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गरीबों के लिए आसान हुआ विकृत चेहरे का इलाज

ऐसे मरीजों का आर्थोग्नेटिक सर्जरी से इलाज कर उन्हें पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए निजी अस्पतालों में चार से पांच लाख रुपए तक का खर्च आता है, जिसे मध्यमवर्गीय या गरीब परिवार नहीं उठा पाते। एम्स में ऐसे ही मरीजों का इलाज मुफ्त में या चार से पांच हजार रुपए में किया जाता है।

Author November 27, 2018 8:25 AM
तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (Image Source: pixabay)

टेढ़ा मुंह, टेढ़ी नाक या होंठ ठीक करवाना या फिर नैन-नक्श तीखे करवाना काफी खर्चीला काम है इसीलिए अब तक सिर्फ धनवान लोग ही लाखों-करोड़ों रुपए खर्च कर यह सुविधा उठा पाते थे। फैशन के नाम पर भी चेहरे या शरीर के किसी अन्य अंग का आकार ठीक कराने या उसे आकर्षक बनाने के लिए भी समर्थ लोग काफी पैसे खर्च कर देते हैं, लेकिन बड़े पैमाने पर ऐसे गरीब और आम लोग भी हैं जिनके जबड़े या मुंह टेढ़ा-मेढ़ा होने के कारण उन्हें काफी दिक्कतें होती हैं। इसके कारण युवाओं को जीविका के लिए रोजगार नहीं मिल पाता और समाज भी उन्हें तिरस्कृत करता है। इस तरह की विकृति के कारण सबसे ज्यादा परेशानी लड़कियों को होती है क्योंकि ऐसी लड़कियों को कोई नहीं अपनाना चाहता। जन्मजात या किसी दुर्घटना के कारण मिली इस तरह की विकृति के कारण वे सामान्य जीवन जीने के लिए भी मोहताज हो जाती हैं। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में इस तरह की विकृतियों का मुफ्त में होने वाला इलाज ऐसे ही गरीबों के लिए उम्मीद की किरण बन गया है।

एम्स के दंत चिकित्सा केंद्र में ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल विभाग के अध्यक्ष डॉ अजय रायचौधरी ने बताया कि देशभर में ऐसे मरीज भारी संख्या में हैं जिनका मुंह आनुवंशिक कारणों, बीमारी, दुर्घटना या दूसरी वजह से टेढ़ा हो जाता है जबड़े बाहर निकल आते हैं। जबड़ा टेढ़ा होने के कारण वे न तो सही से बोल पाते हैं और न ठीक से कुछ खा पाते हैं। ऐसे में उनको रोजगार भी नहीं मिलता और मिलता भी है तो योग्यता के अनुरूप नहीं। ऐसे लोग सामाजिक रूप से उपेक्षा का शिकार होते हैं और मुख्यधारा से कट जाते हैं, जिसके कारण उनका आत्मविश्वास भी खत्म हो जाता है। डॉ रायचौधरी बताते हैं कि ऐसे मरीजों को शादी-ब्याह के मामले में भी सामजिक तौर पर अघोषित बहिष्कार झेलना पड़ता है।

लड़कियों के मामले में यह स्थिति ज्यादा खराब है। कई लड़कियां तो खुद को नकारे जाने के सदमे से आत्महत्या करने का प्रयास तक करती हैं या अवसाद में चली जाती हैं। ऐसे मरीजों का आर्थोग्नेटिक सर्जरी से इलाज कर उन्हें पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए निजी अस्पतालों में चार से पांच लाख रुपए तक का खर्च आता है, जिसे मध्यमवर्गीय या गरीब परिवार नहीं उठा पाते। एम्स में ऐसे ही मरीजों का इलाज मुफ्त में या चार से पांच हजार रुपए में किया जाता है। वे बताते हैं कि एम्स में आने वाले ऐसे मरीजों की तादाद काफी अधिक है। लेकिन देशभर के गरीबों का इलाज एम्स में भी संभव नहीं है लिहाजा एम्स में हुए दो दिन के सम्मेलन में अन्य डॉक्टरों को भी इस इलाज का प्रशिक्षण दिया गया ताकि वे एम्स के बाहर भी मरीजों को इस इलाज के जरिए बेहतर जिंदगी जीने का मौका दे सकें।

डॉ रायचौधरी ने बताया कि इस इलाज में तीन आयामी चित्र के जरिए मॉडल तैयार किया जाता है। उस पर मैक्सिलोफेशियल सर्जन (डॉक्टर) को पहले अभ्यास कराया जाता है। इसके बाद मुंह व जबड़े की हड्डी काटकर टेढ़े हुए मुंह की जगह लगा कर या जबड़े को ऊपर उठा कर उसे ठीक किया जाता है। मुंह के इस इलाज को करेक्टिव जॉ सर्जरी भी कहते हैं। इससे क्लिफ्ट लिप एंड पैलेट यानी जन्मजात तालू कटे होने वाले बच्चों का भी इलाज किया जाता है। मुंह के इस इलाज को प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना के तहत भी कवर किया जा रहा है।

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