नोएडा में निजी बसों की बेहतर सुविधाओं और चकाचौंध के सामने यूपी रोडवेज की साख कम हो रही है, जिससे सरकारी बसों में यात्रियों की संख्या में कमी आई है। परमिट उल्लंघन के बावजूद निजी बसें यात्रियों को आकर्षित कर रही हैं, जबकि रोडवेज बसें सुविधाओं के अभाव में पिछड़ रही हैं।

इसका ताजा उदाहरण नोएडा डिपो के आंकड़ों में दिखता है। वर्ष 2025 में बेड़े में 30 से अधिक नई बसें शामिल की गईं और कुल बसों की संख्या बढ़कर 188 हो गई, फिर भी यात्रियों की संख्या घट गई। वर्ष 2024 में जहां 10,50,388 यात्रियों ने सफर किया था, वहीं 2025 में यह संख्या घटकर 10,17,781 रह गई।

यात्रियों की कमी का सीधा असर आय पर पड़ा। वर्ष 2024 में डिपो को 12,16,23,725.7 रुपये का राजस्व मिला था, जो 2025 में घटकर 11,81,08,948.1 रुपये रह गया। सवाल उठता है कि बसें बढ़ीं तो कमाई और यात्री क्यों घटे?

जानकारों के अनुसार, इसके पीछे कई कारण हैं। बसों का रखरखाव संतोषजनक नहीं है, सीटों की स्थिति खराब है और समय की पाबंदी नहीं रहती। किराया भी एक बड़ी वजह बनकर सामने आया है।

नोएडा से आगरा मार्ग पर निजी बसें जहां करीब 200 रुपये लेती हैं, वहीं रोडवेज का किराया 300 रुपये से अधिक है। ऐसी ही स्थिति कई अन्य रूटों पर भी है। ऐसे में यात्री बेहतर सुविधा और कम किराए के कारण निजी बसों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

कई बार बसें खाली ही होती हैं रवाना

नोएडा डिपो के एआरएम रोहिताश कुमार ने बताया कि बस अड्डे पर सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं लेकिन यात्रियों की संख्या उम्मीद से कम है। कई बार बसों को खाली ही रवाना करना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि विभाग कनेक्टिविटी सुधारने के विकल्पों पर विचार कर रहा है। यात्रियों को कोई परेशानी न हो, इसका ख्याल डिपो प्रबंधन की ओर से रखा जाता है। आगे भी यात्रियों की संख्या को कैसे बढ़ाया जाए इसपर ध्यान दिया जाएगा।

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यूपीएसआरटीसी की बसों में प्रतिष्ठित लोगों के फ्री बस यात्रा की सुविधा भी दी जाती है। इसका सारा का सारा खर्च सरकार के विभागों के द्वारा उठाया जाता है। यहां पढ़िए पूरी रिपोर्ट