफसरों का ब्योरा मांग कर नया विवाद खड़ा कर दिया। दिल्ली में 58 आइएएस के कैडर पद से ज्यादा कुल 93 अधिकारी तैनात हैं। फिर भी अनेक कैडर पदों पर गैर आइएएस तैनात किए गए हैं। यह पहली बार है जब सचिव स्तर के पदों पर गैर आइएएस तैनात किए गए हैं। इंजीनियरिंग सेवा के अधिकारी सर्वज्ञ श्रीवास्तव लोेक निर्माण विभाग के प्रमुख हैं, तो डाक्टर तरुण सेन स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख, सुकेश जैन सतर्कता विभाग के प्रमुख समेत करीब दर्जन भर आइएएस कैडर के पदों पर गैर आइएएस बैठाए गए हैं।

इतना ही नहीं धर्मेंद्र शर्मा, संजीव कुमार और विजय देव जैसे वरिष्ठ अधिकारी तैनाती के इंतजार में हैं। जबकि इस बारे में विधान साफ है कि दिल्ली में किसी भी राज्य में तीन महीने से ज्यादा समय तक गैर आइएएस तभी तैनात रह सकता है जब इसके लिए केंद्र सरकार अनुमति दे। अनुमति मांगना तो दूर दिल्ली सरकार इस बारे में जानकारी देने को भी तैयार नहीं है।

दिल्ली सरकार के अनेक अधिकारियों का मानना है कि दिल्ली सरकार के फैसलों से दिल्ली में संवैधानिक संकट खड़ा होने लगा है। वहीं दिल्ली सरकार के अधिकार पर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई पर फैसला न आने से भी अराजक माहौल बन रहा है। अनेक बिल विधानसभा में बिना केंद्र सरकार की इजाजत के पास होकर केंद्र के पास लंबित पड़े हैं। लेकिन केजरीवाल और उनके साथी यह स्वीकार ने को तैयार ही नहीं हैं कि वे केंद्रशासित राज्य की सरकार चला रहे हैं।

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