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जल्द ही स्मार्ट स्ट्रीट लाइट से जगमगाएगा नोएडा

नोएडा में 74 हजार स्ट्रीट लाइटें लगी हुई हैं। ये लाइटें रोजाना शाम से अगले दिन तड़के तक जलती हैं। ज्यादातर स्ट्रीट लाइटों में सोडियम वेपर लैंप का इस्तेमाल हो रहा है। प्रत्येक पाइंट के आधार पर प्राधिकरण, बिजली विभाग को भुगतान करता है।

Author Updated: March 28, 2018 5:19 AM
पारदर्शी व्यवस्था के तहत सड़कों की चौड़ाई के आधार पर रोशनी के मानक तय किए गए हैं।

आशीष दुबे

औद्योगिक नगर नोएडा, अब स्मार्ट स्ट्रीट लाइट से रोशन होगा। एनर्जी सेविंग (बिजली बचत) की इस महत्त्वाकांक्षी परियोजना पर पुणे की तर्ज पर शहर में लगी सभी 74 हजार स्ट्रीट लाइटों को एलईडी में तब्दील किया जाएगा। इससे ना केवल उच्च गुणवत्ता वाली रोशनी मिलेगी बल्कि बिजली का भी खर्च तकरीबन आधे से कम हो जाएगा। स्मार्ट स्ट्रीट लाइट के साथ अत्याधुनिक निगरानी तंत्र (कंट्रोल्ड मोनीटरिंग सिस्टम) शिकायत या स्ट्रीट लाइट के खराब होने पर लोगों का सीधा रखरखाव करने वाली एजंसी से संपर्क स्थापित करेगा।
सिटीजन ऐप, टोल फ्री नंबर के माध्यम से यह सुविधा लोगों के हाथ होगी। आइआइटी रुड़की परियोजना का एनर्जी ऑडिट करेगी। नोएडा प्राधिकरण के मुताबिक टाटा प्रोजेक्ट्स अप्रैल से परियोजना पर काम शुरू करेगा।

एक साल के भीतर सभी मौजूदा स्ट्रीट लाइटों को एलईडी से बदलना होगा। सात साल तक रखरखाव और अनुरक्षण कार्य भी यही कंपनी करेगी। आंकलन के मुताबिक सात साल के भीतर मौजूदा स्ट्रीट लाइट (सोडियम वेपर लैंप) पर करीब बिजली विभाग को 506 करोड़ रुपए का भुगतान करना होगा जबकि एलईडी में तब्दील होने पर यह खर्च तकरीबन आधा रह जाएगा। मौजूदा स्ट्रीट लाइटों को उतारने, एलईडी में बदलने, कंट्रोल्ड मोनीटरिंग सिस्टम समेत ऐप और टोल फ्री नंबर की व्यवस्था का खर्च भी एजेंसी वहन करेगी जबकि बिजली खर्च में होने वाली बचत का 10 फीसद हिस्सा भी लाभ के रूप में नोएडा प्राधिकरण को मिलेगा।

नोएडा में 74 हजार स्ट्रीट लाइटें लगी हुई हैं। ये लाइटें रोजाना शाम से अगले दिन तड़के तक जलती हैं। ज्यादातर स्ट्रीट लाइटों में सोडियम वेपर लैंप का इस्तेमाल हो रहा है। प्रत्येक पाइंट के आधार पर प्राधिकरण, बिजली विभाग को भुगतान करता है। स्ट्रीट लाइटों का भुगतान मीटर के बजाए पाइंट के आधार पर किए जाने से कितनी देर बिजली गुल रही या लाइट खराब होने की वजह से नहीं जली, इसका कोई ब्योरा नहीं होता है। सभी स्ट्रीट लाइटों को सही स्थिति और पूरी रात जलने योग्य मानकर एकमुश्त बिजली विभाग को भुगतान करने का प्रावधान है। प्रभावी निगरानी तंत्र के अभाव में लंबे समय तक खराब स्ट्रीट लाइटें बदल नहीं पाती हैं। जो लाइटें जलती भी हैं, उनकी रोशनी (फोकस) इतना कम होता है कि सड़क पर रोशनी ना के बराबर होती हैं।
पुणे की तर्ज पर नोएडा में भी लाइट परियोजना

नोएडा प्राधिकरण के इलेक्ट्रिकल एंड मेंटिनेंस (ई एंड एम) विभाग के परियोजना अभियंता आरपी सिंह ने बताया कि पुणे की तर्ज पर नोएडा में स्मार्ट स्ट्रीट लाइट परियोजना तैयार की गई है। टाटा प्रोजेक्ट्स को इस महत्त्वाकांक्षी परियोजना को नोएडा में पूरा करेगी। यह कंपनी एक साल में चरणबद्ध तरीके से मौजूदा स्ट्रीट लाइटों को एलईडी में बदलेगी। साथ ही विश्व स्तरीय मानक के आधार पर तार, लाइन आदि बिछाएगी।

सड़कों के आधार पर तय हुए मानक

पारदर्शी व्यवस्था के तहत सड़कों की चौड़ाई के आधार पर रोशनी के मानक तय किए गए हैं। ए वर्ग की महत्त्वपूर्ण चौड़ी सड़कों पर रोशनी का 30-35 लक्स निर्धारित किया गया है। 18, 12 व 9 मीटर चौड़ी सड़कों के लिए 18 लक्स और पार्क समेत अन्य कम चौड़े मार्गों पर रोशनी का मानक 8 लक्स निर्धारित किया गया है। नियमित तौर पर रोशनी की गुणवत्ता की संयुक्त जांच कर ब्योरा तैयार किया जाएगा। जानकारों के मुताबिक बिजली की खपत में कमी से कार्बन क्रेडिट का भी फायदा मिलेगा।

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