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नोएडा में अवैध होर्डिंग की संख्या में हुआ इजाफा, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा

हाल ही में एक हादसे में मोटर साइकिल सवार एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई थी। जबकि गंभीर रूप से घायल दूसरे की इलाज के दौरान मौत हो गई थी।

नोएडा | June 15, 2016 3:10 AM
प्रतीकात्मक फोटो

पिछले दिनों शहर के सबसे व्यस्त मार्ग एमपी-2 पर सेक्टर- 18 के पास तेज आंधी के चलते गिरे होर्डिंग मामले की जांच को किसी नतीजे तक पहुंचाना प्राधिकरण अफसरों के लिए मुश्किल साबित हो रहा है। इस हादसे में मोटर साइकिल सवार एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई थी। जबकि गंभीर रूप से घायल दूसरे की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। एकाएक गिरे होर्डिंग के चलते प्राधिकरण की नाकामी साबित हुई थी और प्राधिकरण के उप मुख्य कार्यपालक अधिकारी सौम्य श्रीवास्तव ने मामले की जांच की जिम्मेदारी एक कमिटी को सौंपी थी। हालांकि जिस होर्डिंग के गिरने से यह हादसा हुआ था, उस पर केवल दिशा संबंधी सूचना लिखी थी और कोई विज्ञापन नहीं था। लेकिन आंधी- बारिश के मौजूदा मौसम में विज्ञापन माफिया की तरफ से शहर में लगे दर्जनों अवैध होर्डिंग किसी बड़े हादसे की वजह बन सकते हैं। विज्ञापन माफिया की पहुंच प्रदेश सरकार के ऊंचे नेताओं तक होने के चलते अफसर कार्रवाही के बजाए महज खाना-पूर्ति करना मजबूरी बता रहे हैं।

गौरतलब है कि सेक्टर-18, सेक्टर- 71 चौराहे, सेक्टर- 71 चौराहे से ग्रेटर नोएडा वेस्ट जाने वाले रास्ते पर तकरीबन 3 दर्जन से ज्यादा अवैध होर्डिग विज्ञापन माफियाओं ने लगा रखे हैं। इस मामले पर प्राधिकरण सूत्रों ने बताया कि करीब एक साल पहले बोर्ड मीटिंग में शहर में यूनिपोल और विज्ञापन संबंधी होर्डिंग या गेंट्री लगाने पर रोक लगा दी गई थी। आंधी- तूफान के दौरान होर्डिंग के गिरने से दुर्घटनाओं की आशंका और हादसे रोकने के चलते यह निर्णय लिया गया था। उसकी जगह पर सड़क के किनारे फुटपॉथों पर स्ट्रीट फर्नीचर आदि लगाने की योजना तैयार की गई थी। प्राधिकरण से टेंडर के जरिए मिलने वाले विज्ञापन होर्डिंग की मोटी कमाई के चलते नए नियम प्रभावी नहीं हो सके। यहीं नहीं सरकार से जुड़े नेताओं के करीबियों ने बगैर टेंडर लिए ही अपनी मनमर्जी से दर्जनों विज्ञापन वाले होर्डिंग अवैध रूप से लगाकर मोटी कमाई वाले कारोबार को शुरू कर लिया।

नेताओं के दबाव के चलते निष्क्रिय हुई प्रशासनिक मशीनरी ने कभी अवैध होर्डिंग को हटाने की हिम्मत नहीं जुटाई। नतीजा यह है कि नोएडा शहर में जितने वैध विज्ञापन होर्डिंग लगे हैं, तकरीबन उससे ज्यादा अवैधों की संख्या है। इस मामले पर प्राधिकरण के उच्चाधिकारी सटीक जवाब देने के बजाए जांच जारी होने की गोलमोल बात कहकर इस संवेदनशील मुद्दे से बचना चाह रहे हैं।

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