यमुना शहर के निवेशकों के लंबे समय से सुस्त पड़े हौसले अब हवाई अड्डे के उद्घाटन की तारीख तय होने के बाद बढ़ने लगे हैं। जानकारों का मानना है कि भले ही जमीन पर कीमतों में तेजी और खरीद-फरोख्त में कुछ समय लगे, लेकिन गत शुक्रवार को यमुना औद्योगिक एवं विकास प्राधिकरण (यीडा) बोर्ड की 89वीं बैठक में सभी संपत्तियों की दरों में 3.58 फीसद की वृद्धि कर इसका आगाज कर दिया है।
यहां तक कि 16 समूह आवासीय भूखंड योजना, जिसमें पहले आवेदकों की संख्या कम होने के कारण प्रतिस्पर्धा नहीं बन पाई थी, अब इस बढ़ोतरी के बाद अधिक प्रतिस्पर्धात्मक हो सकती है। यीडा अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, लंबे समय से भूमि अधिग्रहण के ठप रहने की वजह से नए सेक्टरों को विकसित करने में लंबा समय लगेगा।
पूर्व में जिस भू उपयोग की जमीन का अधिग्रहण किया गया, उनकी योजनाएं निकाली जा सकती हैं। ऐसे में टाउनशिप परियोजना के काफी पहले दस भूखंड आबंटित है, उसके अलावा टाउनशिप परियोजना के लिए हालिया कोई भूखंड उपलब्ध नहीं है। इसी तरह समूह आवास (ग्रुप हाउसिंग) के कुछ ही भूखंड आबंटन के लिए शेष हैं। बता दें कि अप्रैल 2025 में ही यीडा ने समूह आवास योजना भूखंड की दरों में करीब 66 फीसद की बढ़ोत्तरी की थी। जिसके बाद ज्यादातर भवन निर्माताओं ने बहुत ज्यादा दर बताकर योजना में आवेदन करने से पहरेज कर दिया था।
नतीजतन कई बार निकाले जाने के बाद भी ज्यादातर भूखंडों में आवेदन नहीं आए थे। हालांकि फरवरी 2026 में 16 भूखंडों वाली इस योजना के तीन आवासीय भूखंड आरक्षित मूल्य 106.11 करोड़ रुपए के सापेक्ष 189 करोड़, तकरीबन 83 करोड़ रुपए अधिक की बोली पर बिकने पर अधिकारियों को आने वाले दिनों में और अधिक कीमत मिलने की उम्मीद बंधी। जिसके चलते यीडा बोर्ड ने गत शुक्रवार को 52,500 रुपए से बढ़ाकर 54,380 रुपए प्रति वर्ग मीटर कर दिया।
एक करोड़ से कम का फ्लैट मिलना होगा मुश्किल
संपत्ति कारोबारी मयंक कटारा ने जनसत्ता से बातचीत में बताया कि यमुना सिटी में आने वाले दिनों में जमीन के भाव फिर से आसमान छूएंगे। 55 से 60 हजार रुपए वर्ग मीटर की दर पर जमीन खरीदने पर फ्लैट की कीमत कम से कम एक करोड़ के आसपास पहुंचेगी। हालांकि हवाई अड्डे के बनने के शुरुआती दौर में ही यहां जमीन की कीमत बहुत जल्द तेजी से बढ़ी थी।
नक्शा मंजूरी से पहले 20 फीसद बकाया रकम जमा करानी होगी
सेक्टर-150 स्थित स्पोर्ट्स सिटी परियोजना के एससी-2 भूखंड पर लगी रोक को नोएडा प्राधिकरण ने हटा दिया है। प्राधिकरण ने यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुपालन में लिया है। अब भवन निर्माताओं द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले मानचित्र और इमारतों के नक्शों को सशर्त मंजूरी दी जाएगी। हालांकि, इसके लिए कुछ महत्वपूर्ण शर्तें तय की गई हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य होगा। प्राधिकरण के अनुसार, सबसे अहम शर्त यह है कि संबंधित बिल्डर को परियोजना पर बकाया कुल देनदारी का कम से कम 20 फीसद पहले जमा करना होगा। इस राशि के जमा होने के बाद ही मानचित्र और भवन नक्शों को मंजूरी दी जाएगी।
अधिकारियों का कहना है कि इस व्यवस्था से परियोजना को वित्तीय रूप से सुरक्षित बनाया जा सकेगा और निर्माण कार्य को गति मिलेगी। खरीदारों के हितों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्राधिकरण ने एक और अहम कदम उठाया है। परियोजना के पूरा होने तक इसमें शामिल विभिन्न विकासकर्ताओं (सब-लीजी) के 20 फीसद फ्लैट या अन्य उपयोग वाली जगह को प्राधिकरण अपने पास बंधक के रूप में रखेगा। इससे निर्माण कार्य समय पर पूरा होने और किसी प्रकार की देरी या धोखाधड़ी की संभावना कम होने की उम्मीद जताई गई है।
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